भूमिहीन विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर मिलेगी जमीन : डॉ. जायसवाल।। 2. बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय 5 एकड़ भूखण्ड पर बनकर तैयार
राजकुमार यादव की रिपोर्ट
पटना/ राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने आश्वासन दिया है कि राज्य के भूमिहीन विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। दो महीने में 20 केंद्रीय विद्यालयों के लिए पांच-पांच एकड़ भूमि दी गई है। विद्यालयों और खेल मैदानों से अतिक्रमण हटाया जाएगा। शिक्षा विभाग के भूमि संबंधी कार्यों के निष्पादन के लिए अलग से डीसीएलआर या एडीएम स्तर के पदाधिकारी को नोडल अफसर के रूप में तैनात किया जाएगा।
अधिवेशन भवन में चल रहे राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के दूसरे दिन सोमवार को डॉ. जायसवाल ने शिक्षा अधिकारियों को काम की गुणवत्ता सुधारने और तनावमुक्त होकर काम करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में माननीय शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी भी मौजूद रहे।
डॉ. जायसवाल ने कहा कि राजस्व विभाग के पास अबतक ऐसे 147 विद्यालयों की सूची आई है जहां पर अतिक्रमण है। यह संख्या और बढ़ सकती है। ऐसे विद्यालयों को अतिक्रमणमुक्त कराने और विद्यालयों तक पहुंच पथ के लिए जमीन देने की दिशा में त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी नई पीढ़ी को तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। माननीय शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी की पहल से शिक्षकों की समस्याएं एक-एक कर दूर की जा रही हैं। शिक्षक भी शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार सुधार के लिए समर्पित होकर काम करें।
राजस्व मंत्री ने सुझाव दिया कि विभागीय सचिव, डीईओ, आरडीडी और डीपीओ सहित सभी पदाधिकारी महीने में कम से कम एक दिन किसी विद्यालय में जाकर बच्चों से संवाद करें और कक्षा लें। इससे शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सोने से पहले पूरे दिन के काम का आकलन करना चाहिए। साथ ही अगले दिन किए जाने वाले कार्यों की योजना बनाकर ही सोना चाहिए। काम का मूल्यांकन करने से उसकी गुणवत्ता में सुधार आता है।
उन्होंने शिक्षा अधिकारियों से कहा कि काम के दबाव को अपने ऊपर हावी न होने दें। अधिकारी कलम और दिमाग से काम करते हैं। इसलिए मानसिक तनाव को कम करना जरूरी है। दिन में कई लोगों से मिलने वाले अधिकारी को हर व्यक्ति से नई ऊर्जा और मुस्कान के साथ मिलना चाहिए। यह जरूर ध्यान रहे कि आपका हर काम परिणाम केंद्रित होना चाहिए।
माननीय राजस्व मंत्री ने कहा कि अधिकारियों और शिक्षकों को समय-समय पर ऐसे चिंतन शिविरों के माध्यम से अपने काम की समीक्षा करनी चाहिए। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार का आकलन किया जा सकेगा।
इससे पूर्व शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर स्वागत किया।
2. बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय 5 एकड़ भूखण्ड पर बनकर तैयार
पटना/बिहार में इंजीनियरिंग शिक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय का भवन और परिसर लगभग तैयार हो चुका है। भवन निर्माण विभाग द्वारा 66.92 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति से पटना के मीठापुर में लगभग 5 एकड़ भूमि पर बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय परिसर का निर्माण पूरा किया गया है। विश्वविद्यालय का मुख्य भवन जी+4 संरचना में विकसित किया गया है, जिसमें आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों और सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। ग्राउंड फ्लोर से लेकर चतुर्थ तल तक छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के काम करने में सहजता को प्रमुखता दी गई है।
इवैल्यूएशन सेंटर से लेकर स्कैनिंग रूम तक मौजूद
– ग्राउंड फ्लोर: यहां रजिस्ट्रार, डीन, फाइनेंस अधिकारी और परीक्षा नियंत्रक के कार्यालय बनाए गए है। साथ ही इवैल्यूएशन सेंटर, स्टोर रूम, कैफेटेरिया, डबल हाइट एंट्री एरिया और प्रसाधन की व्यवस्था है।
प्रथम तल: इस तल पर कुलपति का कार्यालय, भव्य कांफ्रेंस हॉल, स्कैनिंग रूम और इवैल्यूएशन सेंटर स्थापित किए गए हैं।
द्वितीय तल: इस फ्लोर पर 11 कार्यालय कक्ष, छह स्टोर रूम, पांच स्कैनिंग रूम, एक इवैल्यूएशन सेंटर और एक कांफ्रेंस हॉल निर्मित हैं।
तृतीय तल: यहां पांच रिकॉर्ड रूम के साथ पर्याप्त स्टोर और स्कैनिंग सुविधाएं हैं।
चतुर्थ तल: सबसे आखिरी तल पर एक और इवैल्यूएशन सेंटर तथा दो विशाल हॉल बनाए गए हैं।
परिसर में एक मंजिला गेस्ट हाउस, केयरटेकर के लिए आवासीय व्यवस्था और गार्ड रूम भी शामिल हैं।
परीक्षा संबंधी गतिविधियों को मिलेगा बल: सचिव
भवन निर्माण विभाग के सचिव श्री प्रणव कुमार ने कहा कि इस विश्वविद्यालय भवन के निर्माण से प्रशासनिक और परीक्षा संबंधी गतिविधियों को नया बल मिलेगा। इससे इंजीनियरिंग संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
उन्होंने कहा कि सभी महत्वपूर्ण कार्यालय (कुलपति, रजिस्ट्रार, डीन, वित्त, परीक्षा नियंत्रक) एक ही आधुनिक भवन में होने से कामकाज तेज, व्यवस्थित और समन्वित होगा। इसके अलावा बहु इवैल्यूएशन सेंटर, स्कैनिंग रूम और रिकॉर्ड रूम होने से परीक्षा प्रक्रिया तेज और सुरक्षित बनेगी। बेहतर प्रशासनिक ढांचे से इंजीनियरिंग कॉलेजों के संचालन में सुधार आएगा, जिससे छात्रों को विश्वस्तरीय सुविधाओं का लाभ मिलेगा। यह परिसर छात्रों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों को पेशेवर माहौल का अनुभव कराएगा।

