जयनगर अनुमंडल अस्पताल में मासूम बच्चों के मौत पर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर उपचार में हुई कथित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने की मांग
सुरेश कुमार गुप्ता
मधुबनी/जयनगर अनुमंडल के जयनगर में भाकपा-माले जयनगर के प्रखंड सचिव भूषण सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि जयनगर अनुमंडल अस्पताल में डॉक्टरों की कथित लापरवाही के कारण पड़वा वार्ड संख्या-1, प्रखंड जयनगर निवासी पप्पू पासवान के 5 वर्षीय पुत्र पार्थिक कुमार की 31 जुलाई 2026 की संध्या लगभग 7 बजे मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना के बाद अस्पताल परिसर में उत्पन्न तनाव एवं तोड़फोड़ की स्थिति के लिए अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली जिम्मेदार है।
भूषण सिंह ने आरोप लगाया कि उपचार के समय ड्यूटी पर कार्यरत डॉ. शैलेन्द्र कुमार द्वारा यदि सर्पदंश का समय पर एवं मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुरूप उपचार किया गया होता, तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर उपचार में हुई कथित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. शैलेन्द्र कुमार सरकारी सेवा में रहते हुए अस्पताल के सामने तथा भेलवा चौक स्थित दो आशा नर्सिंग होम का संचालन करते हैं तथा इंद्रप्रस्थ अस्पताल सहित अन्य निजी अस्पतालों में भी कार्यरत हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. कुमार रौनित स्वयं निजी स्वास्तिक हेल्थ केयर नर्सिंग होम का संचालन करते हैं तथा उनके संरक्षण में सरकारी अस्पताल के कई डॉक्टर निजी नर्सिंग होम चलाते हैं। भाकपा-माले का आरोप है कि इसी कारण सरकारी अस्पताल में मरीजों को अपेक्षित समय और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा नहीं मिल पाती। प्रेस विज्ञप्ति में स्वास्थ्य प्रबंधक प्रभात कुमार प्रशांत पर भी आरोप लगाते हुए कहा गया कि वे आरबीएसके (RBSK) योजना में निजी वाहन संचालन के अलावा अन्य कथित अनियमितताओं में संलिप्त हैं। पार्टी ने इन आरोपों की भी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
भाकपा-माले ने बिहार सरकार के स्वास्थ्य सचिव से मांग की है कि पार्थिक कुमार की मृत्यु की न्यायिक अथवा उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच में उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही सिद्ध होती है, तो संबंधित दोषी अधिकारियों एवं चिकित्सकों के विरुद्ध भारतीय कानून के अनुरूप हत्या सहित उपयुक्त धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा डॉ. शैलेन्द्र कुमार, डॉ. कुमार रौनित एवं स्वास्थ्य प्रबंधक प्रभात कुमार प्रशांत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर सेवा से बर्खास्त किया जाए। साथ ही दोषी चिकित्सकों के वेतन से पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
पार्टी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में निजी प्रैक्टिस एवं निजी नर्सिंग होम संचालन के आरोपों की व्यापक जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मासूम की जान इस प्रकार न जाए। भाकपा-माले ने चेतावनी दी कि यदि अविलंब कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी जनांदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी।

