शोधार्थियों के आंदोलन में पहुंचे पप्पू यादव, बोले- मांगें नहीं मानीं तो 16 अगस्त को बैठूंगा उपवास पर
न्यूज़ डेस्क
पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने आज ‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले चल रहे आंदोलन में शोधार्थी सहायक प्राध्यापक बहाली समेत उनकी विभिन्न मांगों का समर्थन किया। दिल्ली से पटना आये पप्पू यादव ने गर्दनीबाग धरना स्थल पहुंचकर पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन-सह-महाधरना पर बैठे शोधार्थियों के आंदोलन को समर्थन दिया। सांसद ने आंदोलनरत शोधार्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके संघर्ष में साथ खड़े रहने का भरोसा दिया। पप्पू यादव ने कहा कि यदि शोधार्थियों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह 16 अगस्त को गर्दनीबाग धरना स्थल पर एक दिवसीय उपवास करेंगे।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा और शोध से जुड़े युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए तथा सरकार को इस मामले में जल्द सकारात्मक पहल करनी चाहिए। शोधार्थियों की प्रमुख मांग है कि बिहार में सहायक प्राध्यापक की बहाली में UGC रेगुलेशन 2018 के टेबल 3A को लागू किया जाए। इसके अलावा सहायक प्राध्यापक पद के अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष करने तथा बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की बहाली स्थायी एवं नियमित रूप से करने की मांग भी आंदोलनकारियों की ओर से की जा रही है।
उन्होंने कहा कि शोधार्थियों का आंदोलन केवल नौकरी की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके सम्मान, अधिकार और न्याय से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आमरण अनशन पर बैठे शोधार्थियों की स्थिति को देखते हुए तत्काल संवाद स्थापित किया जाए और उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। सांसद ने आंदोलनरत शोधार्थियों को आश्वस्त किया कि वे उनके साथ खड़े हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी आवाज को उचित मंच तक पहुंचाएंगे।
इस दौरान उन्होंने TRE-4 के अभ्यर्थियों की मांगों और समस्याओं का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक नियुक्ति और उच्च शिक्षा से जुड़े अभ्यर्थी लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनकी समस्याओं का समाधान करे और नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी, नियमित एवं समयबद्ध बनाए। गर्दनीबाग धरना स्थल पर शोधार्थियों ने सरकार से अपनी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

