जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय में वाचनालय की स्थापना बदला नाम।। 2.6 महीने में शुरू होगा रेप्टाइल इक्यूबेशन कम इंटरप्रिटेशन सेंटर का काम।।3.चीनी मिलों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए गन्ना उद्योग विभाग ने शुरू की कार्रवाई।। 4.अनुशासनिक कार्रवाई में प्राधिकार से अनुमोदन जरूरीः दीपक कुमार सिंह। । 5.राजगीर, बिहारशरीफ समेत अन्य रूटों पर चलेगी पीएम ई-बस ।। 7.पटना समेत 6 जिलों में सायरन बजते ही बंद होंगी बत्तियां, मई के तीसरे सप्ताह में होगी नागरिक सुरक्षा की बड़ी मॉकड्रिल
राजकुमार यादव
पटना/जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय में वाचनालय शुरू होने वाला है। बुधवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए, कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार के संग्रहालय निदेशालय के अंतर्गत स्थापित कर्पूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय में वाचनालय प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
कैबिनेट के इस निर्णय के तहत संग्रहालय के नाम में भी संशोधन करते हुए इसे “भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय–सह–वाचनालय” करने का निर्णय लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री ने इस स्थल के भ्रमण के दौरान इसे अध्ययन एवं शोध के एक सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता जताई थी।
इस फैसले पर खुशी जताते हुए संग्रहालय निदेशालय के निदेशक कृष्ण कुमार ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजवादी न्याय समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए जीवन भर संघर्षरत रहे। पिछड़े वर्गों के उत्थान एवं आरक्षण नीति को प्रभावी रूप से लागू करने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही। 26 जनवरी 2024 को मरणोपरांत उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। ये घोषणा उनके सम्मान में चार चांद लगाने जैसा है।
इस निर्णय का उद्देश्य जननायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन, विचारों एवं योगदान को व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाना और विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं आमजन के लिए अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराना है। वाचनालय की स्थापना से यह संग्रहालय ज्ञान एवं विमर्श का एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा। साथ ही परिसर में आगंतुकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
2.6 महीने में शुरू होगा रेप्टाइल इक्यूबेशन कम इंटरप्रिटेशन सेंटर का काम
पटना/पश्चिम चंपारण के बगहा में सरीसृपों के संरक्षण के लिए रेप्टाइल इन्क्यूबेशन कम इंटरप्रिटेशन सेंटर की स्थापना की तैयारी तेज हो गई है। उम्मीद है कि अगले 6 महीने में इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। यह केंद्र विशेष रूप से घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण और उनके अंडों के सुरक्षित विकास में अहम भूमिका निभाएगा।
इस परियोजना के लिए 4 अक्टूबर 2025 को वन्यप्राणी सप्ताह के अवसर पर वाईल्डलाईफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के साथ एमओयू किया गया था। इसके बाद संस्था ने 3 एकड़ की भूमि उपलब्ध कराई थी जिसकी घेराबंदी का काम पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में वहां आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करने का काम चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अगले 6 महीने में यह काम पूरा हो जाएगा, जिसके बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
गंडक नदी के किनारे स्थित यह प्रस्तावित केंद्र जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल घड़ियाल और मगरमच्छ जैसी प्रजातियों को संरक्षण मिलेगा, बल्कि कछुए और अन्य जलीय जीवों को भी मजबूती मिलेगी।
इस परियोजना से क्षेत्र में इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। गंडक नदी के किनारे स्थित यह केंद्र पर्यटकों के लिए आकर्षण के केंद्र के रूप में स्थापित होगा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
3.चीनी मिलों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए गन्ना उद्योग विभाग ने शुरू की कार्रवाई
पटना/बिहार में गन्ना उद्योग को बढ़ावा देने और चीनी मिलों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए राज्य सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार के आदेश पर गन्ना उद्योग विभाग ने क्षेत्रीय विकास परिषद (जेडीसी) के कमीशन में 90 फीसदी की कटौती कर दिया है। इससे किसानों के हित को संरक्षित करने के साथ ही चीनी उद्योग को आर्थिक लाभ हो सकेगा।
विदित हो कि राज्य सरकार ने बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू कराने के साथ ही राज्य में 25 नई चीनी मिलों को स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे कि बिहार में गन्ना उद्योग को बढ़ावा मिल सकें। उधर, राज्य के चीनी उद्योगों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो रहा था। इसको लेकर चीनी मिल संचालकों द्वारा राज्य सरकार से आर्थिक पैकेज देने की मांग की जा रही थी। इसको देखते हुए गन्ना उद्योग विभाग ने पेराई सत्र 2025-26 में क्रय किये गए गन्ने पर क्षेत्रीय विकास परिषद को मिलने वाले ईख मूल्य दर का 1.80 फीसदी राशि में कटौती कर उसे 0.2 फीसदी कर दिया है। इस तरह जेडीसी के कमीशन में 90 फीसदी की कटौती की गई है।
बताया जाता है कि चीनी मिलों के द्वारा किसानों से खरीदे जाने वाले प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य का 1.80 फीसदी राशि कमीशन के रूप में जेडीसी को भुगतान किया जाता था। जिससे क्षेत्रीय विकास परिषद राज्य में गन्ना क्षेत्र का विकास, गन्ना बीज, किसानों की समस्याओं सहित अन्य कार्यों को कर सकें। राज्य सरकार द्वारा जेडीसी के कमीशन में की गई 90 फीसदी कटौती से चीनी मिलों को अपने आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।
इस संबंध में अपर मुख्य सचिव श्री के.सेंथिल कुमार ने बताया कि राज्य में चीनी मिल उद्योगों के आर्थिंक स्थिति को बेहतर बनाने और किसानों के हितों को देखते हुए जेडीसी के कमीशन में कटौती की गई है। इसकी स्वीकृति कैबिनेट से मिल गई है। इससे चीनी मिल संचालकों को लाभ होगा।
4.अनुशासनिक कार्रवाई में प्राधिकार से अनुमोदन जरूरीः दीपक कुमार सिंह
पटना/सामान्य प्रशासन विभाग के महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने शुक्रवार को कहा कि अनुशासनिक कार्रवाई में सरकारी सेवक के खिलाफ गठित आरोप पत्र का अनुशासनिक प्राधिकार से अनुमोदन जरूरी है। इसके अभाव में मामला न्यायालय की पहली सुनवाई में ही खारिज हो सकता है।
यह बात श्री सिंह शास्त्रीनगर स्थित राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, सर्वे भवन के सभागार में आयोजित पटना प्रमंडल के सभी 6 जिलों के अपर समाहर्ता, अपर समाहर्ता स्थापना एवं अपर समाहर्ता विभागीय जांच के साथ-साथ कार्यालय सहायकों को संबोधित करते हुए कही। वह यहां बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के अनुप्रयोग पर आधारित उन्मुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
निगरानी और आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्होंने कहा कि सरकारी सेवक के खिलाफ गठित आरोप पत्र में गवाहों की सूची होना जरूरी है। साक्ष्य के अभाव में कोई भी अभिलेख अपने आप में संपुष्ट नहीं है। इस अवसर पर उन्होंने सरकारी सेवक के खिलाफ होने वाली अनुशासनिक कार्रवाई और इस प्रक्रिया में बरती जाने वाली सावधानियों से सभी पदाधिकारियों को रूबरू किया। उन्होंने आरोप प्रमाणित करने के लिए आवश्यक तथ्यों को सिलसिलेवार समझाया। कहा कि जब भी किसी सरकारी सेवक के खिलाफ शिकायत मिलती है तो सबसे पहले मामले की प्रारंभिक जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने साफ कहा कि भ्रष्टाचार पर रोक लगनी चाहिए लेकिन अनुशासनिक कार्रवाई के मामले में न्याय की स्थापना भी जरूरी है।
उन्होंने संचालन और प्रस्तुतीकरण पदाधिकारियों के साथ साक्ष्यों के चयन में गंभीरता बरतने की सीख दी। कहा कि अनुशासनिक कार्रवाई के लिए पदाधिकारियों को सबसे पहले बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 का अध्ययन करना चाहिए। इस अवसर पर प्रशिक्षक के रूप में मौजूद सतीश तिवारी, शालिग्राम पांडेय ने भी पदाधिकारियों को नियमों से अवगत कराया। कार्यशाला में निदेशालय के संयुक्त सचिव, प्रभात कुमार, अमरेश कुमार अमर, उप सचिव आशुतोष कुमार आदि की प्रमुख उपस्थिति रही।
5.राजगीर, बिहारशरीफ समेत अन्य रूटों पर चलेगी पीएम ई-बस
पटना/राज्य में पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बिहार को जल्द ही 400 इलेक्ट्रिक एसी बसें मिलने जा रही हैं। इनमें से 150 बसें पटना को आवंटित की जाएंगी। जिनमें से 75 बसें पटना शहर के अंदर सिटी बस के रूप में चलाई जाएंगी, जबकि बाकी 75 बसें पटना से राजगीर, बिहारशरीफ सहित अन्य इंट्रासिटी रूटों पर चलाई जाएंगी। प्रत्येक बस में लगभग 60 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) के अनुसार, इन बसों के सुचारू संचालन शुरू होने से पहले जिलों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का काम तेजी से चल रहा है। पूर्णिया में ई-चार्जिंग स्टेशन का काम पूरा हो चुका है, जबकि गया में 60 प्रतिशत, पटना और मुजफ्फरपुर में 50 प्रतिशत व भागलपुर और दरभंगा में चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण कार्य जारी है। इन विशेष चार्जिंग स्टेशनों पर एक ई-बस को चार्ज होने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगेगा। पटना में फुलवारीशरीफ डिपो, आईएसबीटी बैरिया सहित निगम के सभी डिपो पर प्रति 50 बसों के लिए 8 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे।
निगम ने बताया कि सीएनजी व पूर्व से संचालित ई-बसों के जरिए 2021 से अबतक 25 लाख लीटर डीजल की खपत घटी है और लगभग 7 हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन भी कम हुआ है। भविष्य में भी बसों की खरीद पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए की जाएगी।
7.पटना समेत 6 जिलों में सायरन बजते ही बंद होंगी बत्तियां, मई के तीसरे सप्ताह में होगी नागरिक सुरक्षा की बड़ी मॉकड्रिल
पटना/केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार मई के तीसरे सप्ताह में पटना समेत राज्य के छह जिलों में हवाई हमला एवं ब्लैकआउट संबंधी माकड्रिल का आयोजन होगा। राज्य स्तर पर नागरिक सुरक्षा निदेशालय को माकड्रिल के सफल आयोजन के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है। माकड्रिल की तैयारी को लेकर गुरुवार को आपदा प्रबंधन विभाग के सभागार में संबंधित जिलों के जिला पदाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक का आयोजन किया गया।
इसकी अध्यक्षता आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने की। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में उन्होंने कहा कि नागरिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार वर्ष में कम से कम दो बार अर्द्धवार्षिक माकड्रिल का आयोजन किया जाना है। पिछले अभ्यास में पटना समेत दूसरे कई जिलों का उत्कृष्ट प्रदर्शन पाया गया था। उन्होंने बताया कि निर्धारित तिथि और समय पर एक साथ सायरन बजेंगे।
उन्होंने संबंधित जिलों में सायरन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कहा कि ब्लैक आउट में बिजली की भूमिक महत्वपूर्ण होती है। इसलिए जिलों के पदाधिकारी समय रहते बिजली विभाग से सामंजस्य स्थापित करेंगे और ब्लैक आउट की सफलता में सहयोग लेंगे। आगे उन्होंने कहा कि सायरन के लिए चौक-चौराहों पर लगे साउंड सिस्टम, थानों और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का भी सहयोग लिया जा सकता है। पदाधिकारी माकड्रिल के दौरान अस्पतालों की खिड़कियों पर क्यूबिकल पर्दा या प्राइवेसी कर्टन लगवाना सुनिश्चित करेंगे। माकड्रिल के दौरान आमजन पैनिक ना करें, इसके लिए समुचित प्रचार-प्रसार करेंगे।
बैठक में असैनिक सुरक्षा के महानिदेशक-सह-आयुक्त डॉ. परेश सक्सेना ने नागरिक सुरक्षा की दिशा में होने वाले माकड्रिल की बारीकियों से उपस्थित पदाधिकारियों को रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि पिछले अभ्यास में बेगूसराय जिले का उत्कृष्ट प्रदर्शन था। इसी तर्ज पर अगले अभ्यास के लिए पदाधिकारी अपनी तैयारी पूरी करें। उन्होंने अभ्यास की सफलता के लिए स्कूल-कॉलेजों, दवा व्यवसाइयों के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को इसमें शामिल करने का आह्वान किया। उन्होंने माकड्रिल के लिए निर्धारित सभी छह बिंदुओं का सिलेसिलेवार उल्लेख किया और इसके उद्देश्यों से भी अगवत कराया। इस अवसर पर मुख्य रूप से पुलिस महानिरीक्षक नागरिक सुरक्षा निदेशालय, पुलिस अधीक्षक नागरिक सुरक्षा निदेशालय, जिलाधिकारी पटना, जिलाधिकारी किशनगंज, जिलाधिकारी बेगूसराय, जिलाधिकारी पूर्णिया, जिलाधिकारी अररिया, जिलाधिकारी कटिहार के साथ-साथ संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक, समादेष्टा एसडीआरएफ व आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव श्री मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।

