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डीए मामलों में सावधानी से तैयार करें आरोप पत्र : दीपक कुमार सिंह।।2.पॉलिथीन पशुओं के लिए साइलेंट किलर, शरीर पर पड़ता बुरा प्रभाव।। 3.पॉलिथीन पशुओं के लिए साइलेंट किलर, शरीर पर पड़ता बुरा प्रभाव।। 4.काठमांडू में 2 मई को होगी भारत – नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजनाओं की संयुक्त समिति की बैठक

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राजकुमार यादव की रिपोर्ट 

पटना/सामान्य प्रशासन विभाग के महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने कहा कि आय से अधिक संपत्ति मामलों में किसी भी सरकारी सेवक के खिलाफ आरोप-पत्र के गठन में गंभीरता बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में यह आरोप पत्र दो कंडिकाओं में ही सीमित रहते हैं, जबकि नियमानुसार सरकारी सेवकों के लिए संपत्ति अर्जित करने और अपनी संपत्ति का सरकार को प्रतिवेदन देने से संबंधित नियमों का उल्लंघन ही अनुशासनिक कार्रवाई का आधार बनता है।
श्री सिंह बुधवार को दशरथ माझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के सभागार में बिहार प्रशासनिक-बिहार भारतीय प्रशासनिक और बिहार सचिवालय सेवा से इतर राजधानी पटना में पदास्थापित विभागों के अन्य सेवा संवर्गों के पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। वह यहां आयोजित अनुशासनिक कार्रवाई संबंधी उन्मुखीकरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीजर लिस्ट में सरकारी सेवक के मौजूदा और पुरानी संपत्ति की घोषणा, अचल संपत्ति अर्जित करने के लिए बने नियमों का अनुपालन जरूरी है। किसी भी संचालन कर्ता को यह देखना जरूरी होगा कि अचल संपत्ति बनाने के क्रम में सरकारी सेवक को कहां-कहां सरकार से अनुमति लेने की जरूरत है और कहां सूचना देने का अधिकार उसे प्राप्त है। इस क्रम में अगर सरकारी सेवक ने कहीं भी नियम तोड़ा है तो यह अनुशासनिक कार्रवाई का दूसरा आधार बनेगा।
इस अवसर पर मुख्य जांच आयुक्त ने बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 की बारीकियों से प्रशिक्षण में शामिल सभी पदाधिकारियों को रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवक के खिलाफ किसी भी प्रकरण के संचालन और प्रस्तुतीकरण से पहले सभी पदाधिकारी उपलब्ध कराई गई पुस्तक में उल्लेखित नियमों का अध्ययन करें।
प्रशिक्षक के तौर पर मौजूद सतीश तिवारी ने अनुशासनिक कार्रवाई के लिए आवश्यक शब्दों में बदलाव, आरोप पत्र का गठन, अनुशासनिक कार्यवाही और कार्रवाई के बीच के अंतर, सरकारी सेवक के पदोन्नति रोकने संबंधी आवश्यक शर्तों के साथ-साथ आर्टिकल 310, 311 की बारीकियों से भी पदाधिकारियों को अवगत कराया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव प्रभात कुमार, संयुक्त सचिव अमरेश कुमार अमर, शालिग्राम पांडेय आदि की उपस्थिति रही।

 

2.पंचायत सचिवों और विभाग के बीच कई मुद्दों पर बनी सहमति

 

पटना/पांच सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर चल रहे पंचायत सचिव के प्रतिनिधि और पंचायती राज विभाग के बीच बुधवार को एक सकारात्मक वार्ता संपन्न हुई। विभाग के निदेशक नवीन कुमार सिंह ने कहा कि पंचायत सचिवों के प्रतिनिधि के साथ हुई बातचीत में कई मुद्दों पर परस्पर सहमति बनी है। ‘स्थानांतरण-पदस्थापन’ के संबंध में पंचायत सचिव संघ के सदस्यों से विमर्श कर दोबारा बातचीत होगी।
निदेशक ने कहा कि पंचायत सचिव ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था व पंचायत शासन प्रणाली के महत्वपूर्ण अंग हैं। विभाग उनके दायित्वों और योगदान का पूर्ण सम्मान करता है, उनके कार्य निष्पादन को सुदृढ़ व प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विभाग सदैव संवाद, समन्वय एवं संस्थागत विमर्श के माध्यम से समस्याओं के समाधान का पक्षधर रहा है। पंचायत सचिवों के संशय एवं समस्याओं के समाधान के लिए विभाग पंचायत सचिव प्रतिनिधियों से निरंतर संवाद कर रहा है।
विभाग को विश्वास है कि पंचायत सचिव संघ जनहित, ग्रामीण सेवा वितरण की निरंतरता तथा पंचायत प्रशासन की सुचारु व्यवस्था के प्रति संवेदनशील रहते हुए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाएगा, जिससे आम नागरिकों को प्रदत्त सेवाएं निर्बाध रूप से संचालित होती रहें।

 

3.पॉलिथीन पशुओं के लिए साइलेंट किलर, शरीर पर पड़ता बुरा प्रभाव

 

पटना/पशुओं के स्वास्थ्य पर पॉलिथीन के दुष्प्रभावों को लेकर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं। आम लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से जारी सुझाव में कहा गया है कि पॉलिथीन पशुओं के लिए साइलेंट किलर की तरह काम करता है, इसलिए हमें अपने चारों तरफ पोलिथीन मुक्त समाज बनाने की आवश्यकता है।
विभाग का सुझाव है कि खाद्य पदार्थों, हरी सब्जियों के छिलके आदि को पोलिथीन में बंद कर सड़क किनारे, रेल पटरी के किनारे या खेत-खलिहान, नदी-तालाब में या उनके किनारे नहीं फेंकना चाहिए। पॉलिथीन चिकना एवं स्वादरहित होता है, जिस कारण पशु आसानी से अन्य खाद्य सामग्रियों के साथ इसे भी निगल लेते हैं, जिससे पशुओं की जान तक जा सकती है।
पॉलिथीन पशुओं के पेट या आंतों में जाकर धीरे-धीरे जमा हो जाता है एवं कड़ा गेंद या रस्सी का रूप ले लेता है। परिणामस्वरूप पशुओं को पाचन संबंधी समस्याएं जैसे भूख न लगना, दस्त, गैस (अफरा) एवं पेट दर्द की समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं और अंत में यह पशुओं के लिए साइलेंट किलर के रूप में कार्य करता है।
अन्य बीमारियों की तरह इसका कोई दवा, सूई, गोली या चूर्ण आदि से उपचार नहीं किया जा सकता है। पॉलिथीन एवं इसके साथ अन्य सामग्रियों को ऑपरेशन के जरिए पेट से निकालना ही इसका एकमात्र इलाज होता है। इस तरह के गंभीर दुष्प्रभावों से पशुओं को बचाने के लिए पोलिथीन के कैरी बैग एवं लिफाफों पर कानूनी रूप से लगाए गए प्रतिबंध का पालन किया जाना चाहिए। विभाग ने पॉलिथीन मुक्त समाज बनाकर पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के साथ-साथ नए भारत के निर्माण पर जोर दिया है।

4.काठमांडू में 2 मई को होगी भारत – नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजनाओं की संयुक्त समिति की बैठक

पटना/बिहार सरकार की पहल पर आगामी 2 मई को काठमांडू में भारत – नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजनाओं की संयुक्त समिति (जेसीकेजीपी) की 11वीं बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कोसी और गंडक परियोजनाओं से संबंधित द्विपक्षीय विषयों के समाधान, बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई व्यवस्था तथा परियोजनाओं के प्रभावी संचालन पर चर्चा की जाएगी।
जल संसाधन विभाग के अनुसार इस बैठक में भारत – नेपाल से होकर बहने वाली नदियों में संभावित बाढ़ को देखते हुए जेसीकेजीपी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत एवं नेपाल के प्रतिनिधियों के बीच विभिन्न तकनीकी, प्रशासनिक एवं वित्तीस मुद्दों पर विचार विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही कोसी परियोजना अंतर्गत परियोजना क्षेत्र की सुरक्षा, अवसंरचना के रख रखाव, निर्माण सामग्री पर स्थानीय कर, कोसी बाराज के दोनों ओर तटबंधों के कटाव, पश्चिमी मुख्य नहर के गेट संचालन, नेपाल क्षेत्र में सेवा पथ रख-रखाव, अतिक्रमण हटाने, परियोजना कर्मियों की सुरक्षा तथा कोसी टप्पू वन्यजीव क्षेत्र से संबंधित समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। वहीं गंडक परियोजना से जुड़े मुद्दों में अधिग्रहित भूमि पर कब्जा, जल निकासी अवरोध से कृषि भूमि में जलजमाव, नहरों में निर्धारित जलस्तर एवं डिस्चार्ज बनाए रखना, बाढ़ सुरक्षा एवं कटाव निरोधक कार्य, सेवा पथों का अनुरक्षण तथा सिल्टयुक्त जल प्रवाह नियंत्रण, सहित अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल सहित सभी संबंधित अधिकारी, जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार के अधिकारी शामिल होंगे।