आखिर कब तक बिहार के मजदूर और गरीब यात्री ऐसे ही परेशान होते रहेंगे
सेंट्रल डेस्क
मुंबई के कुर्ला टर्मिनल पर यह नजारा भारतीय रेलवे व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। त्योहार हो, छठ हो या घर जाने का समय यूपी-बिहार के यात्रियों को ट्रेन में जगह पाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
वायरल वीडियो और तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह हजारों की संख्या में मजदूर, छात्र और परिवार के लोग ट्रेन का इंतजार करते-करते घंटों परेशान रहे। सीट तो दूर, ट्रेन में चढ़ना भी एक जंग बन जाता है।
हम कोई एहसान नहीं मांग रहे, बस सवाल पूछ रहे हैं
1. जब हर साल पता है कि इस सीजन में भीड़ बढ़ेगी, तो पर्याप्त स्पेशल ट्रेनें क्यों नहीं चलाई जातीं।
2. गरीब और मजदूर यात्रियों के लिए जनरल डिब्बों की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई जाती।
3. आखिर कब तक बिहार के लोग ऐसे ही धक्के खाते रहेंगे।
रेलवे देश की लाइफलाइन है लेकिन लाइफलाइन का मतलब सिर्फ माल ढुलाई नहीं बल्कि हर यात्री को सम्मानजनक सफर देना भी है।बिहार के लोग मुंबई, दिल्ली, सूरत में जाकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, बदले में उन्हें घर जाने के लिए इतनी तकलीफ क्यों झेलनी पड़ती है।
सरकार और रेलवे प्रशासन से बिहार हलचल न्यूज की मांग है कि यूपी-बिहार रूट पर स्थायी रूप से ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए।वेटिंग लिस्ट की समस्या खत्म की जाए और त्योहारों पर विशेष व्यवस्था की जाए।

