बिहार विधान परिषद में सैटेलाइट टाउनशिप पर बवाल भाजपा-राजद सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक, सभापति को करना पड़ा हस्तक्षेप ।। 2.सोलर स्ट्रीट लाइट पर जदयू भाजपा आमने सामने।।3.बिहार विधान सभा में मीडिया का विरोध प्रेस प्रतिनिधि को प्रवेश से रोकने पर पत्रकारों ने किया कवरेज का बहिष्कार
राज कुमार सिंह
पटना/बिहार विधान परिषद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को राज्य सरकार की प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप योजना पर चर्चा के बीच सदन का माहौल गरमा गया। योजना को लेकर शुरू हुई बहस देखते ही देखते भाजपा और राजद सदस्यों के बीच तीखी नोक-झोंक में बदल गई। दोनों पक्षों के बीच व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद सदन में हंगामे की स्थिति बन गई, जिसके बाद सभापति अवधेश नारायण सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। दरअसल, चर्चा के दौरान राजद सदस्य डॉ. सुनील सिंह ने सैटेलाइट टाउनशिप योजना के तहत भूमि अधिग्रहण और नियमों को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में कई भूमि मालिकों को अपनी जमीन की खरीद-बिक्री में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से नियमों को स्पष्ट करने और लोगों की शंकाएं दूर करने की मांग की।
जदयू सदस्य नीरज कुमार ने भी इस मुद्दे पर किसानों और जमीन मालिकों के बीच फैली भ्रम की स्थिति का उल्लेख करते हुए सरकार से स्पष्ट नीति सामने रखने की अपील की। सरकार की ओर से मंत्री नीतीश मिश्रा ने जवाब देते हुए कहा कि सैटेलाइट टाउनशिप योजना को लेकर सभी आवश्यक नियम तय हैं और किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं है। हालांकि, विपक्ष मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और इस मुद्दे पर बहस जारी रही। इसी दौरान भाजपा एमएलसी नवल किशोर यादव ने कहा कि टाउनशिप योजना का विरोध आम जमीन मालिक नहीं, बल्कि जमीन के कारोबार से जुड़े कुछ लोग कर रहे हैं। उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया। राजद सदस्य डॉ. सुनील सिंह ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई और दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया और सदन में माहौल तनावपूर्ण हो गया। कुछ देर तक हंगामा और नारेबाजी भी होती रही, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई। स्थिति बिगड़ती देख विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सभी सदस्यों से संयम बरतने, संसदीय भाषा का प्रयोग करने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। सभापति के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई। सैटेलाइट टाउनशिप योजना को लेकर हुई इस तीखी बहस ने एक बार फिर साफ कर दिया कि राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद अभी भी कायम हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
बिहार विधान सभा में पत्रकारों के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा
पटना। बिहार विधान सभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पत्रकारों से जुड़े विवाद को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी विधायकों ने विधान सभा परिसर में पत्रकारों के साथ हुए घटनाक्रम और मीडिया द्वारा किए जा रहे कवरेज बहिष्कार का मुद्दा उठाते हुए सरकार और विधान सभा प्रशासन से जवाब मांगा। विपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बेहद अहम है और पत्रकारों को अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए स्वतंत्र एवं अनुकूल माहौल मिलना चाहिए। उन्होंने इस मामले पर तत्काल चर्चा कराने की मांग करते हुए कहा कि पत्रकारों से जुड़े विवाद का जल्द समाधान निकाला जाए।
दरअसल, एक जदयू विधायक द्वारा पत्रकारों के खिलाफ विधान सभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत दिए जाने के बाद विवाद गहरा गया। इसके बाद एक मीडिया संस्थान के प्रेस प्रतिनिधि को विधानसभा परिसर में प्रवेश नहीं मिलने के विरोध में पत्रकारों ने कवरेज का बहिष्कार कर दिया। विरोधस्वरूप मीडिया कर्मियों ने अपने कैमरे नीचे रख दिए और विधान सभा परिसर में न तो फोटोग्राफी की और न ही वीडियो कवरेज की। इस दौरान विधान सभा पोर्टिको के बाहर विपक्षी विधायक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे, लेकिन मीडिया ने विरोध के तौर पर उनकी गतिविधियों की भी रिकॉर्डिंग नहीं की। इस घटनाक्रम का असर विधानसभा की नियमित मीडिया कवरेज पर भी देखने को मिला। सदन में विपक्षी सदस्यों ने प्रेम कुमार से हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि पत्रकारों को पहले की तरह निर्बाध रूप से कवरेज की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। विपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि मामले का समाधान नहीं हुआ तो वे सदन की कार्यवाही के बहिष्कार पर भी विचार करेंगे।
स्पीकर ने विपक्ष को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पत्रकारों से बातचीत की जा चुकी है और समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार को भी इस विषय पर चर्चा हुई थी और आगे भी संवाद के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की जाएगी। स्पीकर ने सदन को यह भी जानकारी दी कि पत्रकारों से जुड़े इस पूरे मामले पर चर्चा के लिए दोपहर 12 बजे का समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों की बात सुनकर उचित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। पत्रकारों के बहिष्कार और विपक्ष के विरोध के बीच विधान सभा का तीसरा दिन राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ मीडिया की स्वतंत्रता और विधान सभा में पत्रकारों की भूमिका को लेकर भी चर्चा का केंद्र बन गया।
2.सोलर स्ट्रीट लाइट पर जदयू भाजपा आमने सामने
पटना/ बिहार विधान सभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को ग्रामीण क्षेत्रों में लगी सोलर स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से गूंजा। खास बात यह रही कि इस बार विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही अपनी सरकार से जवाब मांगा। जदयूू विधायक श्याम रजक ने गांवों में बड़ी संख्या में खराब पड़ी सोलर लाइटों का मुद्दा उठाया, जिसके बाद भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने भी पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को क्षेत्र में जाकर वास्तविक स्थिति देखने की चुनौती दे डाली। प्रश्नकाल के दौरान श्याम रजक ने कहा कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में लगाई गई करीब 70 प्रतिशत सोलर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग ने एजेंसियों के माध्यम से लाइटें तो लगवा दीं और भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन अब खराब हो चुकी लाइटों की मरम्मत नहीं कराई जा रही है। इसके कारण कई गांवों में फिर से अंधेरा छा गया है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस पर जवाब देते हुए पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि सोलर स्ट्रीट लाइटों से जुड़ी शिकायतें सरकार के संज्ञान में हैं और विभाग लगातार उनकी समीक्षा कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह दावा खारिज कर दिया कि राज्य की 70 प्रतिशत लाइटें खराब हैं। मंत्री ने कहा कि जिन एजेंसियों को स्थापना और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है, उनके कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एजेंसी ने सरकारी राशि लेकर काम अधूरा छोड़कर फरार होने जैसी स्थिति नहीं है। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने सदन में ही सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि यदि सत्ता पक्ष के विधायक भी बड़ी संख्या में लाइटें खराब होने की बात कह रहे हैं, तो सरकार को वास्तविक स्थिति स्वीकार करनी चाहिए।
जीवेश मिश्रा ने मंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे उनके साथ संबंधित क्षेत्रों का दौरा करें। उन्होंने दावा किया कि कई पंचायतों में आधी से अधिक सोलर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं और विभागीय आंकड़े जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। उनका कहना था कि यदि सरकार स्वयं गांवों में जाकर निरीक्षण करे, तो वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी। सोलर स्ट्रीट लाइटों का मामला उठने के बाद सदन में कुछ देर तक तीखी बहस भी हुई। इस मुद्दे ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव और सरकारी योजनाओं की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए। अब देखने वाली बात होगी कि विभाग शिकायतों के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और खराब पड़ी सोलर लाइटों को कब तक दुरुस्त किया जाता है।
3.बिहार विधान सभा में मीडिया का विरोध
प्रेस प्रतिनिधि को प्रवेश से रोकने पर पत्रकारों ने किया कवरेज का बहिष्कार
पटना। बिहार विधान सभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को विधान सभा परिसर में उस समय अलग माहौल देखने को मिला, जब एक मीडिया संस्थान के प्रेस प्रतिनिधि को प्रवेश नहीं मिलने के विरोध में पत्रकारों ने सामूहिक रूप से कवरेज का बहिष्कार कर दिया। विरोधस्वरूप विधान सभा पोर्टिको के बाहर मौजूद मीडिया कर्मियों ने अपने कैमरे नीचे रख दिए और फोटो व वीडियो कवरेज पूरी तरह बंद कर दी। आमतौर पर विधान सभा परिसर में सत्ता और विपक्ष की गतिविधियों को कैमरों में कैद करने की होड़ रहती है, लेकिन बुधवार को पत्रकारों ने विरोध के तौर पर किसी भी राजनीतिक गतिविधि की रिकॉर्डिंग नहीं की। इस दौरान विपक्षी विधायक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे, हाथों में पोस्टर लेकर नारेबाजी भी हुई, लेकिन मीडिया कर्मियों ने उनके प्रदर्शन की भी तस्वीरें और वीडियो नहीं बनाए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक प्रेस प्रतिनिधि को विधान सभा परिसर में प्रवेश से रोके जाने के बाद पत्रकारों में नाराजगी फैल गई। इसके बाद विभिन्न मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर विधान सभा की कार्यवाही और परिसर की गतिविधियों की कवरेज का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। पत्रकारों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और विधानसभा जैसी संवैधानिक संस्था में पत्रकारों को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से अपने दायित्व निभाने का अवसर मिलना चाहिए। उनका मानना है कि प्रेस प्रतिनिधियों के प्रवेश को लेकर उत्पन्न विवाद मीडिया की स्वतंत्रता और अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।
इस घटनाक्रम का असर विधान सभा परिसर की सामान्य गतिविधियों पर भी देखने को मिला। जहां रोजाना राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शनों की तस्वीरें मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचती हैं, वहीं आज पत्रकारों के विरोध के कारण यह सिलसिला थम गया। अब सभी की निगाहें विधान सभा प्रशासन और पत्रकार संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं। देखना होगा कि इस विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है और विधान सभा परिसर में सामान्य मीडिया कवरेज कब तक बहाल हो पाती है।

