अपराध से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिये 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट का किया जायेगा गठन: मुख्यमंत्री ।। 2.केन्द्र सरकार के नीति आयोग की तर्ज पर बिहार में भी बनेगा आयोग : मुख्यमंत्री
न्यूज डेस्क
पटना / मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज ‘नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम) के एकीकृत कार्यान्वयन पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) और बिहार न्यायिक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में बोधगया स्थित महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित इस सम्मेलन में राज्य में नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से और समान रूप से लागू करने तथा न्याय वितरण प्रणाली में आपसी समन्वय मजबूत करने पर गहन चर्चा की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय सम्मेलन को बिहार के लिए ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि देश की लगभग 10 प्रतिशत आबादी और 14 करोड़ से अधिक लोगों को न्याय दिलाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बिहार की न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन पर है। उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान सदैव ‘न्याय के साथ विकास’ की रही है और नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी एवं जनहितकारी क्रियान्वयन इसी भावना को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि अपराध से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिये 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जायेगा। हमलोग सहयोग कार्यक्रम चला रहे हैं, उसमें आवेदनकर्ता द्वारा समस्या को लेकर आवेदन दिया जाता है और उसका 30 दिनों के अंदर निष्पादन किया जाता है। प्रत्येक महीने के पहले मंगलवार और तीसरे मंगलवार को सभी प्रखंडों में यह आयोजित किया जाता है। 30 दिनों में आवेदन का निष्पादन नहीं करने पर संबंधित अधिकारी को 31 वें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से निलंबन का आदेश जाता है। प्रत्येक माह के दूसरे मंगलवार को राज्य स्तर पर पटना में सहयोग शिविर का आयोजन किया जायेगा। इसमें वैसे लोग शामिल होंगे जिनके आवेदन का निष्पादन प्रखण्ड स्तर पर हुआ है लेकिन वे फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी समस्याओं का समाधान होगा और न्याय मिलेगा। न्यायपालिका और कार्यपालिका सहयोगी बनेंगे तो काम अच्छा होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय तभी सार्थक होगा जब आम जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा। इसके लिए न्यायपालिका, पुलिस और कार्यपालिका के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। सरकार और न्यायपालिका के बीच नियमित अंतराल पर समन्वय बैठकें आयोजित हों, ताकि जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम को नागरिक केंद्रित दृष्टिकोण के साथ लागू करना समय की आवश्यकता है। नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए०आई०) के अधिकतम उपयोग की आवश्यकता है। अपराध नियंत्रण, निगरानी और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने में आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार थानों को आधुनिक संसाधनों, सी०सी०टी०वी०, डिजिटल उपकरणों तथा वैज्ञानिक जांच व्यवस्था से सुसज्जित कर रही है। फॉरेंसिक लैब, मोबाइल फोरेंसिक वैन और वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिससे मामलों का शीघ्र निष्पादन संभव हो सके। 112 आपातकालीन सेवा के माध्यम से पुलिस औसतन 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच रही है, इसे घटाकर 7 से 8 मिनट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। महिलाओं एवं छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्कूलों और कॉलेजों के आसपास विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्पीडी ट्रायल, फास्ट ट्रैक कोर्ट तथा समयबद्ध न्याय व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सरकार हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगी। कानून का राज स्थापित करने के लिए किया गया निवेश आने वाले कई दशकों तक राज्य को लाभ पहुंचाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार शिक्षा और ज्ञान की ऐतिहासिक भूमि रही है। इसी माह राज्य में 211 नए डिग्री कॉलेज तथा 534 मॉडल स्कूल स्थापित किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन प्रारंभ हो चुका है तथा विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनर्स्थापन की दिशा में भी सरकार तेजी से कार्य कर रही है। न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों, आधुनिक तकनीक के समुचित
उपयोग तथा नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से बिहार में कानून का राज और अधिक मजबूत होगा तथा राज्य विकास, समृद्धि और सुशासन के नए आयाम स्थापित करेगा।
सम्मेलन को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन० कोटिश्वर सिंह, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची, पटना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय, बिहार न्यायिक अकादमी के चेयरमैन जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद, मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, बिहार के एडवोकेट जनरल श्री सत्यदर्शी संजय, बिपार्ड के महानिदेशक डॉ० बी० राजेन्दर एवं गृह सचिव श्री कुंदन कुमार ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम के दौरान बिपार्ड के महानिदेशक डॉ० बी० राजेन्दर ने मुख्यमंत्री को हरित पौधा, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका स्वागत किया। सम्मेलन में शामिल डेलीगेट्स ने मुख्यमंत्री के साथ सामूहिक तस्वीर खिंचवाई।
सम्मलेन में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, राज्य के विभिन्न जिलों के डिस्ट्रिक्ट जज, मुख्यमंत्री के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह, वरिष्ठ अधिवक्तागण, कानून विशेषज्ञ, मगध प्रमंडल की आयुक्त डॉ० सफीना ए०एन०, गयाजी के जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर, वरीय पुलिस अधीक्षक गयाजी श्री सुशील कुमार सहित भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारीगण, बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (BIPARD) तथा बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़े अधिकारीगण थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिहार के विभिन्न हिस्सों से प्रमंडलीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उपमहानिरीक्षक तथा अन्य वरीय पदाधिकारी जुड़े थे।
2.केन्द्र सरकार के नीति आयोग की तर्ज पर बिहार में भी बनेगा आयोग : मुख्यमंत्री
पटना/जनप्रतिनिधियों की योजनाओं के प्रभावी संचालन एवं पारदर्शिता के लिए विधायकों एवं विधान परिषद् के सदस्यों हेतु एक समर्पित पोर्टल विकसित किया जाए, ताकि योजनाओं की जानकारी, अनुश्रवण एवं प्रगति का ऑनलाइन प्रबंधन किया जा सके।
विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता हो।
योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सतत् निगरानी एवं समन्वित प्रयास सुनिश्चित किया जाय।
राज्य के आकांक्षी जिलों के साथ-साथ अन्य सभी जिलों के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए उनकी स्थानीय आवश्यकताओं, संसाधनों एवं संभावनाओं के अनुरूप व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए।
प्रत्येक जिले की अपनी बजट योजना तैयार की जाए, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं एवं विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
पटना 04 जुलाई 2026 मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में योजना एवं विकास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की तथा विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी एवं भविष्य की कार्ययोजना को लेकर आवश्यक निर्देश दिया।
बैठक में योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ० एन० विजयालक्ष्मी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अपने विभाग की कार्यान्वित योजनायें, पहल, उपलब्धियों एवं भावी कार्य योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। बैठक में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना, संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, पंचायत सरकार भवन का निर्माण तथा कब्रिस्तान घेराबंदी योजना सहित अन्य प्रमुख योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गयी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र एवं दीर्घकालिक विकास के लिये केन्द्र सरकार के नीति आयोग की तर्ज पर बिहार में भी एक आयोग बनेगा। उन्होंने कहा कि यह आयोग राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए विजन तैयार करने, विभिन्न क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी, विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा समय-समय पर नीतिगत सुझाव देने का कार्य करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना एवं विकास विभाग का उद्देश्य केवल योजनाओं का निर्माण नहीं बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन, सतत् मूल्यांकन तथा वास्तविक परिणामों को सुनिश्चित करना होना चाहिये। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की योजनाओं के प्रभावी संचालन एवं पारदर्शिता के लिए विधायकों एवं विधान परिषद के सदस्यों हेतु एक समर्पित पोर्टल विकसित किया जाए ताकि योजनाओं की जानकारी, अनुश्रवण एवं प्रगति का ऑनलाइन प्रबंधन किया जा सके। कब्रिस्तान घेराबंदी योजना के अंतर्गत जो संवेदनशील स्थल हैं, उनकी सूची तैयार कर शीघ्र कार्य पूर्ण कराया जाए तथा इस संबंध में नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र एवं दीर्घकालिक विकास के लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उन्हें बिहार की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया जाए। विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता हो तथा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सतत् निगरानी एवं समन्वित प्रयास सुनिश्चित किया जाय। राज्य के आकांक्षी जिलों के साथ-साथ अन्य सभी जिलों के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए उनकी स्थानीय आवश्यकताओं, संसाधनों एवं संभावनाओं के अनुरूप व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार प्रत्येक प्रखंड के लिए भी दीर्घकालिक एवं परिणामोन्मुखी विकास कार्ययोजना बनाई जाए, ताकि विकास की प्रक्रिया राज्य के अंतिम पायदान तक समान रूप से पहुंचे तथा क्षेत्रीय असंतुलन को दूर किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले की अपनी बजट योजना तैयार की जाए, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं एवं विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि वर्ष 2037 में बिहार अपनी स्थापना के 125 वर्ष पूर्ण करेगा, इस ऐतिहासिक अवसर तक विकसित बिहार की स्पष्ट परिकल्पना एवं दीर्घकालिक विकास दृष्टि तैयार की जानी चाहिए।
बैठक में बिहार मौसम सेवा केंद्र की कार्यप्रणाली एवं सेवाओं के संबंध में भी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम संबंधी महत्वपूर्ण सूचनाएं एवं पूर्वानुमान प्रतिदिन सांसदों, विधायकों, जिला परिषद अध्यक्षों, मुखियाओं, जिला पदाधिकारियों, उप विकास आयुक्तों तथा अन्य संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों तक समयबद्ध ढंग से पहुंचाए जाएं। उन्होंने कहा कि इसके लिए मैसेज एवं व्हाट्सएप सहित उपयुक्त डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए प्रभावी सूचना प्रसारण व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि मौसम संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जा सकें।
बैठक में योजना एवं विकास मंत्री श्री भगवान सिंह कुशवाहा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ० एन० विजयालक्ष्मी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री संजय कुमार सिंह, योजना एवं विकास विभाग के सचिव श्री कंवल तनुज, वित्त (व्यय) विभाग की सचिव श्रीमती रचना पाटिल सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

