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बाढ़ को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर बरसे पप्पू यादव बोले- बिहार की जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया

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न्यूज डेस्क 

पटना /पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के काम करने के तरीके में क्या अंतर है। पप्पू यादव ने कहा कि मनमोहन सिंह ने बिना नफरत और मार्केटिंग के देश के निर्माण में योगदान दिया। उन्होंने 2008 की कोसी त्रासदी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय आठ जिले प्रभावित हुए थे और इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया था। आज बिहार के 22 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 1.46 लाख एकड़ जमीन और 56 लाख लोगों के प्रभावित होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग कोसी, गंडक और गंगा के पानी के बीच बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं।

पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से बाढ़ को लेकर एक ट्वीट तक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि बिहार में चुनाव नहीं होने के कारण केंद्र और राज्य के नेता आम लोगों की मदद के लिए गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रधानमंत्री तक को बाढ़ पीड़ितों की परेशानी की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में लोगों को भोजन और जरूरी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। सांसद ने प्रधानमंत्री के ब्रिक्स कार्यक्रम में व्यस्त होने का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े मीडिया संस्थान भी बाढ़ की समस्या के बजाय प्रधानमंत्री के प्रचार में लगे हुए हैं।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बिहार को बाढ़ मुक्त करने के पुराने बयान का भी जिक्र किया। पप्पू यादव ने सवाल उठाया कि जब बिहार को बाढ़ मुक्त करने का वादा किया गया था, तो इस दिशा में अब तक क्या ठोस काम हुआ। उन्होंने कहा कि 2008 और 2016 से भी बड़ी त्रासदी की स्थिति होने के बावजूद बाढ़ के स्थायी समाधान पर गंभीर चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने नेपाल को मदद भेजे जाने का जिक्र करते हुए सवाल किया कि बिहार के बाढ़ पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार मदद क्यों नहीं भेज सकती। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता भी देश का हिस्सा है और उसके साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।

बाढ़ नियंत्रण पर सरकारी खर्च का हवाला देते हुए पप्पू यादव ने CAG की Performance Audit रिपोर्ट का उल्लेख किया। उनके अनुसार, 2007-12 के दौरान बाढ़ नियंत्रण कार्यों के लिए उपलब्ध राशि में से ₹1,098.18 करोड़ वित्त विभाग को सरेंडर किए जाने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि उपलब्ध धन का पूरा उपयोग नहीं हो सका। उन्होंने 2000-05 के दौरान कोसी क्षेत्र में 231 एंटी-इरोशन कार्यों पर ₹26.38 करोड़ खर्च होने का भी जिक्र किया। इसके बावजूद कोसी और उसकी सहायक नदियों के किनारे कटाव से आज भी परिवार विस्थापन झेल रहे हैं। उन्होंने 2019 में करीब ₹642 करोड़, 2020 में करीब ₹810 करोड़ और 2021 में करीब ₹6,445 करोड़ के बाढ़ नुकसान का आंकड़ा भी सामने रखा।

पप्पू यादव ने बिहार की बाढ़ को ‘मैन मेड डिजास्टर’ बताते हुए फरक्का बराज और नदियों के प्रबंधन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि केवल हर साल राहत सामग्री बांटने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि बाढ़ का स्थायी समाधान तलाशना होगा। उन्होंने कोसी नदी पर हाई डैम बनाने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि इससे नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने, उत्तर बिहार को बाढ़ से राहत देने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा के विकास में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज फरक्का बराज के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद उन्होंने इस दिशा में क्या किया।

सांसद ने बाढ़ राहत कार्यों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ और आपदा के नाम पर भारी राशि खर्च होती है, लेकिन इसके बावजूद लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है। उन्होंने CAG की रिपोर्ट को इस व्यवस्था का आईना बताया। पप्पू यादव ने एक घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एक मंत्री के घर को बचाने के लिए गए, जबकि इसी दौरान सिकंदर मंडल और बादल मंडल की मौत हो गई और उनके परिवारों को पर्याप्त मदद नहीं मिली। उन्होंने कटिहार के अहमदाबाद समेत कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कई जगह सामुदायिक रसोई बंद हो गईं, बड़ी संख्या में चापाकल पानी में डूबे हैं और महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान भी कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है।

उन्होंने प्रभारी मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि कई जनप्रतिनिधि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहे और कुछ नेताओं ने केवल फोटो खिंचवाकर औपचारिकता पूरी की। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता बाढ़, बेरोजगारी और गरीबी जैसी समस्याओं से जूझ रही है, जबकि राजनीतिक दल अन्य मुद्दों में व्यस्त हैं। अंत में उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वालों को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपदा की स्थिति में किसी भी नागरिक को भोजन, पानी, दवा और सुरक्षित स्थान जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े।