बिहार में जातिवाद कानून बदले सोच नहीं बदली मंत्री श्रेयसी सिंह का मामला बना बहस का मुद्दा
रामसुंदर गुप्ता
पटना/ 21वीं सदी में भी बिहार में जातिगत भेदभाव की तस्वीरें सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक, उच्च-नीच की दीवारें आज भी टूटने का नाम नहीं ले रही हैं।
वीडियो और पोस्ट वायरल हुआ। और दावा किया गया कि जमुई विधायक और बिहार सरकार मंत्री श्रेयसी सिंह को एक दलित समाज की लड़की ने मिठाई खिलानी चाही, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या हम आज भी छुआछूत की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं
स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक जाति के नाम पर वोट और राजनीति होती रहेगी, तब तक इस भेदभाव को खत्म करना मुश्किल है। एक नागरिक ने कहा बड़े-बड़े अनुभवी नेता भी भाषण में बराबरी की बात करते हैं, लेकिन हकीकत में जातिगत समीकरण ही चलाते हैं।
शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में आरक्षण और कानून होने के बावजूद, सामाजिक स्तर पर छुआछूत, खान-पान और रिश्तों में भेद आज भी देखने को मिलता है। युवा इसे सबसे ज्यादा महसूस कर रहे हैं।
समाजशास्त्रियों का कहना है कि कानून से ज्यादा जरूरी मानसिकता में बदलाव है। जब तक हम रोजमर्रा की जिंदगी में बराबरी नहीं अपनाएंगे, तब तक जातिवाद खत्म नहीं होगा।

