भाग्य इसी को कहते हैं कोई तैर कर समुंद्र पार किया तो कोई हवाई जहाज से ही लैंड कर गया
न्यूज डेस्क
पटना/राजनीति में परिवारवाद पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन बिहार की राजनीति में यह परंपरा अब सामान्य होती जा रही है। एक तरफ नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार बिना mla,mlc बने शपथ ली हैं तो दूसरे तरफ दीपक प्रकाश ने फिर से मंत्री पद की शपथ ली ।
जबकि वे किसी भी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इससे पहले भी उन्हें मंत्री बनाया गया था और तब भी पार्टी के भीतर असंतोष देखने को मिला था।
जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पार्टी में अनुभवी और जमीनी कार्यकर्ताओं की कमी है या फिर राजनीति अब केवल परिवार और प्रभाव तक सीमित होकर रह गई है। लोकतंत्र में अवसर और प्रतिनिधित्व दोनों महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि कार्यकर्ताओं की मेहनत ही किसी संगठन की असली ताकत होती है।

