पटना स्नातक में नीरज की जीत अनंत पर JDU का एक्शन और संजय झा के बयान के सियासी मायने
न्यूज डेस्क
पटना / बिहार विधान परिषद के बहुचर्चित पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से JDU के कद्दावर नेता नीरज कुमार ने लगातार चौथी बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत के तुरंत बाद JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने उन्हें बधाई देते हुए दो बड़े संदेश दे दिए।
अनंत सिंह को पार्टी से निकालने और उनकी विधायकी रद्द कराने की सिफारिश पर संजय झा ने राज खोला
JDU अनुशासन से चलती है। पार्टी में अनुशासन नहीं होगा तो वही हाल होगा जो राहुल गांधी देश में अराजकता फैला रहे हैं। हमारी पार्टी में सारे फैसले आपसी सहमति से होते हैं और अंतिम मुहर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगाते हैं।
दरअसल पटना स्नातक सीट पर JDU के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार थे, लेकिन मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी ने जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का खुला समर्थन किया। इसी बगावत पर JDU प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने दोनों को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया और विधानसभा अध्यक्ष से 10वीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की गई है।
नीरज कुमार का पलटवार सूद समेत कर्ज लौटाएंग
जीत के बाद नीरज कुमार ने भी तेवर दिखाए। उन्होंने कहा ये नैतिक बल और जन बल की जीत है, धनबल-बाहुबल झुक गया। हमारे पुरखों ने सिखाया है कर्ज नहीं रखना चाहिए, समय आने पर सबको सूद समेत लौटा देंगे।
इस बयान के 3 बड़े सियासी मायने
नीतीश की सुप्रीमेसी बरकरार संजय झा ने साफ कर दिया कि JDU में अंतिम फैसला आज भी नीतीश कुमार का ही होता है। बाहुबली अनंत सिंह से भी बड़े हैं पार्टी के नियम।
अनुशासन बनाम बाहुबलJDU ने संदेश दिया है कि अब पार्टी में बाहुबल की राजनीति नहीं चलेगी। कार्यकर्ता बल ही सबसे बड़ा बल है।
निशांत युग की एंट्री इस जीत को निशांत कुमार (नीतीश के बेटे) के चुनाव प्रबंधन की पहली बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। नीरज ने खुद 3N फॉर्मूला दिया – Nitish, Nishant और Neeraj।
कुल मिलाकर पटना स्नातक की ये जीत सिर्फ एक MLC की जीत नहीं, बल्कि JDU में अनुशासन, नई पीढ़ी की एंट्री और नीतीश कुमार के अभी भी बॉस बने रहने का ऐलान है।

