बिहार विधान परिषद में अनोखा इतिहास दो सगे भाई बन गए MLC एक RJD से तो दूसरा कांग्रेस से
सेंट्रल डेस्क
बिहार की राजनीति में पहली बार ऐसा अनोखा संयोग बनने जा रहा है। बिहार विधान परिषद में अब दो सगे भाई एक साथ बैठकर बिहार के मुद्दों पर आवाज उठाएंगे। लेकिन खास बात ये है कि दोनों भाई अलग-अलग पार्टियों से हैं।
कौन हैं ये दो भाई
बड़े भाई राजीव कुमार बेगूसराय-खगड़िया स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर MLC हैं। 2022 में बीजेपी के रजनीश कुमार को हराकर जीते थे। अभी विधान परिषद में कांग्रेस के इकलौते MLC हैं।
छोटे भाई डॉ. संजीव कुमार अभी-अभी पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से RJD समर्थित उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीते हैं। इन्होंने बीजेपी के दिग्गज नेता, 30 साल से MLC रहे नवल किशोर यादव को 1057 वोटों से हराया है। संजीव को 4487 वोट और नवल किशोर को 3430 वोट मिले।
पिता भी रहे हैं मंत्री
दोनों भाई बिहार के पूर्व मंत्री और विधायक स्व. डॉ. रामानंद सिंह के बेटे हैं। राजनीति इनके खून में है। संजीव कुमार पहले परबत्ता से JDU के विधायक भी रह चुके हैं।
एक ही सदन दो अलग विचारधारा फिर भी खून का रिश्ता
कहते हैं राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता, लेकिन इस परिवार ने साबित कर दिया है कि विचारधारा अलग हो सकती है, पार्टी अलग हो सकती है, लेकिन खून का रिश्ता सबसे बड़ा होता है।
अब सवाल ये है कि जब सदन में महागठबंधन के मुद्दों पर चर्चा होगी तो एक भाई RJD की लाइन लेगा और दूसरा कांग्रेस की। लेकिन जब परिवार की बात आएगी तो दोनों एक साथ खड़े दिखेंगे।
तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव के बाद विधानसभा में दो भाइयों का संयोग खत्म हो गया था।अब विधान परिषद में फिर से दो सगे भाइयों की जोड़ी देखने को मिलेगी।
यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि बिहार के लोकतंत्र की खूबसूरती है जहाँ एक ही परिवार से दो अलग-अलग विचारधाराओं के लोग जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा कर रहे हैं।

