निबंधन विभाग ने रचा नया कीर्तिमान, लक्ष्य के विरुद्ध 101 प्रतिशत राजस्व संग्रह ।। 2.मुख्यमंत्री ग्रामीण संपर्क योजना से छूटे हुए गांवों तक पहुंची पक्की सड़क।। 3.बिहार में स्थानीय व्यवसायियों के लिए बड़ा मौका।। 4. अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब का कमाल : गंदे पानी से दूर हुई बीमारियां, ग्रे वाटर बना उपयोग लायक
राजकुमार यादव
पटना/मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने दस्तावेज निबंधन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने 8 हजार 403 करोड़ 46 लाख रुपये का राजस्व संग्रहित किया है, जो निर्धारित लक्ष्य 8 हजार 250 करोड़ रुपये के विरुद्ध 101.86 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी राजस्व संग्रह लक्ष्य निर्धारित किया है। विभागीय मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सोमवार को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के ‘संवाद’ सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी।
मार्च में दस्तावेज निबंधन का बना रिकॉर्ड, एक दिन में 15 हजार दस्तावेज निबंधित
मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिन यानी 31 मार्च को एक दिन में कुल 14 हजार 905 दस्तावेजों का निबंधन किया गया, जिससे 107 करोड़ 74 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके साथ ही 25 मार्च को 80 करोड़ 38 लाख रुपये, 28 मार्च को 85 करोड़ 6 लाख रुपये, 29 मार्च को 83 करोड़ 91 लाख रुपये तथा 30 मार्च को 94 करोड़ 20 लाख रुपये का राजस्व संग्रहित कर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 1995 से 2026 तक के कुल 2 करोड़ 34 लाख दस्तावेज अब तक डिजिटल किए जा चुके हैं। वहीं 1908 से 1994 तक के लगभग 5 करोड़ दस्तावेजों को चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक डिजिटलीकरण पूरा करने का लक्ष्य है। साथ ही विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत पिछले वित्तीय वर्ष में 10 हजार 259 विवाहों का निबंधन किया गया और 2 हजार 648 जोड़ों का विवाह सम्पन्न कराया गया। इसके अलावा 289 संस्थाओं और 306 फर्मों का निबंधन भी किया गया।
जमीन संबंधी काम के लिए नया ऐप
मंत्री ने बताया कि अब तक 7 लाख 86 हजार 37 दस्तावेज महिलाओं के नाम पर निबंधित हुए हैं, जिसमें कुल 60 लाख 89 हजार 589 एकड़ भूमि का अंतरण शामिल है। जमीन संबंधी काम में मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए विभाग एक मोबाइल एप्लिकेशन विकसित कर रहा है। इसके माध्यम से पारदर्शी तरीके से लोंगिट्यूड (देशांतर)और लैटिट्यूड कैप्चर करके ई-फाइलिंग की जाएगी। साथ ही भूमि की श्रेणी के सत्यापन के लिए जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
शराबबंदी के 10 साल में 11 लाख से अधिक मामले दर्ज
विभाग के सचिव अजय यादव ने शराबबंदी पर की जा रही कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2016 से मार्च 2026 तक शराबबंदी से संबंधित कुल 11 लाख 37 हजार 731 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें विभाग द्वारा 5 लाख 60 हजार 639 और पुलिस द्वारा 5 लाख 77 हजार 92 मामले दर्ज किए गए। इस दौरान कुल 17 लाख 18 हजार 58 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई में 2 करोड़ 42 लाख 73 हजार 895 बल्क लीटर देशी शराब और 2 करोड़ 40 लाख 46 हजार 354 बल्क लीटर विदेशी शराब बरामद की गई।
चेक पोस्टों पर 13 हजार से अधिक वाहन जब्त
सचिव ने कहा कि ड्रोन के माध्यम से 1 जनवरी 2022 से मार्च 2026 तक कुल 1 लाख 64 हजार 474 छापेमारियां की गईं हैं। इनमें 8 हजार 834 मामले दर्ज हुए और 5 हजार 90 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 51 लाख 74 हजार 548 लीटर शराब और 366 वाहन पकड़े गए और 3,926.88 लाख किलोग्राम जावा नष्ट किया गया। उन्होंने आगे बताया कि जलमार्ग और दियारा क्षेत्रों में फरवरी 2022 से मार्च 2026 तक कुल 80 हजार 353 छापेमारियां की गईं, जिसमें 2 हजार 524 मामले दर्ज हुए, 1 हजार 364 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया और 16 लाख 43 हजार 314 लीटर शराब जब्त की गई। साथ ही 1,256.15 लाख किलोग्राम महुआ को नष्ट किया गया। 1 जनवरी 2023 से मार्च 2026 तक 84 चेक पोस्टों (67 अंतर्राज्यीय) पर कुल 1 लाख 78 हजार 68 मामले दर्ज हुए और 2 लाख 92 हजार 39 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
बरामदगी का 98 फीसदी शराब हो चुकी जब्त
श्री यादव ने जानकारी दी कि मार्च 2026 तक कुल जब्त शराब का लगभग 98 प्रतिशत नष्ट किया जा चुका है। 1 अप्रैल 2016 से मार्च 2026 तक कुल 1 लाख 67 हजार 447 वाहनों को जब्त किया गया, जिनमें से 80 हजार 207 वाहनों की नीलामी हो चुकी है और 25 हजार 232 वाहनों को पेनाल्टी लेकर मुक्त किया गया है।
2.मुख्यमंत्री ग्रामीण संपर्क योजना से छूटे हुए गांवों तक पहुंची पक्की सड़क
पटना/राज्य के प्रत्येक गांव और बसावतों तक बारहमासी पक्की सड़क संपर्कता सुनिश्चित करने के लक्ष्य के साथ ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा मुख्यमंत्री ग्रामीण संपर्क योजना (अवशेष) के अंतर्गत व्यापक स्तर पर कार्य किये जा रहे हैं। पूर्व में भौगोलिक, तकनीकी अथवा अन्य कारणों से जो गांव सड़क संपर्कता से वंचित रह गए थे, उन्हें अब इस योजना के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर मुख्य मार्गों से जोड़ा जा रहा है। यह पहल ग्रामीण संपर्कता के विस्तार के साथ-साथ समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उल्लेखनीय है कि इस योजना के अंतर्गत राज्य में कुल 8,034 किमी ग्रामीण सड़कों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। वहीं, अबतक कुल 2,485 किमी पक्की सड़कों का सुदृढ़ नेटवर्क तैयार किया जा चुका है। इन ग्रामीण सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की दशकों पुरानी समस्या का समाधान हुआ है। अब ऐसे गांव जहां पहले वाहनों की पहुंच सीमित थी, वहां एम्बुलेंस, स्कूल वाहन और परिवहन सेवाएं सीधे उपलब्ध हो रही हैं। इससे न केवल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर हुई है, बल्कि किसानों और स्थानीय उत्पादकों को अपनी उपज बाजारों तक समय पर पहुंचाने में भी सुविधा हो रही है।
वैशाली में मजबूत हुआ ग्रामीण सड़कों और पुलों का नेटवर्क
बिहार के गौरवशाली ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत वाले वैशाली जिले में ग्रामीण संपर्कता को सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग पूरी तरह से तत्पर है। भगवान महावीर की जन्मस्थली और भगवान बुद्ध से जुड़ी महत्वपूर्ण स्थली होने के कारण वैशाली राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान रखता है। इस परिप्रेक्ष्य में सुगम एवं सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जिले में ग्रामीण सड़कों एवं पुलों का गुणवत्तापूर्ण निर्माण किया गया है। इस दिशा में वैशाली जिले में नाबार्ड योजना के तहत 99 किमी ग्रामीण सड़कों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी। वहीं अबतक कुल 95 किमी सड़कों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत कुल 30 पुलों में 19 पुलों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जिससे आवागमन में आने वाली बाधाएं काफी हद तक समाप्त हो गई हैं।
3.बिहार में स्थानीय व्यवसायियों के लिए बड़ा मौका
पटना/कला एवं संस्कृति विभाग और बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड ने बिहार में फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने और स्थानीय व्यवसायियों के लिए एक खास ऑनलाइन पोर्टल लांच किया है। इस खास पहल से राज्य के कलाकारों, तकनीशियनों और विभिन्न सेवा प्रदाताओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुल गए हैं।
इस पोर्टल के माध्यम से स्थानीय कलाकार (एक्टर, डांसर, सिंगर आदि) के साथ-साथ फिल्म निर्माण से जुड़े तकनीकी और व्यावसायिक लोग भी अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इसमें कैमरा, लाइट, साउंड, ड्रोन, एडिटिंग, वीएफएक्स जैसी तकनीकी सेवाएं, आर्ट डायरेक्शन, सेट डिजाइन, कॉस्ट्यूम और मेकअप जैसी क्रिएटिव सेवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा होटल, ट्रांसपोर्ट, शूटिंग लोकेशन, कैटरिंग जैसी लॉजिस्टिक सेवाएं देने वाले व्यवसायी भी इस प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं। मीडिया और प्रमोशन से जुड़े लोग जैसे डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया, फोटोग्राफी के पेशेवरों के साथ-साथ सिक्योरिटी, इवेंट मैनेजमेंट और लोकल कोऑर्डिनेशन से जुड़े लोग भी इसमें आवेदन कर सकते हैं।
इस पोर्टल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बिहार में होने वाली फिल्मों की शूटिंग के दौरान स्थानीय लोगों को सीधे फिल्म प्रोडक्शन हाउस के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि स्थानीय व्यवसायों को भी नए क्लाइंट मिलेंगे और आय के स्रोत बढ़ेंगे।
मुफ्त पंजीकरण की सुविधा
इच्छुक लोग film.bihar.gov.in वेबसाइट पर जाकर आसानी से अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क है।
4. अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब का कमाल : गंदे पानी से दूर हुई बीमारियां, ग्रे वाटर बना उपयोग लायक
पटना/जलाशयों के प्रदूषित जल को उपयोग में लाने के लिए मुंगेर के ग्राम पंचायत बांक में नया प्रयोग हुआ है। ग्राम पंचायत में काफी पुराना और प्रदूषित जल से भरे तालाब में अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब (डब्ल्यूएसपी) के सहारे ग्रे वाटर को स्वच्छ और उपयोगी जल बनाने में बड़ी सफलता मिली है। तालाब के पानी के शुद्ध होने से पर्यावरण सुरक्षा के साथ हजारों ग्रामीणों की जल आवश्यकता की पूर्ति और ग्राउंड वाटर रिचार्ज की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुंगेर के बांक पंचायत का सिद्धि तालाब कुछ दशक पहले तक जिले की शान हुआ करता था। बाद में इस तालाब की अनदेखी और इसमें चारों तरफ से आने वाले धूसर जल (ग्रे वाटर) ने इसकी शान को पूरी तरह नष्ट कर दिया। गांव के 5000 परिवारों द्वारा उपयोग किया हुआ धूसर जल नालों के माध्यम से तालाब में पहुंचता थाI वहीं नगर निगम क्षेत्र से भी नालों का पानी इस तालाब में आता था। बरसात के दिनों में चारों ओर से गंदा पानी इसी तालाब में आता था। इस तरह विभिन्न स्रोतों से आने वाले धूसर एवं प्रदूषित जल तालाब के पानी को प्रदूषित कर रहा था। इन सब कारणों से धीरे-धीरे तालाब का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो गया। स्थिति यहां तक हो गई कि इसका पानी खतरनाक स्तर तक प्रदूषित होता चला गया और इंसान के साथ-साथ अन्य जीवों के उपयोग के लायक नहीं बचा।
पर्यावरणविदों के अनुसार तालाब का प्रदूषित जल भू-गर्भ जल को भी प्रभावित करने लगा था। स्थिति की भयावहता को देखते हुए जिला जल एवं स्वच्छता समिति ने तालाब के पानी को स्वच्छ बनाने के लिए अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब (डब्ल्यूएसपी) निर्माण का फैसला लिया। इस पहल के तहत अब सिद्धि तालाब में आने वाले गंदे एवं धूसर जल को पहले डब्ल्यूएसपी में जमा किया जाता है। यहां पानी कई दिनों तक उपचारित होता है। फिर उपचारित किया हुआ साफ पानी दूसरी तरफ से सिद्धि तालाब में जमा होता है। मौजूदा समय में तालाब के पानी के साफ हो जाने से ग्राम पंचायत में करीब पांच हजार से अधिक की आबादी को रोजमर्रे की जरूरतें पूरी हो रही हैं। साथ ही ग्राउंड वाटर रिचार्ज करने की भी नई राह बनी है। आज यह तालाब मत्स्य पालन के लिए पूरी तरह से उपयोगी बन चुका है।

