शिक्षा मंत्री के बड़े-बड़े दावे धरातल पर सब शून्य लदनियां प्रखंड के क्षेत्रों में शिक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
मधुबनी/ लदनिया से बिहार हलचल न्यूज़ की पड़ताल
बिहार के शिक्षा मंत्री आए दिन मंच से घोषणा करते हैं कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था बदल गई है। लेकिन मधुबनी जिला के लदनिया प्रखंड में आकर देखिए, यहां सरकारी घोषणाएं दम तोड़ती नजर आती हैं।
ऑनलाइन हाजिरी बनाकर शिक्षक गायब
यहां का सच बेहद शर्मनाक है। शिक्षक स्कूल आते हैं, ऑनलाइन हाजिरी बनाते हैं और फिर स्कूल से गायब हो जाते हैं। दिनभर इधर-उधर घूमने के बाद छुट्टी के समय वापस आकर हाजिरी पूरी कर लेते हैं। सवाल यह है कि जब गुरु ही गायब है, तो शिष्य क्या सीखेगा।
छात्र कम, हाजिरी ज्यादा का खेल
विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति नगण्य है, लेकिन कागजों पर हाजिरी पूरी दिखा दी जाती है। MDM से लेकर हर योजना में सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। असली नुकसान तो उन गरीब बच्चों का हो रहा है, जो भविष्य के सपने लेकर स्कूल आते हैं।
गांव के और बगल के शिक्षक से गांव त्रस्त
सबसे बड़ी परेशानी स्थानीय और बगल के गांवों के शिक्षकों से है। ये शिक्षक अपने आप को पदाधिकारी से भी ऊपर समझते हैं। अभिभावक शिकायत करें तो किससे BEO से लेकर DEO तक सब मस्त हैं। अभिभावक परेशान हैं, प्रशासन मौन है।
झूठी बयानबाजी कब तक
आखिर कब तक चलेगा ये झूठी बयानबाजी का खेल। शिक्षा विभाग हर दूसरे दिन निरीक्षण का आदेश निकालता है, लेकिन लदनिया के इन स्कूलों में निरीक्षण की टीम कभी पहुंचती ही नहीं। अगर पहुंचती भी है, तो सब पहले से मैनेज रहता है।
सवाल तो बनता है
– क्या शिक्षा विभाग सिर्फ कागजों पर चल रहा है।
– गांव के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।
– कब तक अभिभावकों की आवाज को दबाया जाएगा।
अगर जल्द ही लदनियां प्रखंड के विद्यालयों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यहां की एक पूरी पीढ़ी अशिक्षा के अंधेरे में चली जाएगी। सरकार को घोषणाओं से बाहर निकलकर धरातल पर काम करना होगा।

