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डीएम की पहल से दुर्गा पूजा में सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था 177 आपदा मित्रों सहित पर्याप्त दंडाधिकारी एवं पुलिस बल तैनात

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रिपोर्ट:कृष्णा कुमार

मधुबनी /दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ का प्रभावी प्रबंधन तथा विधि-व्यवस्था संधारण सुनिश्चित करने के निमित्त जिला पदाधिकारी, मधुबनी ने व्यापक एवं समन्वित तैयारी की है। सप्तमी से माता का पट खुलने के साथ ही पूजा-पंडालों एवं देवी दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में संभावित वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। एक ओर चेतना रथ के माध्यम से आपदा प्रबंधन विभाग की मार्गदर्शिका के अनुरूप आम नागरिकों को आवश्यक सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर 177 आपदा मित्रों सहित पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी एवं पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई है। जिला पदाधिकारी ने सभी प्रतिनियुक्त अधिकारियों एवं कर्मियों को पूरी तत्परता, सजगता और सक्रियता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए दुर्गा पूजा का शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आयोजन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य है कि श्रद्धालु पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर सकें तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना, भगदड़, अग्निकांड अथवा अन्य आपातकालीन स्थिति की आशंका को न्यूनतम किया जा सके। इसी उद्देश्य से सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ जन-जागरूकता अभियान को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

10 चेतना रथ से सुरक्षा उपायों का हो रहा व्यापक प्रचार-प्रसार

दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ प्रबंधन एवं आपदा से बचाव के उपायों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए 10 की संख्या मे एलईडी युक्त ऑडियो-वीडियो चेतना रथ संचालित किए गये हैं। इस संबंध मे जानकारी देते हुए एडीएमओ श्री रजनीश कुमार ने बताया कि निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 17 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक ये वाहन महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों, चौक-चौराहों, बाजारों, हाटों तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भ्रमण कर आपदा प्रबंधन से संबंधित आवश्यक संदेशों का प्रसार कर रहे हैं। इसके माध्यम से लोगों को भीड़ में सुरक्षित रहने, भगदड़ से बचाव, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित निकास तथा प्रतिमा विसर्जन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी जा रही है। जागरूकता के उद्देश्य से पंपलेट का वितरण भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी एलईडी चेतना रथों पर दो-दो आपदा मित्रों की तैनाती की गई है। आपदा मित्र आम नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले सुरक्षित व्यवहार, प्राथमिक सहायता तथा सुरक्षित निकास मार्गों के संबंध में आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। इसका उद्देश्य संभावित जोखिमों के प्रति लोगों को पहले से जागरूक करना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

संवेदनशील स्थलों पर विशेष सतर्कता, आपदा मित्रों की अहम भूमिका

जिला पदाधिकारी के निर्देशानुसार आपदा मित्रों को पूजा-पंडालों, प्रवेश एवं निकास द्वारों, प्रतिमा विसर्जन स्थलों तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। वे स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल एवं पूजा आयोजन समितियों के साथ समन्वय स्थापित कर भीड़ प्रबंधन में सहयोग करेंगे। किसी भी अप्रिय स्थिति की सूचना मिलने पर तत्काल आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने तथा लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
जिला प्रशासन द्वारा विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है कि पूजा-पंडालों में प्रवेश एवं निकास की व्यवस्था सुचारु रहे, श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित ढंग से हो तथा किसी भी परिस्थिति में अनावश्यक भीड़ एकत्रित न होने पाए। अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास और भीड़ नियंत्रण से संबंधित निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पदाधिकारियों को सजग रहने का निर्देश दिया गया है।

प्रतिमा विसर्जन के दौरान सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

प्रतिमा विसर्जन के दौरान नदी, तालाब एवं अन्य जलाशयों में डूबने की घटनाओं की रोकथाम के लिए भी आम लोगों को जागरूक किया जा रहा है। श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे निर्धारित विसर्जन स्थलों एवं मार्गों का ही उपयोग करें और गहरे पानी में जाने से बचें। बच्चों को जलस्रोतों के निकट अकेला नहीं छोड़ें तथा प्रशासन द्वारा की गई बैरिकेडिंग, नावों और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं से संबंधित निर्देशों की अनदेखी न करें। विसर्जन के दौरान संयम एवं सतर्कता बरतना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

डीएम की आमजनों से अपील सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और प्रशासन का सहयोग करें

जिला पदाधिकारी ने जिलेवासियों एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दुर्गा पूजा का पर्व श्रद्धा, उल्लास, शांति एवं सौहार्द के वातावरण में मनाएं तथा अपनी और दूसरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। पूजा-पंडालों में प्रवेश एवं निकास के लिए निर्धारित मार्गों का उपयोग करें, धक्का-मुक्की से बचें और भीड़ में धैर्य बनाए रखें। किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें तथा बिना पुष्टि के किसी सूचना को प्रसारित न करें।
उन्होंने अभिभावकों से विशेष रूप से आग्रह किया है कि वे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अपने बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें और उन्हें अकेला न छोड़ें। किसी संदिग्ध वस्तु, असामान्य गतिविधि या आपात स्थिति की जानकारी मिलने पर तत्काल निकटतम पुलिसकर्मी, प्रशासनिक पदाधिकारी अथवा आपदा मित्र को सूचित करें। अग्नि सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और प्रशासन की ओर से की गई सुरक्षा व्यवस्थाओं में सहयोग दें।
जिला पदाधिकारी ने सभी प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को निर्धारित समय पर अपने-अपने ड्यूटी स्थल पर उपस्थित रहने तथा सौंपे गए दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि दुर्गा पूजा के दौरान विधि-व्यवस्था संधारण, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी संबंधित पदाधिकारियों को अलर्ट एवं एक्टिव मोड में रहते हुए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने को कहा गया है।