लदनिया बाजार में प्रशासन मौन भू-माफिया बेलगाम 10 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा किसकी शह पर हो रहा खेल
सेंट्रल डेस्क
मधुबनी / भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित लदनिया प्रखंड का लदनिया बाजार आज अतिक्रमण का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। प्रखंड मुख्यालय के लदनिया बाजार में सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा मकान बनाकर रहने और लगातार कब्जा करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे काले धंधे को स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बनकर देख रहा है।
जानकारी के मुताबिक, लदनिया बाजार में लगभग 10 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हो चुका है। जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा नोटिस जारी किए जाने और अंचल अधिकारी को निर्देश दिए जाने के बावजूद आज तक जमीन को मुक्त कराने की कोई पहल नहीं की गई। यह एक गंभीर मामला है और अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। जबकि इससे पूर्व में लोक शिकायत में मामला अपील किया गया था एक व्यक्ति द्वारा लेकिन मामला को मैनेजिंग किया गया था। अब इतना होने के बाद भी स्थानीय प्रशासन मौन क्यों।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब किसी गरीब की जमीन का मामला होता है, तो प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंच जाता है और खाली करवाने की कार्रवाई करता है। लेकिन जब प्रखंड मुख्यालय के बाजार में खुलेआम सरकारी जमीन पर मकान बन रहे हैं, तो प्रशासन आंखें मूंदे हुए है। इससे एक बड़ा सवाल खड़ा होता है क्या प्रशासन की मिलीभगत है।
अगर प्रशासन मिला हुआ नहीं है, तो आखिर जिला पदाधिकारी के नोटिस के बाद भी इस तरफ ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है? क्यों खाली करवाने की पहल नहीं हो रही है? यह साफ जाहिर करता है कि कहीं न कहीं प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान है।
बिहार हलचल न्यूज का सवाल
लदनिया जैसे सीमावर्ती इलाके में सरकारी जमीन पर इस तरह का कब्जा सिर्फ अतिक्रमण नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला भी है। जब प्रखंड मुख्यालय के सामने ही कानून की धज्जियां उड़ रही हैं, तो दूर-दराज के इलाकों का क्या हाल होगा । जिला प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल इस मामले को संज्ञान में लेकर अतिक्रमण मुक्त अभियान चलाए और दोषी अधिकारियों व भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई करे, नहीं तो लोगों का प्रशासन से भरोसा उठ जाएगा।

