अनुशासन और निरंतरता ही एक साफ छात्र जीवन की नींव हैं।।2.नालंदा डेयरी में बनेगा 20 एमटी प्रतिदिन क्षमता वाला दही-लस्सी प्लांट का शिलान्यास।।आईपीआरडी की सहायक प्रशाखा पदाधिकारी स्मिता कुमारी ने पॉवरलिफिटिंग चैंपियनशिप में जीते दो स्वर्ण और एक रजत पदक ।।4.हर खेत तक सिंचाई का पानी योजना के तहत पूर्ण हुई 1358 योजनाएं
न्यूज़ डेस्क
पटना /राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनीसाबाद, पटना-2 में स्नातक प्रथम वर्ष (बीए सेमेस्टर-1, सत्र 2026-2030) के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के शैक्षणिक सफर की शुरुआत के उपलक्ष्य में एक भव्य शिक्षक-छात्र सम्मेलन आयोजित की गयी। जिसकी अध्यक्षता उप-प्राचार्या प्रो. संगीता कुमारी ने तथा संचालन प्रो. प्रसिद्ध कुमार ने की।
सम्मेलन के दौरान प्राध्यापकों ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने की सलाह दी। प्राचार्य डॉ सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि अनुशासन और निरंतरता ही एक सफल छात्र जीवन की नींव है।
कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने भी अपने विचार खुलकर रखे और कॉलेज में मिले इस आत्मीय स्वागत के प्रति आभार जताया। छात्रों ने प्राध्यापकों की प्रेरणादायी बातों से सीख लेते हुए नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित रहने और कॉलेज के नियमों का पालन करने का पूर्ण कमिटमेंट (प्रतिबद्धता) व्यक्त किया।इनमें मुख्य रूप से डॉ. पारस नाथ, प्रो. कुमारी सुंदरम, प्रो. गुरिया, डॉ. प्रो. सुजाता कुमारी, प्रो. नूतन दास, प्रो. आरती कुमारी, प्रो. निधि, प्रो. दीक्षा श्री, प्रो. कुमारी एकता, प्रो. कुमारी तेजस्विनी, प्रो. अमित, प्रो. रमेश, प्रो. शैलेंद्र रंजन, डॉ भगवान सिंह, प्रो वीरेन्द्र कु सिंह प्रो अभय कु,प्रो. मनीष कुमार तथा प्रो. रोहित शामिल थे।
2.नालंदा डेयरी में बनेगा 20 एमटी प्रतिदिन क्षमता वाला दही-लस्सी प्लांट का शिलान्यास
पटना / बिहार में डेयरी क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को बिहारशरीफ स्थित नालंदा डेयरी के 20 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले अत्याधुनिक दही-लस्सी प्लांट का शिलान्यास किया है। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट के शुरू होने के बाद नालंदा डेयरी में प्रतिदिन 20 मीट्रिक टन अतिरिक्त दही का उत्पादन संभव हो सकेगा। माननीय मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नालंदा डेयरी के बिहारशरीफ डेयरी प्रोजेक्ट का निरीक्षण कर इसके विकास के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।
इस नए प्लांट की स्थापना से नालंदा डेयरी में बड़े स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले पैकेज्ड दही और लस्सी का उत्पादन किया जाएगा। वर्तमान में यहां दही और लस्सी के उत्पादन के लिए अलग समर्पित प्लांट नहीं है, जिसके कारण शादी-विवाह और होली, छठ तथा दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए दूसरे जिलों की डेयरियों पर निर्भर रहना पड़ता है। नए प्लांट के चालू होने से यह निर्भरता समाप्त होगी, स्थानीय स्तर पर दूध का मूल्यवर्धन होगा और दुग्ध उत्पादकों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
डेयरी विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना बिहार सरकार और कॉम्फेड की उस नीति को मजबूती देगी, जिसके तहत दूध का केवल विपणन ही नहीं, बल्कि उसका मूल्यवर्धन कर किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय उत्पादन बढ़ने से परिवहन लागत कम होगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और उपभोक्ताओं को अधिक ताजा एवं गुणवत्तापूर्ण सुधा उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे।
*हरी झंडी दिखाकर वाहनों को किया गया रवाना*
इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 8 पशु उठाव एवं परिवहन वाहनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वाहन राज्य के आठ विभागीय प्रमंडलों में तैनात रहेंगे और 24 घंटे पशु सेवा उपलब्ध कराएंगे। प्रत्येक वाहन में चालक, पशु चिकित्सक और पशु के लिए अलग-अलग केबिन, ऑटोमैटिक हाइड्रोलिक सिस्टम तथा 1500 किलोग्राम तक के भारी-भरकम पशुओं को सुरक्षित ढंग से ले जाने की सुविधा उपलब्ध है। प्रति वाहन की लागत लगभग 38 लाख रुपये है। पशुपालक पशुपालन विभाग के टोल-फ्री नंबर 1962 पर संपर्क कर इस सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
नालंदा डेयरी : आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण की एक प्रमुख इकाई
बिहारशरीफ स्थित नालंदा डेयरी बिहार राज्य दुग्ध सहकारी महासंघ लिमिटेड (कॉम्फेड) की एक अत्याधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण इकाई है, जो ‘सुधा’ ब्रांड के तहत गुणवत्तापूर्ण दूध एवं दुग्ध उत्पादों का उत्पादन और विपणन करती है। कॉमफेड को भारत का प्रथम सीएएस प्रमाणित संगठन होने का गौरव प्राप्त है।
लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में स्थापित इस डेयरी का शुभारंभ 16 जनवरी 2014 को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के तकनीकी सहयोग एवं परामर्श से किया गया था। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी शुरुआत की थी। पटना से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित इस परियोजना की स्वीकृत लागत लगभग 120 करोड़ 93 लाख रुपये थी।
नालंदा डेयरी में 4 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला पूर्णतः स्वचालित तरल दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित है। यहां छह मिल्क साइलो और 20 हजार लीटर प्रति घंटा क्षमता वाले दो पाश्चुरीकरण संयंत्र कार्यरत हैं। इसके अलावा 30 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले दुग्ध पाउडर संयंत्र में स्किम्ड मिल्क पाउडर, होल मिल्क पाउडर और डेयरी व्हाइटनर का उत्पादन किया जाता है।
डेयरी में अत्याधुनिक यूएचटी एवं टेट्रा पैक तकनीक के माध्यम से दूध उत्पादों की पैकेजिंग की जाती है, जिससे उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यहां बटर, घी और आइसक्रीम उत्पादन के लिए भी आधुनिक संयंत्र स्थापित हैं, जिनकी उत्पादन क्षमता क्रमशः 20 मीट्रिक टन प्रतिदिन, 5 किलोलीटर प्रति घंटा और 20 हजार लीटर प्रतिदिन है।
नालंदा, शेखपुरा और नवादा जिलों में फैले दुग्ध संग्रहण नेटवर्क के माध्यम से डेयरी प्रतिदिन औसतन 88 हजार लीटर से अधिक दूध संग्रहित करती है। डेयरी के ताजा दूध एवं दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति स्थानीय क्षेत्रों में, जबकि यूएचटी उत्पादों का विपणन बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में किया जाता है। उपस्थित लोगों में उपमुख्यमंत्री विजेन्द्र प्र यादव, उप मुख्यमंत्री विजय कु चौधरी, अध्यक्ष शीर्षत कपिल इत्यादि भारी संख्या में लोग शामिल थे।
3.आईपीआरडी की सहायक प्रशाखा पदाधिकारी स्मिता कुमारी ने पॉवरलिफिटिंग चैंपियनशिप में जीते दो स्वर्ण और एक रजत पदक
पटना/महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित राष्ट्रीय मास्टर क्लासिक पॉवरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2026 में बिहार की बेटी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्य का नाम रौशन किया है। सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग की सहायक प्रशाखा पदाधिकारी श्रीमती स्मिता कुमारी ने 76 किग्रा भार वर्ग (क्लासिक श्रेणी) में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण और एक रजत पदक अपने नाम किए हैं। उन्होंने स्कवैट्स और बेंच प्रेस श्रेणी में स्वर्ण पदक प्राप्त किया तथा डेडलिफ्ट श्रेणी में रजत पदक जीता है। साथ ही, वे प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में “स्ट्रॉन्ग वूमेन ऑफ द टूर्नामेंट” श्रेणी में द्वितीय उपविजेता भी घोषित की गयी।
राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में जीतने पर सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के सचिव श्री नवीन कुमार तथा निदेशक श्री अनिल कुमार ने श्रीमती स्मिता कुमारी को हार्दिक बधाई देते हुए सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्रीमती स्मिता कुमारी ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत, परिवार, कोच, विभाग एवं बिहारवासियों के स्नेह को दिया है।
4.हर खेत तक सिंचाई का पानी योजना के तहत पूर्ण हुई 1358 योजनाएं
पटना/राज्य सरकार के स्तर से शुरू की गई ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ योजना के निर्धारित लक्ष्य को जल संसाधन विभाग ने हासिल कर लिया है। इस योजना के तहत चयनित 1378 योजनाओं में करीब 1358 योजनाएं पूर्ण कर ली गई है। इससे 6.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का पानी उपलब्ध होने का अनुमान है।
विदित हो कि राज्य सरकार ने किसानों के आय में बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से सात निश्चय-2 के तहत कृषि से संबंधित कई योजनाएं शुरू किया है। ताकि किसानों को कम खर्च में अधिक लाभ हो सके। वहीं खेती के दौरान समय पर किसानों को पर्याप्त मात्रा में सिंचाई का पानी मिल सकें इसके लिए राज्य सरकार द्वारा ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ योजना शुरू किया गया है। इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए जल संसाधन विभाग के नेतृत्व में पांच विभागों की एक टीम गठित की गई थी, जिसमें जल संसाधन विभाग के अलावा लघु जल संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, कृषि विभाग और ऊर्जा विभाग को शामिल किया गया था। इन पांचों विभागों को मिलाकर प्रखंड स्तर पर कुल 534 संयुक्त टीमें गठित की गई थी।
विभाग के अनुसार ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ योजना के तहत तीन फेज में कुल 1378 योजनाओं का चयन किया गया था, जिससे कि 6,65,866 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जा सकें। राज्य सरकार के आदेश पर जल संसाधन विभाग सहित टीम में शामिल विभागों ने निर्धारित लक्ष्य में 1358 योजनाएं पूर्ण कर लिया है। इन योजनाओं से राज्य के 6,45,973 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का पानी उपलब्ध होने का अनुमान है।
तकनीकी सर्वेक्षण दल ने 8 प्रकार की योजनाओं का किया था चयन
किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ योजना के तहत तकनीकी सर्वेक्षण दल के स्तर से 8 (आठ) योजनाओं का चयन किया गया था। इन योजनाओं में आहर-पईन सिंचाई योजना, उद्वह सिंचाई योजना, चेक डैम निर्माण योजना, एंटी फ्लड स्लुईस चैनल से सिंचाई योजना, नहरों का पुनर्स्थापन नहरों का संभावित विस्तारीकरण, फील्ड चैनल का पुनर्स्थापन निर्माण, नलकूप सिंचाई योजना शामिल हैं।

