पूर्व मुखिया रमेशचंद्र राय की निधन से सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में गहरा शोक की लहर दौड़ गयी।। 2.कौशल विकास योजना के तहत 9 वर्षों में 45 हजार से अधिक महिलाओं को मिला प्रशिक्षण।।3.जीविका दीदियों के हाथों से तैयार चायपत्ती बनी किशनगंज की पहचान
राजकुमार यादव की रिपोर्ट
पटना/बिहटा प्रखंड के सिकंदरपुर पंचायत के पूर्व मुखिया रमेश चंद्र राय की देर रात निधन हो गया। वे करीब 98 वर्ष के वर्ष के थे। निधन से सामाजिक, राजनीतिक जगत में गहरा शोक की लहर दौड़ गया। वे अपने पीछे तीन पुत्र अशोक कुमार सिंह टी टी आई दिलीप कुमार एवं प्रदीप कुमार टी टी आई दानापुर एक पुत्री सहित नाती पोता – पोती भरा परिवार छोड़ गये हैं। जैसे ही उनकी मृत्यु की खबर मिला की लोगों का हुजूम जुटना शुरू हो गया। वे लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में समाज सेवा पंचायत जनप्रतिनिधि एवं कई संस्थानों से जुड़े रहे उन्होंने सिकंदरपुर पंचायत की ढांचे को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया उनके निधन से सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में क्षति हुई है
2.कौशल विकास योजना के तहत 9 वर्षों में 45 हजार से अधिक महिलाओं को मिला प्रशिक्षण
पटना/समाज कल्याण विभाग के अधीन महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इस कड़ी में निगम विभिन्न क्षेत्रों में निशुल्क या अनुदानित कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है, जिससे महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें। पिछले 9 वर्षों में 45 हजार 481 महिलाओं को लेखा सहायक, सौंदर्य चिकित्सक, शेफ, इलेक्ट्रीशियन, स्पा थेरेपिस्ट, ऑटो रिक्शा चालक, ड्रोन ऑपरेटर, डिजिटल मित्र, हेयरड्रेसर, गृह स्वास्थ्य सहयोगी, मोबाइल रिपेयर, सिलाई मशीन ऑपरेटर, सोलर पीवी इंस्टॉलर समेत कई अन्य क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में महिलाओं की बढ़ती आकांक्षाओं को देखते हुए निगम ने उन्नत और तकनीकी आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को शामिल किया है। इनमें ड्रोन टेक्नोलॉजी, किसान ड्रोन ऑपरेटर, मल्टी रोटर ड्रोन ऑपरेटर, पेस्ट्री/बेकरी असिस्टेंट तथा पेस्टिसाइड एवं फर्टिलाइजर एप्लिकेटर जैसे आधुनिक कोर्स शामिल हैं।
हाल ही में 16 और 17 मार्च 2026 को निगम की ओर से पहली बार महिला मेगा जॉब फेयर का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 6 हजार से अधिक महिलाओं को राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार मिला। मेले में 50 से ज्यादा कंपनियां शामिल हुईं, जिसने महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोले।
– इच्छुक महिलाएं ऑनलाईन या फोन नंबर के माध्यम से इन योजनाओं का लाभ अथवा जानकारी ले सकती हैं।
• ऑनलाइन पोर्टल: महिला एवं बाल विकास निगम की आधिकारिक वेबसाइट wcdc.bihar.gov.in पर जाएं। यहां स्कीम्स, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और आवेदन संबंधी जानकारी उपलब्ध है।
• बिहार स्किल डेवलपमेंट मिशन (बीएसडीएम) के सहयोग से चल रहे कोर्स के लिए biharskilldevelopmentmission.in पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
• निकटतम जिला कार्यालय या प्रशिक्षण केंद्र से भी संपर्क किया जा सकता है।
*संपर्क जानकारी:*
• टेलीफोन: 0612-2506078, 0612-2506068
• ईमेल: [email protected]
• महिला हेल्पलाइन: 181 (24×7)
3.जीविका दीदियों के हाथों से तैयार चायपत्ती बनी किशनगंज की पहचान
पटना/बिहार राज्य में समूहों से जुड़ीं जीविका दीदियां अपनी हुनर और मेहनत लगातार कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। रसोई, सिलाई, पशुपालन, नर्सरी, लघु एवं कुटीर उद्योग के साथ अब उन्होंने दूसरे अन्य कई क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। नई बानगी के तौर पर किशनगंज के पोठिया प्रखंड में इन दीदियों के हाथों चायपत्ती फैक्ट्री के संचालन के रूप में देखा जा सकता है। इस फैक्ट्री में दीदियों ने अपनी दक्षता के बल पर न सिर्फ रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं बल्कि दूसरों की जीविका का भी एक सशक्त माध्यम खड़ा किया है।
किशनगंज के पोठिया ब्लॉक में समूह से जुडीं दीदियां महानंदा एफपीसी (महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड) की ओर से संचालित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई के सहारे व्यापक स्तर पर चायपत्ती का उत्पादन कर रही हैं। इस काम से दीदियों को वार्षिक तौर पर लाखों की आमदनी भी हो रही है। वर्ष 2002 में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाइ) के तहत जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) किशनगंज को एक विशेष परियोजना स्वीकृत की गई थी। इसे देखते हुए 2010 में किशनगंज के पोठिया प्रखंड के कुसियारी पंचायत स्थित कालीदास किस्मत में करीब 10 एकड़ भूमि पर 9.64 करोड़ रुपये की लागत से बिहार सरकार ने एक चाय कारखाना स्थापित किया। कारखाने की स्थापना का उद्देश्य चाय पत्ता की खेती और पत्ता तोड़ने वालों स्थानीय किसानों के संघ के माध्यम से कारखाने का संचालन करना था।
इसी बीच जीविका के माध्यम से महानंदा संघ बनाने का निर्णय लिया गया। नतीजा, 14 जून 2021 को 10 प्रमोटर सदस्यों के सहारे महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया। एफपीसी से जुड़ी सभी महिलाएं जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। आज कुल 45 दीदियां किसानों के यहां से खरीदकर लाए गए चाय पत्ता से चायपत्ती का उत्पादन कर रही हैं। इस कार्य से जुड़े कर्मियों की तनख्वाह 10 हजार रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक निर्धारित है।
जीविका समूह के अधिकारियों का कहना है कि जीविका दीदियों के हाथों पिछले सीजन में डेढ़ लाख किलो चायपत्ती तैयार किया गया था। इसमें से करीब एक लाख किलो से अधिक की चायपत्ती की बिक्री हो चुकी है। दीदियों के उत्साह, हुनर और बाजार में उनकी चायपत्ती की मांग को देखते हुए इस वर्ष दस लाख किलो (एक हजार टन) चायपत्ती उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

