मोदी सरकार के 12 वर्षों में बदला बिहार का परिदृश्य, विकसित भारत की यात्रा में अग्रणी भूमिका निभा रहा राज्य : मुख्यमंत्री
राजकुमार यादव
पटना/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बीते एक दशक में देश और बिहार दोनों ने विकास का नया अध्याय लिखा है। उन्होंने कहा कि जिस बिहार को कभी अपनी बड़ी आबादी बोझ लगती थी, वही आज विकास की सबसे बड़ी ताकत बन गई है और आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य को अभूतपूर्व सहयोग मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने जनसंघ के समय से जो भी संकल्प देश के सामने रखा, उसे पूरा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाना तथा अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण भाजपा की ऐतिहासिक प्रतिबद्धताएं थीं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने विचारों और संकल्पों से कभी पीछे नहीं हटी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2004-05 से 2013-14 के दौरान बिहार को कर मद में लगभग 280 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि पिछले 11-12 वर्षों में यह राशि बढ़कर लगभग 12.90 लाख करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी और केंद्र सरकार की नीतियों ने बिहार की वित्तीय स्थिति को मजबूती दी है और राज्य की विकास क्षमता को नई ऊर्जा प्रदान की है। आज 3.17 लाख करोड़ रुपये के बजट वाले बिहार को केंद्र सरकार का
निरंतर सहयोग मिल रहा है, जिससे विकास कार्यों को गति मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी पहचान गरीब कल्याण है। गरीबों को भोजन, आवास, शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराकर सरकार ने उनके जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाया है। जनधन
खाते और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डी०बी०टी०) व्यवस्था आज सरकारी योजनाओं का लाभसीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुकी है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार में कमी आई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, जहां गांव-गांव तक बिजली पहुंच चुकी है और ग्रामीण सड़क संपर्क में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ग्रामीण सड़कों की लंबाई लगभग 1.20 लाख किलोमीटर पहुंच चुकी है। 100 से अधिक आबादी वाले सभी टोलों को पक्की सड़क से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही बिहार में पटना-पूर्णिया, बक्सर भागलपुर, आमस दरभंगा, गोरखपुर-सिलीगुड़ी, रक्सौल-हल्दिया तथा वाराणसी-गया-कोलकाता एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर जैसे बड़े संपर्क मार्गों पर कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी पर 7 नए पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है तथा 7 अन्य पुल निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा कोसी, गंडक, सोन, बागमती और फल्गु जैसी प्रमुख नदियों पर भी नए पुलों एवं संपर्क परियोजनाओं का विस्तार किया गया है। औंटा-सिमरिया गंगा पुल और पटना-आरा-सासाराम फोरलेन कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं ने उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क को नई मजबूती दी है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में 50 लाख घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे लोगों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध होगी। आधारभूत संरचना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद देश में जहां केवल 74 एयरपोर्ट थे, वहीं आज उनकी संख्या 100 से अधिक हो चुकी है। बिहार में पटना, दरभंगा और पूर्णिया के साथ-साथ सहरसा, बीरपुर, मुजफ्फरपुर रक्सौल, वाल्मीकिनगर और अन्य स्थानों पर हवाई संपर्क विस्तार की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि राजगीर तथा सासाराम कैमूर क्षेत्र में नई एयरस्ट्रिप विकसित करने की दिशा में भी पहल की जा रही है और भविष्य में आवश्यकता के अनुसार एयरपोर्ट, हेलीपैड और एयरस्ट्रिप का व्यापक नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे अवसंरचना के विकास के लिए बिहार को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं मिली हैं तथा 198 रेलवे स्टेशनों का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकास किया जा रहा है। रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं में व्यापक सुधार से बिहार की कनेक्टिविटी नई ऊंचाई पर पहुंच रही है। औद्योगिक विकास पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बिहार में निवेश का नया वातावरण तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि उप मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कई फैक्ट्रियों का उद्घाटन किया था और अब बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है। डाटा सेंटर परियोजना पर जल्द काम शुरू होने वाला है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार ने 20 नवंबर को अपने एक वर्ष पूरे होने तक बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश को धरातल पर उतारने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। पहले उद्योग लगाने के लिए 33-34 प्रकार की अलग-अलग स्वीकृतियां लेनी पड़ती थीं, लेकिन अब 30 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की जा रही है। कोई भी निवेशक आवेदन करेगा तो निर्धारित अवधि के भीतर उसे आवश्यक स्वीकृतियां स्वतः उपलब्ध हो जाएंगी। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और बिहार में उद्योगों की स्थापना को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति हुई है। वर्तमान में देश में बड़े पैमाने पर मोबाइल निर्माण हो रहा है और बिहार में राजगीर तथा मुंगेर को डिफेंस कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा, जिससे रोजगार और निवेश के नए अवसर सृजित होंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है।
पहले जहां 9-10 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं तथा 21 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। दरभंगा एम्स, मुजफ्फरपुर का होमी भाभा कैंसर अस्पताल तथा पी०एम०सी०एच० विस्तार जैसी परियोजनाएं स्वास्थ्य क्षेत्र में नए युग की शुरुआत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत बिहार के 4 करोड़ से अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिला है तथा 82 हजार करोड़ रुपये से अधिक के मुफ्त इलाज का लाभ उपलब्ध कराया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास को भी नई प्राथमिकता दी गई है। शिक्षा बजट बढ़कर 77,890 करोड़ रुपये हो चुका है। राज्य में लगभग 6 लाख शिक्षक और 94 हजार विद्यालय हैं। हर पंचायत में उच्च विद्यालय स्थापित करने की दिशा में कार्य हुआ है। इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 2 से बढ़कर 38, पॉलिटेक्निक संस्थान 13 से बढ़कर 46 तथा आई०टी०आई० की संख्या 23 से बढ़कर 152 हो गई है। महिला सशक्तीकरण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को नई शक्ति मिली है। महिला आरक्षण से लेकर लखपति दीदी अभियान तक अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में 30 लाख से अधिक महिलाएं इस अभियान से जुड़ी हैं और जीविका समूहों के माध्यम से लगभग 1.48 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक तंत्र विकसित हुआ है। राज्य सरकार जीविका निधि बैंक और ब्याज सहायता जैसी व्यवत्त्थाओं के माध्यम से महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाने का कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ओ०बी०सी० वर्ग को संवैधानिक दर्जा देने से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने तक सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में दरभंगा एम्स सहित कई राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के विस्तार का कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने वित्तीय प्रबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षकों का वेतन और पेंशन उनका मौलिक अधिकार है और किसी भी परिस्थिति में इसे रोका नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास योजनाओं के लिए उपयोगिता प्रमाणपत्र अवश्य लिया जाए लेकिन वेतन और पेंशन भुगतान में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।
नक्सलवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस क्षेत्र से वह आते हैं, वहां कभी नक्सली हिंसा बड़ी चुनौती थी, लेकिन आज देश नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है और विकास गांव-गांव तक पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी लंबित प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा वह स्वयं करेंगे, ताकि भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति या अन्य कारणों से रुकी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जा सके। पंचायती राज मंत्री श्री दीपक प्रकाश आज भी मंत्री हैं और आगे भी मंत्री बने रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्षों में केवल योजनाओं की घोषणा नहीं हुई, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का सफल प्रयास किया गया। सुशासन, गरीब कल्याण, आधारभूत संरचना, महिला सशक्तीकरण, सामाजिक न्याय और औद्योगिक विकास के माध्यम से भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बिहार इस परिवर्तन का सशक्त सहभागी बन चुका है।

