काली स्थान मंदिर परिसर में सैटलाइट टाउनशिप विरोधी प्रदर्शन कर वर्तमान सरकारी नीतियों की तीव्र निंदा
न्यूज डेस्क
पटना/फतेहपुर पंचायत के दर्जनों प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने 28 मई की संध्या 6:00 बजे काली स्थान मंदिर परिसर में सैटलाइट टाउनशिप विरोधी प्रदर्शन कर वर्तमान सरकारी नीतियों की तीव्र निंदा की और कहा कि वे अपनी जमीनों पर रोक व बिक्री की नीतियों को स्वीकार नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने हस्ताक्षर अभियान, बाजार बंद और संपत्तचक अंचल कार्यालय के सामने धरना देने की रणनीति घोषित की है।
परेशान ग्रामीणों ने बताया कि सरकार की 45%-55% जैसी नीतियाँ उनकी जमीनों और जीवनयापन पर सीधे प्रभाव डालेंगी, जिसे वे किसी हाल में मानने को तैयार नहीं हैं। फतेहपुर के भूतपूर्व मुखिया उमेश सिंह ने कहा, “यह हिटलर शाही अब हम पर नहीं चलेगी। हमारी जमीन हमारी मेहनत है, इसका निर्णय हमें ही करना है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार अपनी नीति नहीं बदलेगी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और गांव से सदन तक आवाज पहुंचाई जाएगी।
सभा में पचरुखिया पंचायत के 80 वर्षीय देव कुमार सिंह, जो इस आंदोलन के अग्रणी हैं, ने नेतृत्व सौंपा। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जब भी सामूहिक धरपकड़ हुई है सरकारें झुकती आई हैं और इस बार भी ग्रामीणों का एकजुट संघर्ष प्रभावी रहेगा। सदहपुरा निवासी जितेंद्र सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करने के लिए बाजार बंद करने का भी आह्वान तैयार किया जा रहा है, जबकि सैदनपुर निवासी धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि वे अपनी जमीन बचाने के लिए शहादत देने तक के लिए तैयार हैं।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रभावित पंचायतों के साथ मिलकर व्यापक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जाएगा और जल्द ही संपत्तचक अंचल कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा। यदि यह कदम भी प्रभावी नहीं हुआ तो आंदोलन को बड़े स्तर पर विस्तारित करने की रणनीति अपनाई जाएगी। बैठक में उमेश सिंह के साथ पूर्व मुखिया सुमित सुमन, विपुल कुमार, कृष्णकांत सिंह उर्फ फूल बाबू, संजय कुमार सिंह, जितेंद्र सिंह,पूर्व मुखीेया कमला प्रसाद सिंह, धर्मेंद्र सिंह, आलोक कुमार व फतेहपुर के वर्तमान पैक्स अध्यक्ष सहित कई पंचायत नेताओं ने हिस्सा लिया और एकजुटता का संकल्प व्यक्त किया।
संजय सिंह बोले, “हमारी मांग स्पष्ट है — हमारी जमीन हमारे नियंत्रण में रहे और अनावश्यक रोक-टोक व जबरन नीतियों को वापस लिया जाए।” ग्रामीण नेताओं ने प्रशासन से संवाद की भी मांग रखी है और आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है।
फतेहपुर सहित आसपास की पंचायतें कृषि व ग्रामीण अधिकारों की रक्षा के लिए दीर्घकाल से संगठित गतिविधियाँ चलाती आ रही हैं। ये पंचायतें स्थानीय जमीन, संसाधन और समुदाय की भलाई को केन्द्र में रखकर नीतिगत निर्णयों पर सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया देती हैं और जरूरत पड़ने पर शांतिपूर्ण जनअंदोलन कर प्रशासन तक अपनी आशंकाएँ पहुँचाती हैं।

