गौर करें तो लालू यादव और नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारे से उस गोलबंदी की याद दिला दी जो वर्ष 2015 विधानसभा चुनाव में देखने को
सुरेश गुप्ता की रिपोर्ट
पटना/राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दिल्ली भेजने भर से बीजेपी की राजनीतिक राहें बिहार में आसान होने नहीं जा रही है। पिछले तीन दशक के शासन काल में नीतीश कुमार ने विकास और सुशासन के इतने सारे मिल के पत्थर,खड़े किए हैं जो हर कदम पर आईने दिखाते रहेंगे। केवल नीतीश कुमार के दिल्ली चले जाने से किस किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने भर से नीतीश के वोटर में जितना आक्रोश है उसका असर देखिए। जदयू विधायक नीतीश कुमार को राज्यसभा चुनाव हराने के तरकीब और कानूनी सलाह लेने लगे हैं। नाराज कार्यकर्ता जदयू कार्यालय में तोड़फोड़ करने लगे है।
कार्यकर्ता जदयू के भीतर विभीषण खोज रहे हैं। नारा भी काफी उत्तेजना से भरा है। जूते मारो, जदयू के गद्दारों को। हद तो यह हो गई कि बिहार के चौक के चौराहों पर लालू और नीतीश कुमार के जिंदाबाद तक के नारे लगने लगे। गौर करें तो लालू यादव और नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारे से उस गोलबंदी की याद दिला दी जो वर्ष 2015 विधानसभा चुनाव में देखने को मिली थी। तब महागठबंधन यानी जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस ने 178 सीटें जीतीं, एनडीए ने 59 सीटें और अन्य को 6 सीटें मिलीं थी। दरअसल एनडीए सत्ता में जब कभी बनी तो वह नीतीश कुमार के कारण बनी रही। ऐसा इसलिए कि नीतीश कुमार के कारण कुर्मी,कुशवाहा, कहार,धानुक ,अत्यंत पिछड़ी जातियां और विकास और सुशासन पसंद जनता एनडीए के रथ पर सवार हो जाती थी।

