राष्ट्रपिता जन्मदिन विशेष ‘बापू’ आप इतनी जल्दी क्यों चले गए
संपादकीय
आप आए तो ताजी हवा की मानिंद आए। गुलामी की घुटन में सांस ले रहे एक पूरे देश को तुमने आजादी की वो खुली हवा दी, जिसकी कल्पना तक हमने छोड़ दी थी। लाठी, गोली और अंग्रेजी हुकूमत के सामने आप सिर्फ एक लंगोटी और एक लाठी लेकर खड़े हो गए, और पूरा साम्राज्य हिल गया।
लेकिन बापू तुम इतनी जल्दी चले क्यों गए।
आज तुम्हारी बहुत याद आती है। इसलिए नहीं कि तुम्हारी तस्वीर नोटों पर है, या तुम्हारे नाम पर छुट्टी मिलती है। इसलिए कि तुम्हारे जाने के बाद जो खालीपन आया, वो आज तक नहीं भरा।
देखो न बापू, आज क्या हो रहा है
तुम्हारी उन्हीं नालायक औलादों ने, जिनके लिए तुमने अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया, उस आजादी को, उस ताजी हवा को ही हमसे छीनने का हर दुष्कर्म शुरू कर दिया है। तुम्हारा नाम लेकर सत्ता के सिंहासन सज रहे हैं, तुम्हारी मूर्ति पर माला चढ़ाकर तुम्हारे ही विचारों का गला घोंटा जा रहा है।
हम आज भी तुम्हारी याद में पलक-पांवड़े बिछाए बैठे हैं। हर 2 अक्टूबर को मेले लगते हैं। सरकारी दफ्तरों में तुम्हारी तस्वीर साफ होती है। मंचों से “हैप्पी बर्थडे बापू” और “रघुपति राघव” गाया भी जाता है।
लेकिन बापू वो शून्य नहीं भरता
वो शून्य जो सत्य, अहिंसा और प्रेम से भरना था वो आज नफरत, झूठ और हिंसा से भर दिया गया है।
तुमने कहा था ,आंख के बदले आंख से पूरी दुनिया अंधी हो जाएगी। आज सब आंखें निकालने पर आमादा हैं। तुमने कहा था ।साधन पवित्र होने चाहिए। आज साध्य के लिए हर अपवित्र साधन जायज ठहराया जा रहा है।
आज तुम्हारे जन्मदिन पर हम तुम्हें याद नहीं, तुम्हें ढूंढ रहे हैं बापू। हर गली, हर गांव, हर उस आदमी में जो आज भी बिना डरे सच बोलने की हिम्मत रखता है।
लौट आओ बापू एक बार फिर तुम्हारी बहुत जरूरत है।

