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बिहार में विरासत की जंग तेजस्वी-चिराग ने संभाली कमान, क्या निशांत कुमार बन पाएंगे नीतीश की विरासत के असली वारिस

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संपादकीय 

बिहार की राजनीति एक बार फिर वंशवाद और विरासत के सवाल पर आकर खड़ी हो गई है। एक तरफ RJD चीफ लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत को उनके बेटे तेजस्वी यादव ने न सिर्फ संभाला है बल्कि खुद को नेता प्रतिपक्ष और महागठबंधन के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर स्थापित भी किया है। वहीं दूसरी तरफ LJP के संस्थापक दिवंगत रामविलास पासवान की विरासत को उनके बेटे चिराग पासवान ने केंद्र में मंत्री बनकर राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया है।

अब इसी कड़ी में तीसरा नाम जुड़ने जा रहा है : निशांत कुमार

जेडीयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर लंबे समय से चर्चा थी कि वो राजनीति में आएंगे या नहीं। अब जेडीयू ने साफ कर दिया है कि विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निशांत पर ही डाली जाएगी।

JDU का नया प्लान बिहार से यूपी तक

सूत्रों के अनुसार जेडीयू अब नए सिरे से बिहार से बाहर पैर पसारना चाहती है। इसके लिए सबसे बड़ा टारगेट उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव है। पार्टी की तैयारियां तेज हो गई हैं और इस बार मोर्चा खुद निशांत कुमार संभालेंगे।

जानकारी के मुताबिक अगले महीने निशांत कुमार उत्तर प्रदेश के दौरे पर जाएंगे, जहां वे राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। जेडीयू की कोशिश है कि निशांत को सिर्फ बिहार तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें तेजस्वी और चिराग की तरह राष्ट्रीय नेता के तौर पर स्थापित किया जाए।

बड़ा सवाल क्या निशांत में वो बात है

तेजस्वी यादव ने सड़क से सदन तक संघर्ष किया, चिराग पासवान ने पिता की मौत के बाद पार्टी को टूटने से बचाया और दिल्ली में अपनी जगह बनाई। दोनों ने अपनी अलग पहचान बनाई है।

लेकिन निशांत कुमार अभी तक राजनीति से दूर रहे हैं। वे बेहद शांत और लो-प्रोफाइल माने जाते हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या वे तेजस्वी और चिराग की तरह जनाधार वाले नेता बन पाएंगे। क्या बिहार की जनता उन्हें नीतीश के विकास मॉडल के असली वारिस के तौर पर स्वीकार करेगी।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि JDU के लिए ये एक बड़ा दांव है। अगर निशांत यूपी में सफल होते हैं, तो जेडीयू को राष्ट्रीय पार्टी बनने का सपना फिर से जिंदा हो सकता है। और अगर नहीं तो विरासत का ये प्रयोग फेल भी हो सकता है।