नेपाल में तबाही का तांडव पहले ठुकराई रेस्क्यू मदद अब PM बालेन शाह ने मांगे 5 अरब डॉलर
सेंट्रल डेस्क
काठमांडू/ हिमालयी देश नेपाल इस समय भीषण बाढ़ और भूस्खलन की दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ जहां देश अपनी सेना और सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है, वहीं दूसरी तरफ तबाही का आलम इतना बड़ा है कि अब नेपाल सरकार को दुनिया के सामने मदद के लिए हाथ फैलाना पड़ा है।
पहले रेस्क्यू टीमों को किया इनकार
कल तक नेपाल ने भारत, चीन समेत कई देशों की रेस्क्यू टीमों की मदद लेने से साफ इनकार कर दिया था। नेपाल सरकार का कहना था कि उसकी सेना और सुरक्षा एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान चलाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
नेपाल के इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस भी शुरू हो गई थी कि क्या आपदा के समय स्वाभिमान दिखाना सही है, जब हर मिनट में जानें बचाई जा सकती हैं। नेपाल की सेना और स्थानीय बचाव दल दिन-रात लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित इलाकों तक राहत पहुँचाने में जुटे हैं।
अब 5 अरब डॉलर की अपील
इसी बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देश की बर्बादी की भयावह तस्वीर सामने रखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 5 अरब डॉलर की सहयोग राशि की अपील की है।
PM शाह ने कहा कि बाढ़ ने सड़क, पुल, स्कूल, अस्पताल और हजारों घरों को तबाह कर दिया है। अकेले नेपाल की अर्थव्यवस्था से इतने बड़े पुनर्निर्माण को संभालना संभव नहीं है।
क्या इतनी बड़ी तबाही से उबर पाएगा नेपाल
विशेषज्ञों का मानना है कि 5 अरब डॉलर की राशि नेपाल की कुल जीडीपी का लगभग 12% है। 2015 के भूकंप के बाद भी नेपाल को उबरने में कई साल लग गए थे, जबकि तब नुकसान इससे कम था।
इस बार बाढ़ ने तराई से लेकर पहाड़ी जिलों तक को नहीं छोड़ा है। खेती बर्बाद है, पर्यटन ठप है और हजारों लोग बेघर हैं। ऐसे में सिर्फ रेस्क्यू से काम नहीं चलेगा, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए वैश्विक मदद ही एकमात्र सहारा है।
फिलहाल नेपाल के लिए दोहरी चुनौती है पहली अपने दम पर लोगों की जान बचाना और दूसरी, दुनिया से मदद लेकर देश को फिर से खड़ा करना।
भारत की नजर विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत नेपाल की हर संभव मदद के लिए तैयार है और काठमांडू के अगले कदम का इंतजार कर रहा है।

