राजभवन अब लोकभवन ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर राज्य सरकार और राज्यपाल आमने-सामने
न्यूज डेस्क
पटना/ बिहार में एक बार फिर राज्य सरकार और राजभवन के बीच प्रशासनिक टकराव की स्थिति बन गई है। इस बार मुद्दा लोकभवन यानी पूर्व राजभवन में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग है।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को साफ संदेश दे दिया है। राज्यपाल सचिवालय की ओर से शनिवार को जारी एक कार्यालय आदेश में कहा गया है कि अब लोकभवन में तैनात किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला करने से पहले अथवा किसी नए अधिकारी-कर्मचारी की पोस्टिंग करने से पहले राज्यपाल की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में लोकभवन में कई अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले और नई पोस्टिंग सामान्य प्रशासन विभाग के स्तर पर कर दी गई थीं। इस बात की जानकारी राज्यपाल को बाद में मिली। इसे राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक मर्यादा के खिलाफ बताया।
राज्यपाल का मानना है कि लोकभवन राज्यपाल का आधिकारिक आवास और कार्यालय है। यहां की कार्यशैली, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था सीधे राज्यपाल से जुड़ी है। ऐसे में बिना जानकारी के तबादले करने से कामकाज प्रभावित होता है।
राज्यपाल सचिवालय का कार्यालय आदेश
शनिवार को जारी आदेश में कहा गया है
लोकभवन में तैनात किसी भी अधिकारी, कर्मचारी अथवा सुरक्षाकर्मी का स्थानांतरण, प्रतिनियुक्ति अथवा नई नियुक्ति करने से पूर्व राज्यपाल सचिवालय को लिखित सूचना देना और अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इस आदेश का उल्लंघन सेवा नियमावली का उल्लंघन माना जाएगा।
आदेश में यह भी कहा गया है कि लोकभवन की गरिमा और गोपनीयता को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।इस मामले पर अभी तक राज्य सरकार या सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि सत्ता पक्ष के एक वरिष्ठ मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत तबादले होते रहते हैं। समन्वय की कमी रही होगी, उसे दूर किया जाएगा।
बिहार में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद नया नहीं है। पहले भी कुलपतियों की नियुक्ति, विधेयकों की स्वीकृति और अधिकारियों की तैनाती को लेकर दोनों के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं। अब लोकभवन के कर्मचारियों के मामले ने फिर से बहस छेड़ दी है।
राजद प्रवक्ता ने कहा राज्यपाल को राजनीति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। सरकार जनादेश से चलती है।
वहीं भाजपा नेता ने कहा राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख हैं। उनकी गरिमा का सम्मान होना चाहिए।

