राजनीति में वही नेतृत्व आगे बढ़ता है जो समय की नब्ज़ को पहचानकर कठिन लेकिन ज़रूरी फैसले लेने का साहस रखता है
राम दुलार यादव
पटना/राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा पार्टी की सभी सांगठनिक इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग कर नए संगठन के गठन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय एक बड़े आत्ममंथन और नई शुरुआत का संकेत माना जा सकता है।
मैं एक कलमकार के रूप में समय-समय पर अपने लेखों में लगातार यह लिखता रहा हूँ कि यदि राजद को फिर से जनता का व्यापक विश्वास हासिल करना है, तो संगठन में व्यापक बदलाव, कार्यकर्ताओं का सम्मान, नई सोच और जमीनी नेतृत्व को प्राथमिकता देनी होगी। आज यह निर्णय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम प्रतीत होता है।
उम्मीद है कि नए संगठन में वर्षों से संघर्ष कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं, युवाओं, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, दलितों, पिछड़ों और समाज के हर वर्ग को सम्मानजनक भागीदारी मिलेगी। राजद की असली ताकत उसके कार्यकर्ता हैं, और जब कार्यकर्ता मजबूत होंगे, तभी संगठन मजबूत होगा।
बिहार की जनता एक सक्रिय, संवेदनशील और मजबूत विपक्ष की अपेक्षा रखती है। यह नई शुरुआत राजद को नई ऊर्जा, नई दिशा और नया जनविश्वास प्रदान करेंगे।
संगठन बदलेगा, तो संदेश बदलेगा। संदेश बदलेगा, तो जनविश्वास भी लौटेगा।

