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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार के हैं, लेकिन उनकी हैसियत नहीं है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को बाढ़ प्रभावित बिहार का दौरा करवा दें : तेजस्वी प्रसाद यादव

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न्यूज डेस्क

पटना /राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने आज पटना के 01, पोलो रोड स्थित आवास पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि विगत 𝟐𝟖 दिनों से बिहार बाढ़ की विभीषिका ही नहीं बल्कि सुखाड की भी मार झेल रहा है। राज्य में 𝟑𝟓 फीसदी से कम बारिश हुई है। भीषण सूखे के कारण राज्य के लाखों हेक्टेयर जमीन में खड़ी फसलें नष्ट हो रही है। लाखों किसानों का लागत मूल्य भी नहीं निकल रहा है। सूखे का सरकार ने अभी कोई आकलन भी नहीं किया है। किसानों के सामने आजीविका का संकट है।
इन्होंने कहा कि एक तरफबिहार विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित है वहीं दूसरी ओर सुखद की स्थिति भी भयावह है। राज्य के 𝟓𝟎 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित है लेकिन फिर भी एनडीए की संवेदनहीन सरकार बाढ़ पीड़ितों की कोई सुध नहीं ले रही है। खानापूर्ति के लिए नाम मात्र की गिनी चुनी कुछ सामुदायिक रसोई और राहत शिविर शुरू किए थे वो भी फंड के अभाव के चलते 𝟐-𝟒 दिनों में ही बंद कर दिए गए।
श्री तेजस्वी ने आगे कहा कि बताइए जरा, जिन गरीबों के मकान गिर गए, जिनके घरों में पानी भरा है, जिनकी दिनचर्या का सामान जैसे जूते-चप्पल, कपड़े और बर्तन पानी में बह गये हैं, जिनके घरों के पास अब भी पानी की बदबू है। इस बेशर्म सरकार ने राहत शिविर बंद कर दिए है, बताइए वो बाढ़ पीड़ित इन परिस्थितियों में कहाँ जाएँगे? बाढ़ पीड़ितों से आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जिस कारण लोगों के बीच सही ढंग से राहत कार्य भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।
सरकार के खजाने पर पीड़ितों का हक़ है लेकिन वो सारा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया? इस सरकार ने ना कोई राहत दी और ना ही कोई तिरपाल व खाने पीने का सामान?
इन्होंने कहा कि बिहार के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला हक है। 𝟐𝟎𝟏𝟓 और 2022 में जब हमारी महागठबंधन की सरकार थी तब आपदा प्रबंधन और वित्त विभाग राजद के पास था तब हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय लालू प्रसाद जी की सलाह पर हमने बजट में यह प्रावधान कराया था कि बाढ़-सुखाड़, प्राकृतिक आपदा और संकट के समय राज्य के कुल बजट की चार फीसदी राशि को आकस्मिक निधि के रूप में उपयोग किया जा सकता है। अब आप बजट के अनुरूप हिसाब लगाइए कि बिहार की आकस्मिक निधि कितनी होगी? कहाँ गई वो राशि? बिहार में जून में ही आकस्मिक निधि निकाल लिए गए और बाढ़ पीड़ितों के लिए अब निधि का अभाव है।
बिहार के किसानों की कोई सुध नहीं ले रहा। बाढ़ के कारण लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में लगी धान, मक्का, सब्जी और केले की फसल बर्बाद हुई है। क्षतिग्रस्त फसल का कोई मुआवजा नहीं मिला है।
मेरे पत्र लिखने और लगातार बाढ़ पीड़ितों की आवाज उठाने पर दिखावटी तौर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी को बिहार भेजा गया। अब उस दौरे पर उन्होंने क्या रिपोर्ट दी है। राहत और पुनर्वास तथा नुकसान का कितना आकलन किया इत्यादि सभी जानकारी सार्वजनिक की जाए।

प्रधानमंत्री राहत कोष जिसे कोरोना में खत्म कर पीएम केयर्स फंड बनाया गया उस फण्ड से बिहार की मदद क्यों नहीं की गई? गोवा, अरुणाचल प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों को मिलाकर उनकी जितनी कुल जनसंख्या है उससे अधिक आबादी बिहार में बाढ़ से प्रभावित है लेकिन गृहमंत्री और प्रधानमंत्री को बिहार की कोई फिक्र नहीं? बिहार की कोई सहायता नहीं? क्या यह बिहार के साथ भेदभाव नहीं है? यह बिहार के लिए शर्म की बात है?
श्री तेजस्वी ने आगे कहा कि बिहार में बाढ़ के बाद भी 𝟏𝟎𝟎 करोड़ के दीये जलाये गये। बाढ़ पीड़ितों का जिया जलाने वाले संवेदनहीन लोग अब अपनी एक लाख-दो लाख की सैलरी देने की प्रतीकात्मक नौटंकी कर रहे है। इन सब को मिलकर कुल 𝟐-𝟑 करोड़ रुपए भी जमा नहीं होंगे। क्या 𝟓𝟎 लाख लोगों के लिए ये 𝟐-𝟑 करोड़ रुपए पर्याप्त रहेंगे?
सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद नहीं कर उससे ध्यान हटाकर ये सब नौटंकी करा रही है। अरे आपके अंदर हिम्मत है तो सरकार से मदद करवाओ ना? डबल इंजन सरकार इसी को कहते है क्या??
इन्होंने कहा कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार से है और उन बेचारे की इतनी भी हैसियत नहीं कि प्रधानमंत्री से आग्रह कर सके कि हे, मेरे नॉन-बायोलॉजिकल हुज़ूर; एक बार मेरे राज्य का दौरा कर लीजिए। बिहार में प्रथम बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है, बिहार से 𝟖 केंद्रीय मंत्री और एनडीए के कुल 𝟒𝟐 सांसद है, 𝟐𝟓𝟎 से अधिक सांसद लोकसभा और राज्यसभा तथा विधायक और विधान पार्षद है, लेकिन सब नकारे और निकम्मे है। जनता ऐसे नकारे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।
कथित डबल इंजन सरकार बाढ़ पीड़ितों को अविलंब 𝟏𝟓 हज़ार की मदद तथा सुखाड़ और बाढ़ प्रभावित किसानों का सर्वेक्षण करा उन्हें यथाशीघ्र मुआवजा दें।
इस अवसर पर संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रीय जनता दल के नेता श्री शक्ति सिंह यादव एवं एजाज अहमद भी उपस्थित थे।

(एजाज अहमद)