मुख्यमंत्री ने नासरीगंज-पानापुर निःशुल्क स्टीमर फेरी सेवा का किया शुभारंभ, आवागमन होगा सुगम, आर्थिक गतिविधियों को भी मिलेगी गति।। 2.मां मुडेश्वरी, बोधगया, सुल्तानगंज और मंदार के ऐतिहासिक स्थलों का वैज्ञानिक सर्वे कर उन्हें विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करें : मुख्यमंत्री
न्यूज डेस्क
पटना / मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज पटना के दानापुर स्थित नासरीगंज घाट से पानापुर घाट के बीच निःशुल्क स्टीमर (फेरी) परिचालन सेवा को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी श्री कुदंन कुमार ने स्टीमर (फेरी) परिचालन सेवा के संबंध में मुख्यमंत्री को विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्टीमर का निरीक्षण किया तथा स्टीमर पर सवार लोगों से मुलाकात की। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नेताओं एवं आमजनों ने पुष्प गुच्छ एवं फुल-मालाओं से मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा नासरीगंज-पानापुर स्टीमर फेरी सेवा से आवागमन काफी सुगम होगा और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। यह स्टीमर फेरी सेवा पूरी तरह निःशुल्क है।
स्टीमर फेरी सेवा के शुरु होने से दानापुर प्रखंड के दियारा क्षेत्र के लोगों को गंगा पार आवागमन में काफी सहूलियत होगी। साथ ही क्षेत्र में फेरी सेवा का लाभ दियारा क्षेत्र के सब्जी-फल, दुग्ध उत्पादकों-विक्रेताओं तथा किसानों को भी मिलेगा। कृषि एवं दुग्ध उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होने से स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। मॉनसून के दौरान यह सेवा क्षेत्र के लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। स्टीमर फेरी सेवा के माध्यम से दानापुर प्रखंड के दियारा क्षेत्र की 6 ग्राम पंचायतों- पुरानी पानापुर, मानस, कासिमचक, हेतनपुर, गंगहारा और पतलापुर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। दियारा क्षेत्र से दानापुर तक आवागमन के लिए गंगा नदी पर पीपा पुल का संचालन सामान्यतः नवंबर से 15 जून तक किया जाता है। शेष अवधि में पीपा पुल हटा लिए जाने के कारण मानसून के दौरान स्थानीय लोगों को गंगा पार करने में काफी कठिनाइयों एवं जोखिम का सामना करना पड़ता है। स्टीमर फेरी सेवा शुरू होने से इस अवधि में लोगों का आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित हो सकेगा।
दियारा क्षेत्र में वर्तमान में 58 विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 553 शिक्षक एवं कर्मी कार्यरत हैं। इसके अलावा क्षेत्र में 95 आंगनबाड़ी केंद्रों में 190 सेविका-सहायिका, 3 स्वास्थ्य उपकेंद्र तथा पंचायत कार्यालय संचालित हैं। फेरी सेवा शुरू होने से इन संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों, कर्मियों, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं, स्वास्थ्य कर्मियों एवं पंचायत कर्मियों को भी अपने कार्यस्थलों तक आने-जाने में सहूलियत होगीl जल परिवहन के बेहतर उपयोग से गंगा के दोनों ओर रहने वाले लोगों को आवागमन का एक अतिरिक्त एवं सुविधाजनक विकल्प भी उपलब्ध होगा।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, सहकारिता मंत्री श्री रामकृपाल यादव, विधान पार्षद श्री अनामिका सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी श्री कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक श्री कार्तिकेय के० शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।
2.मां मुडेश्वरी, बोधगया, सुल्तानगंज और मंदार के ऐतिहासिक स्थलों का वैज्ञानिक सर्वे कर उन्हें विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करें : मुख्यमंत्री
पटना / बिहार की हजारों वर्ष पुरानी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने और उसे पर्यटन के नए केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार व्यापक अभियान शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने राज्य के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार और विश्व प्रसिद्ध केसरिया स्तूप के संरक्षण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्खनन एवं समग्र विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। सरकार का उद्देश्य इन धरोहरों के ऐतिहासिक महत्व को नए सिरे से स्थापित करते हुए उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनाना है।
मुख्यमंत्री से देश के वरिष्ठ पुरातत्वविदों एवं विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर कैमूर जिले स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों के विस्तृत सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मंदिर परिसर में बिखरे हजारों प्राचीन भग्नावशेषों का वैज्ञानिक पद्धति से पुनर्स्थापन, संरक्षण तथा प्रलेखन किया जा सकता है, जिससे यह संपूर्ण क्षेत्र भारतीय पुरातात्विक धरोहर के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मां मुंडेश्वरी मंदिर के भग्नावशेषों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुरूप चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही पूरे क्षेत्र की पर्यटन क्षमता का समग्र विकास किया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक अनुभव उपलब्ध कराया जा सके।
मुख्यमंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में पद्मश्री डॉ० के०के० मोहम्मद (विश्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद् एवं राम जन्मभूमि उत्खनन दल के सदस्य), प्रोफेसर डॉ० रजत सान्याल, कोलकाता इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर, प्रोफेसर अनिल कुमार (मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार विरासत विकास समिति तथा शांति निकेतन के यूनेस्को विश्व धरोहर परियोजना से जुड़े विशेषज्ञ), भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए०एस०आई०) पटना के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ० हरिओम शर्मा, विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह तथा कला संस्कृति एवं भवन निर्माण विभाग के सचिव श्री प्रणव कुमार शामिल थे।
बैठक में कैमूर क्षेत्र के तिलहाड़ कुंड, करकटगढ़ तथा अन्य प्राकृतिक एवं प्रागैतिहासिक महत्व के स्थलों को एकीकृत रूप से विकसित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ये स्थल बनारस-कोलकाता एक्सप्रेसवे से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, जिससे भविष्य में यहां पर्यटकों की पहुंच और अधिक आसान होगी।
विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक सौंदर्य, प्रागैतिहासिक महत्व और पुरातात्विक संभावनाओं से समृद्ध यह क्षेत्र बिहार के नए हेरिटेज एवं इको टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित हो सकता है। इन स्थलों के वैज्ञानिक संरक्षण और व्यवस्थित विकास के बाद इन्हें भविष्य में यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल कराने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर और उसके आसपास अत्याधुनिक LiDAR (Light Detection and Ranging) तथा GPR (Ground Penetrating Radar) तकनीक से सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए। इन तकनीकों के माध्यम से बिना खुदाई किए जमीन के भीतर मौजूद संभावित पुरातात्विक संरचनाओं और अवशेषों की वैज्ञानिक पहचान की जा सकेगी। इससे भविष्य के उत्खनन कार्य अधिक सटीक और प्रभावी होंगे।
सुल्तानगंज और मंदार के संरक्षण पर भी विशेष जोर बैठक में सुल्तानगंज और मंदार क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थलों के संरक्षण, समेकन और समग्र विकास पर भी विशेष बल दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्थलों की ऐतिहासिक महत्ता को व्यवस्थित रूप से संरक्षित और प्रस्तुत किया जाए ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिल सके।
केसरिया स्तूप का पूरा होगा वैज्ञानिक उत्खनन मुख्यमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के शेष हिस्से के वैज्ञानिक उत्खनन का निर्देश दिया। अब तक इस विशाल स्तूप का केवल आंशिक उत्खनन हुआ है, जबकि इसके बड़े हिस्से में अभी भी महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में केसरिया स्तूप के उत्खनन एवं संरक्षण कार्य में पद्मश्री डॉ० के०के० मोहम्मद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने शेष क्षेत्र के वैज्ञानिक उत्खनन और संरक्षण के लिए आवश्यक कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि बिहार की धरती के नीचे अब भी अनेक महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरें सुरक्षित हैं, जिनकी वैज्ञानिक पहचान, उत्खनन और संरक्षण से राज्य के इतिहास के अनेक नए अध्याय सामने आ सकते हैं। साथ ही सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

