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बिहार में पहली बार होगा ब्रूडर फिश का उत्पादन, सीतामढ़ी में करीब 11 करोड़ से बना फिश ब्रूड बैंक तैयार।। 2. ग्रामीण विकास विभाग की वेस्ट टू आर्ट पहल ला रही रंग, कचरे से कलाकृति बनाकर आत्मनिर्भर बन रही जीविका दीदियां ।। 3.बिहार एसडीआरएफ में 78 पूर्व सैनिकों की संविदा पर नियुक्ति।। 4. राजगीर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम: भूमि तैयार, पवेलियन तैयार अब बिहार में होगी चौकों-छक्कों की बरसा

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राजकुमार यादव 

पटना/राज्य में जल्द ही ब्रूड बैंक से फिश ब्रूड का उत्पादन एवं उन्नत मत्स्य बीज का वितरण प्रारंभ होने वाला है। सीतामढ़ी में 10.92 करोड़ रुपये की लागत से बिहार का पहला फिश ब्रूड बैंक यानी मछलियों का बीज बैंक बनकर तैयार हो गया है। इसका शुभारंभ 8 अगस्त को माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी के कर-कमलों द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। फिश ब्रूड का उत्पादन शुरू हो जाने से हैचरी संचालकों को राज्य में सस्ती दर पर गुणवत्तापूर्ण प्रजनक मछली बीज उपलब्ध हो सकेगा।
सीतामढ़ी में बना फिश ब्रूड बैंक प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत बनाया गया है। यह सीतामढ़ी के बखरी में करीब 40 एकड़ में फैला हुआ है। 2020 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसका शिलान्यास किया था।
पहले बिहार के हैचरी संचालक प्रजनक मछलियां और मत्स्य बीज नदी, मान, जलाशय आदि प्राकृतिक संसाधनों से लाते थे। ऐसे बीज में आनुवंशिक दोष की संभावना अधिक रहती थी, जिससे मछलियों की वृद्धि कम और मृत्यु दर अधिक होती थी। इस ब्रूड बैंक में आधुनिक वैज्ञानिक तरीके से स्वस्थ, बड़े और आनुवंशिक रूप से उन्नत मछलियों (ब्रूडर्स) को तैयार किया जाएगा, ताकि उनसे गुणवत्तापूर्ण और रोग-मुक्त बीज तैयार किया जा सके।
सीतामढ़ी के डुमरा अंचल स्थित राघोपुर बखरी में इसे नीली क्रांति के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, इससे प्राकृतिक संसाधनों से प्रजनक संग्रहण पर निर्भरता कम होगी। तकनीक और अद्यतन प्रणाली पर आधारित यह ब्रूड बैंक लोगों को रोजगार के साथ-साथ बेहतर आर्थिक संबल भी प्रदान करेगा। यहां 40 एकड़ में कई बड़े ब्रूड स्टॉक तालाब, नर्सरी पॉन्ड और रियरिंग पॉन्ड बनाए गए हैं। साथ ही केंद्र पर मत्स्य बीज हैचरी की भी स्थापना की गई है, जिससे मत्स्य पालकों को गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
यहां मुख्य रूप से भारतीय मेजर कार्प – रोहू, कतला, मृगल, जयंती रोहू, कॉमन कार्प, अमृत कतला, अमूर कार्प के साथ-साथ मछलियों की अन्य प्रजातियों को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय स्तर पर सस्ता और शुद्ध बीज उपलब्ध होने से न सिर्फ मछली उत्पादन एवं रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा और बाहरी राज्यों पर मत्स्य बीज की निर्भरता में कमी आएगी। भविष्य में यह फिश ब्रूड बैंक मिट्टी जांच, पानी जांच, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।

 

2. ग्रामीण विकास विभाग की वेस्ट टू आर्ट पहल ला रही रंग, कचरे से कलाकृति बनाकर आत्मनिर्भर बन रही जीविका दीदियां

पटना /बिहार सरकार और ग्रामीण विकास विभाग के सतत प्रयासों से राज्य में कचरा प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अनोखी क्रांति देखने को मिल रही है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत कचरा से कला (वेस्ट टू आर्ट) की मुहिम को भोजपुर जिला प्रशासन ने एक नई ऊंचाई दी है, जो अब पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बन चुकी है। इस अभिनव पहल के माध्यम से न केवल कचरे का उचित पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण हो रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
जिला प्रशासन एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत काम कर रही जीविका संस्था के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को कचरे से कलात्मक उत्पाद बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर निर्मित अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों से एकत्र किए गए प्लास्टिक, कांच की बोतलें, पुराने कपड़े, जीन्स और अन्य परित्यक्त सामग्रियों का उपयोग करके जीविका दीदियां बेहद खूबसूरत फ्लावर पॉट, गुलदस्ते, गमले, शो-पीस, आभूषण और लटकन तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की कलात्मकता को बढ़ाने के लिए स्थानीय कलाकारों की चित्रकारी की भी मदद ली जा रही है, जिससे यह सामान न केवल हल्के और टिकाऊ हैं, बल्कि बाजार में काफी आकर्षक और लोकप्रिय भी साबित हो रहे हैं।
इस पूरी मुहिम को बड़ा प्रोत्साहन तब मिला जब भोजपुर के जिलाधिकारी श्री तनय सुल्तानिया के निर्देश पर जिले के सभी सरकारी कार्यालयों एवं कार्यक्रमों में अतिथियों के स्वागत और स्मृति चिह्न के रूप में कचरे से बने इन फ्लावर पॉट और जीवित पौधों को उपहारस्वरूप देने की परंपरा शुरू की गई। आज वेस्ट टू आर्ट पार्क की स्थापना, होम डेकोर अलाइव जैसे स्टार्ट-अप्स और स्वयं सहायता समूहों के साझा प्रयास से 3-आर (रिफ्यूज, रियूज, रिसाइकिल) के सिद्धांतों को बखूबी घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है।
हाल ही में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से गांधी मैदान, पटना में आयोजित राज्य स्तरीय सरस मेले में भी इन वेस्ट टू आर्ट उत्पादों ने खूब सुर्खियां बटोरीं। मेले में जीविका दीदियों द्वारा पुराने कपड़ों के रेशे और प्लास्टर ऑफ पेरिस के मिश्रण से बनाए गए आकर्षक गमलों एवं मूर्तियों की भारी मांग रही और जमकर बिक्री हुई। एक समूह द्वारा दूसरे समूह को प्रशिक्षित करने की इस श्रृंखला पद्धति से जीविका दीदियों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार हो गया है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राज्य में ग्रामीण रोजगार सृजन और महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।
सजावटी और इको फ्रेंडली सामान के लिए होम डेकोर अलाइव प्रमुख नाम वेस्ट टू आर्ट के क्षेत्र में होम डेकोर अलाइव एक प्रमुख नाम है, जो बेकार फेंक दिये जाने वाले कपड़ों और अन्य बेकार सामग्रियों से फूलदान, गमला, बर्ड हाउस जैसी उपयोगी, सजावटी और इको फ्रेंडली सामान बनाता है। प्रबंधन की पढ़ाई करने वाले श्री सौरभ कुमार ने इस स्टार्ट-अप की नींव रखी थी। आज यह भोजपुर जिला प्रशासन के विभिन्न कार्यालयों, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओँ को भी वेस्ट टू आर्ट के तहत बने फूलदान की आपूर्ति करते हैं। इस स्टार्ट-अप की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह सामान बनाने और इसकी बिक्री के लिए बाजार तलाशने के साथ लोगों को ट्रेनिंग भी देते हैं। सौरभ बताते हैं कि वे लोगों को वेस्ट से बने फूलदान में लगा पौधा उपहार में देने के लिए प्रेरित करते हैं। अब न सिर्फ सरकारी कार्यालयों में, बल्कि शादी-ब्याह और अन्य अवसरों पर भी लोग उपहार में फूलदान में लगा पौधा भेंट कर रहे हैं।

 

 3.बिहार एसडीआरएफ में 78 पूर्व सैनिकों की संविदा पर नियुक्ति

– आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री श्री रत्नेश सदा ने आयोजित समारोह में बांटे नियुक्ति पत्र, कहा-अनुभव, अनुशासन एवं सेवा भाव का पालन करें नवनियुक्त कर्मी
पटना, 04 जुलाई।
आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री श्री रत्नेश सादा ने सोमवार को राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) में संविदा के आधार पर चयनित पूर्व सैनिकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर राज्य आपदा मोचन बल में कुल 78 पूर्व सैनिकों को संविदा के आधार पर नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। इनमें निरीक्षक (कार्यपालक) के 19, अवर निरीक्षक (कार्यपालक) के 32, हेड कांस्टेबल (ग्राउंड ड्यूटी/रेडियो ऑपरेटर) के 23 और हेड कांस्टेबल/कांस्टेबल (चालक) के 04 पद शामिल हैं।
इस अवसर पर विभागीय सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री श्री सादा ने सभी चयनित पूर्व सैनिकों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्य आपदा मोचन बल का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण एवं चुनौतीपूर्ण है। यह केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में लोगों का जीवन बचाने का संकल्प है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय सेना में अर्जित अनुभव, अनुशासन एवं सेवा भावना के साथ सभी नियुक्त कर्मी राज्य आपदा मोचन बल को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
इसकी अध्यक्षता कर रहे आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव श्री संतोष कुमार मल्ल ने कहा कि भारतीय सेना से प्राप्त प्रशिक्षण, अनुशासन एवं कार्य संस्कृति राज्य आपदा मोचन बल के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि संविदा पर नियुक्त सभी पूर्व सैनिक समर्पण, प्रतिबद्धता एवं अनुशासन के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे और आपदा के समय त्वरित एवं प्रभावी राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव श्री मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी, समादेष्टा, राज्य आपदा मोचन बल श्री राजेश कुमार, मंत्री के आप्त सचिव श्री दुर्गेश कुमार, श्री सुनील कुमार वर्मा, राज्य आपदा मोचन बल के उप समादेष्टा मो. अनवर जावेद अंसारी, आपदा प्रबंधन विभाग के उप-सचिव श्री पंकज कुमार कमल सहित विभागीय अधिकारियों एवं राज्य आपदा मोचन बल के पदाधिकारी उपस्थिति रहे।

4. राजगीर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम: भूमि तैयार, पवेलियन तैयार अब बिहार में होगी चौकों-छक्कों की बरसात

 

पटना/अब क्रिकेट के रोमांचक मुकाबले देखने के लिए बिहार के क्रिकेट प्रेमियों को दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। जल्द ही राजगीर की धरती पर भी चौकों-छक्कों की बरसात होगी और स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठेगा। दिसंबर 2026 से क्रिकेट प्रशंसकों को अपने ही राज्य में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों का रोमांच देखने का अवसर मिलेगा। बिहार के स्टार क्रिकेटरों ईशान किशन और वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों के बल्ले की गूंज भी इसी मैदान पर सुनाई देगी। वहीं आकाश दीप व मुकेश कुमार जैसे गेंदबाज अपने धारदार गेंदबाजी से गिल्लियां बिखेरेंगे। नालंदा के राजगीर में नव निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है। खेल विभाग ने इसे हर हाल में दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
40 हजार दर्शकों का भव्य पवेलियन तैयार, तीन स्टैंड अंतिम चरण में
स्टेडियम का सबसे बड़ा आकर्षण 40 हजार दर्शकों की क्षमता वाली भव्य मुख्य पवेलियन है, जिसका निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा हो चुका है। वहीं शेष तीन दर्शक स्टैंड तेजी से आकार ले रहे हैं। निर्माण एजेंसियों को समयबद्ध ढंग से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तय समय सीमा के भीतर यह स्टेडियम क्रिकेट प्रेमियों के लिए तैयार हो सके।
विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा राजगीर का क्रिकेट स्टेडियम
करीब 90 एकड़ में विकसित हो रहा यह अत्याधुनिक स्टेडियम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है। लगभग 633 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस स्टेडियम में आधुनिक फ्लडलाइट, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड, कॉरपोरेट बॉक्स, वीआईपी गैलरी, मीडिया सेंटर, अत्याधुनिक ड्रेसिंग रूम, अभ्यास के लिए विशेष पिच तथा बेहतर ड्रेनेज सिस्टम जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मुख्य विकेट के लिए विशेष लाल मिट्टी तथा अभ्यास पिचों के लिए काली मिट्टी का उपयोग किया गया है, ताकि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल परिस्थितियां उपलब्ध कराई जा सकें।
बिहार के खेल इतिहास में जुड़ने जा रहा नया अध्याय
राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम केवल एक खेल परिसर नहीं, बल्कि बिहार के खेल विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद राज्य को पहली बार विश्वस्तरीय क्रिकेट अवसंरचना प्राप्त होगी। इससे भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों के आयोजन का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही बिहार के खिलाड़ियों को अपने राज्य में ही उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा। खेल पर्यटन, स्थानीय रोजगार और खेल अर्थव्यवस्था को भी इससे नई गति मिलने की उम्मीद है।
राजगीर बन रहा बिहार का नया स्पोर्ट्स कैपिटल
राजगीर में बना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शामिल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम है, जहां हॉकी, एथलेटिक्स, तैराकी, शूटिंग, कबड्डी, कुश्ती सहित अनेक खेलों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित हो चुकी हैं। इसमें क्रिकेट स्टेडियम के जुड़ने के बाद राजगीर देश के प्रमुख बहुखेल केंद्रों में मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम केवल एक खेल परिसर नहीं बिहार के खेलों के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। दिसंबर से यहां गूंजने वाले चौकों-छक्कों की आवाज़ पूरे देश को यह संदेश देगी कि बिहार अब खेल प्रतिभाओं के साथ-साथ विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना के मामले में भी नई पहचान बना चुका है। बिहार के क्रिकेट प्रेमियों का वर्षों पुराना सपना अब साकार होने जा रहा है। यह स्टेडियम राज्य के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय मंच देगा और आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों का नया केंद्र बनेगा।