मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं : शिक्षा मंत्री
न्यूज डेस्क
पटना/ मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विद्यालयों के बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और गर्म भोजन उपलब्ध कराना सभी संबंधित संस्थाओं की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उक्त वक्तव्य शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी ने विकास भवन के सभागार में मिड डे मील से जुड़ीं संस्थाओं के साथ समीक्षा बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए कही।
विकास भवन स्थित शिक्षा विभाग के सभागार में रविवार को मध्याह्न भोजन योजना से संबद्ध स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों व आपूर्तिकर्ताओं के साथ समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री ने योजना के संचालन, भोजन की गुणवत्ता तथा वितरण व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की।
बैठक के दौरान श्री तिवारी ने निर्देश दिया कि विद्यालयों में बच्चों को हर हाल में गर्म भोजन परोसा जाए। इसके लिए सभी सेंट्रलाइज्ड किचेन संचालित करने वाली संस्थाएं अगले दो माह के भीतर स्टील के बर्तनों के स्थान पर इंसुलेटेड बर्तनों की व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि भोजन का तापमान और गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने हर प्रखंड में सेंट्रलाइज्ड किचेन और बड़े प्रखंडों में दो किचेन खोलने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भोजन तैयार होने से लेकर विद्यालयों में बच्चों को परोसे जाने तक की पूरी प्रक्रिया अधिकतम 3 से 4 घंटे के भीतर पूरी होनी चाहिए। कई स्थानों से ऐसी शिकायतें मिली हैं कि 7 से 8 घंटे पूर्व तैयार भोजन बच्चों को परोसा जा रहा है। यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है और इसमें तत्काल सुधार किया जाना जरूरी है। अब प्रखंड साधनसेवी इसकी नियमित निगरानी करेंगे और पोर्टल पर तस्वीर अपलोड करेंगे। सेंट्रलाइज्ड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से इन सब पर नजर रखी जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मिड डे मील का संचालन करने वाली संस्थाएं यदि दूसरे को जिम्मेदारी सौंपने के बजाय खुद निगरानी की व्यवस्था मजबूत करें तो अधिकांश शिकायतों का स्वतः समाधान हो जाएगा। उन्होंने संस्थाओं को निर्देश दिया कि ऐसी व्यवस्था विकसित करें, जिसमें किसी भी अनधिकृत व्यक्ति की भूमिका की गुंजाइश न रहे।
श्री तिवारी ने कहा कि संचालन संबंधी किसी भी समस्या की जानकारी तत्काल मध्याह्न भोजन निदेशक अथवा उनके कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए ताकि समयबद्ध समाधान किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं बेहतर कार्य करेंगी और निर्धारित मानकों का पालन करेंगी, सरकार भविष्य में उनके हितों का भी समुचित ध्यान रखेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में मध्याह्न भोजन योजना से जुड़ी संस्थाओं की जिम्मेदारियां और बढ़ाई जाएंगी। शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभाग इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि भोजन निर्माण और उसके वितरण का काम एक ही संस्था को सौंपा जाए। इससे जवाबदेही तय होगी तथा भोजन की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था में और अधिक सुधार आएगा।
बैठक में मध्याह्न भोजन निदेशक सहित योजना से जुड़े अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। बैठक में 43 में 41 स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित हुए।

