क्या एक छात्र की ज़िंदगी इतनी सस्ती हो गई है बिहार सरकार पर बड़ा सवाल
राजकुमार यादव
आज के समय में शिक्षा को सबसे बड़ा अधिकार और सबसे मजबूत हथियार माना जाता है। लेकिन जब एक छात्र को अपनी ही आवाज़ उठाने के लिए इस हद तक जाना पड़े कि वह कई दिनों तक अनशन पर बैठ जाए, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असफलता को दर्शाता है।
इस तस्वीर में दिख रहा छात्र पिछले 6 दिनों से अनशन पर है। उसका शरीर कमजोर हो रहा है, लेकिन उसकी इच्छाशक्ति अभी भी मजबूत है। वह किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि अपने हक और न्याय के लिए लड़ रहा है। यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर एक छात्र को अपनी बात मनवाने के लिए इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ता है?
हमारे समाज में छात्र देश का भविष्य माने जाते हैं। लेकिन जब यही भविष्य उपेक्षा और अनदेखी का शिकार होने लगे, तो यह बेहद चिंताजनक है। प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी इस बात का संकेत देती है कि कहीं न कहीं व्यवस्था में संवेदनशीलता की कमी हो गई है।
यह केवल एक छात्र की लड़ाई नहीं है, बल्कि उन सभी छात्रों की आवाज़ है जो अपनी समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। चाहे वह शिक्षा व्यवस्था की खामियां हों, बेरोजगारी का मुद्दा हो या अन्य कोई समस्या हर जगह छात्रों को ही सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अब समय आ गया है कि हम चुप रहने के बजाय अपनी आवाज़ उठाएं। समाज के हर वर्ग को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगना चाहिए। क्योंकि अगर आज हम चुप रहे, तो कल यह समस्या और भी बड़ी हो सकती है।

