भारत और नेपाल के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर सीमा पर तस्करी जारी
राम दुलार यादव
मधुबनी/भारत और नेपाल के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर है, जिसके कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में ईंधन का अवैध कारोबार फल-फूल रहा था।
ईंधन का प्रकार नेपाल में कीमत (भारतीय ₹) भारत (बिहार सीमा) में कीमत अंतर (प्रति लीटर)
पेट्रोल ₹135.35 ~₹106.56 ₹28.79
डीजल ₹127.82 ~₹96.00 ₹31.82
नेपाल में लागू ‘फ्यूल लॉकडाउन’ और ऊँची कीमतों के कारण लोग भारतीय सीमा से सस्ते में तेल खरीदकर उसे नेपाल के तराई क्षेत्रों (सिरहा,वीरगंज, जनकपुर, विराटनगर ..) में महंगे दामों पर बेच रहे है।
प्रशासन का नया नियम और सख्ती
नेपाली वाहनों पर रोक: नेपाली नंबर प्लेट वाले वाहनों के लिए टैंक फुल या व्यावसायिक मात्रा में तेल लेना अब वर्जित है।
पोस्टर और चेतावनी: सीमावर्ती इलाकों के पंपों पर बाकायदा ‘नेपाली वाहनों को तेल देना मना है’ के पोस्टर लगा दिए गए हैं।
आपातकालीन स्थिति में राहत (मानवीय पहलू)
प्रशासन ने सख्ती के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया है कि कोई यात्री बीच रास्ते में न फंसे।
सीमित मात्रा: आपात स्थिति में नेपाली वाहनों को ₹50 से ₹100 तक का तेल दिया जा सकता है, ताकि वे अपने गंतव्य या नजदीकी सीमा तक पहुँच सकें।
जरूरतमंदों की मदद: यह छूट केवल मानवीय आधार पर है, व्यापारिक उपयोग के लिए नहीं।
प्रभावित क्षेत्र (बिहार के 7 सीमावर्ती जिले)
बिहार के इन 7 जिलों में करीब 400 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से 120 बॉर्डर के 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं:
सीतामढ़ी
बेतिया (पश्चिम चंपारण)
मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)
मधुबनी
सुपौल
अररिया
किशनगंज
स्थानीय उपभोक्ताओं और किसानों को फायदा
मधुबनी पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, इस रोक से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है:
लंबी कतारों से मुक्ति: पहले नेपाली वाहनों की भीड़ के कारण भारतीय किसानों को डीजल के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था।
स्टॉक की उपलब्धता: अब पंपों पर स्टॉक खत्म होने की समस्या कम हुई है, जिससे खेती और स्थानीय परिवहन सुचारू रूप से चल रहा है।
नेपाल में संकट का कारण
नेपाल वर्तमान में फ्यूल लॉकडाउन का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू आपूर्ति संकट के कारण वहां सप्ताह में दो दिन तेल की बिक्री बंद रखी जा रही है। हालांकि भारत, नेपाल का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और उसकी 100% पेट्रोलियम जरूरतें पूरी करता है, लेकिन कीमतों के इस बड़े अंतर ने कूटनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर यह कड़ा कदम उठाने को मजबूर किया है।

