बिहार

राजनगर अरविंद पैलेस में डांडिया उत्सव मनाया जायेगा

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प्रदीप कुमार नायक

मधुबनी/03 अक्टूबर से नवरात्र की शुरुआत हो चुकी हैं l उसे ध्यान में रखते हुए मधुबनी जिले के राजनगर में डांडिया उत्सव मनाने की तैयारी शुरू की जा चुकी है l राजनगर में प्रथम वर्ष है , जब नवरात्रि पर्व पर डांडिया उत्सव अरविंद पैलेस में 07 अक्टूबर को मनाया जायेगा ।
समिति के सदस्यों ने बताया कि डांडिया उत्सव में भाग लेने पर न्यूनतम शुल्क सपरिवार के साथ 450 रुपया और सिंगल का 251 रुपया रखा गया हैं ,जिनमें उन्हें रात्रि का भोजन भी कराया जाएगा एल।इस बार डांडिया उत्सव संध्या 6 बजे से देर रात तक चलेगी ।
डांडिया में लोग माता दुर्गा की आराधना करते है । नवरात्रि पर्व पर राजनगर के अरविंद पैलेस में भक्तिमय माहौल बना रहेगा । स्थानीय लोगों के साथ दूर दराज के लोग भी डांडिया उत्सव में भाग लेंगे l किसी को कोई परेशानी न हो इसके लिए डांडिया उत्सव समिति द्वारा तैयारी में इसका खास ध्यान रखा गया हैं ।
यहां बताते चले कि डांडिया रास भारतीय राज्य गुजरात से उत्पन्न सामाजिक – धार्मिक लोक नृत्य हैं और नवरात्रि के त्योहार में लोकप्रिय रूप से किया जाता हैं ।डांडिया में पुरुष और महिलाएं पारंपरिक रूप से डांडिया रास खेलते है और नृत्य जोड़ो में होता है । जिसका अर्थ है कि समूह में एक सम संख्या होनी चाहिए । आमतौर पर दो पक्तियां बनाई जाती हैं,जिससे साथी एक दूसरे का सामना करते है । पंक्तियां दक्षिणवर्त घूमती है,और प्रत्येक व्यक्ति अपने साथी के साथ लाठी मारने के लिए आगे बढ़ता हैं,फिर दो लोगों पर चलता हैं ।पंक्ति के अंत में प्रत्येक व्यक्ति मूढ़ता है और विपरीत पंक्ति में शामिल होता हैं l इसलिए आंदोलन निरंतर होता हैं ,संगीत बहुत धीरे धीरे शुरू होता हैं ।यह एक आठ बीट का समय चक्र हैं जिसे कहरवा कहां जाता है,और निम्न लिखित तरीके से प्रदर्शन किया जाता है । पहली बीट पर आपकी अपनी छड़े एक साथ टकराती हैं ।उसके बाद आपके साथी के साथ दाई छड़े ,फिर बाई छड़े या एक ही छड़ी का उपयोग करते हुए फिर हर कोई अपनी छड़ियों को एक साथ मारने के लिए बाई ओर मुड़कर फिर से दाई छड़ियों को मारता है ।
डांडिया रास नृत्य देवी दुर्गा के सम्मान में प्रदर्शन किया जाता हैं, जो भक्ति गरबा नृत्य के रूप में जन्म लिया हैं l इस नृत्य को वास्तव में देवी दुर्गा और महिषासुर पराक्रमी राक्षस राजा के बीच एक नकली लड़ाई का मंचन हैं l इस नृत्य को तलवार नृत्य उपनाम दिया गया हैं ।नृत्य की छड़े देवी दुर्गा की तलवार का प्रतिनिधित्व करते हैं ।