बिहारशिक्षासंस्कृति

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों के साथ की विस्तृत समीक्षा

बिहार हलचल न्यूज ,जन जन की आवाज
Listen to this article

न्यूज डेस्क 

मधुबनी में मध्यमा परीक्षा 2027 की तैयारी को लेकर बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक, पिछले वर्ष से दोगुने विद्यार्थियों को शामिल कराने का लक्ष्य बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों के साथ की विस्तृत समीक्षा ऑनलाइन तैयारी, बेहतर शैक्षणिक माहौल और विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि दिलाने पर हुई चर्चा
मधुबनी। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत मधुबनी जिले के संस्कृत उच्च विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मध्यमा परीक्षा 2027 की तैयारियों, विद्यार्थियों के पंजीकरण, विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने, परीक्षा परिणाम में सुधार लाने तथा संस्कृत शिक्षा के व्यापक विस्तार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष श्री मृत्युंजय कुमार झा ने की। इस अवसर पर बोर्ड के माननीय सदस्य श्री अरुण कुमार झा सहित विभिन्न संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षक उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए बोर्ड के अध्यक्ष श्री मृत्युंजय कुमार झा ने कहा कि मधुबनी जिला संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में सदैव अग्रणी रहा है। पिछले वर्ष मध्यमा परीक्षा 2026 में मधुबनी जिले का प्रदर्शन बिहार में सर्वश्रेष्ठ रहा था। जिले से लगभग 2,650 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि को आगे बढ़ाते हुए मध्यमा परीक्षा 2027 में विद्यार्थियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और संबंधित पदाधिकारियों को समन्वित प्रयास करना होगा।
विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और विद्यालयों में बेहतर माहौल बनाने पर जोर
श्री झा ने कहा कि मधुबनी जिले में संस्कृत विद्यालयों की संख्या अधिक है और यहां संस्कृत के प्रति समाज में विशेष लगाव एवं सांस्कृतिक जुड़ाव देखने को मिलता है। इस सकारात्मक वातावरण का उपयोग करते हुए अधिक से अधिक विद्यार्थियों को संस्कृत शिक्षा से जोड़ना आवश्यक है।
उन्होंने सभी प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों से अपील की कि वे अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने, नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और विद्यालयों का संचालन सुचारू रूप से करने के लिए विशेष पहल करें। विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए तथा स्थानीय स्तर पर अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों की सहभागिता बढ़ाई जाए।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में सकारात्मक एवं प्रेरणादायक वातावरण तैयार करना समय की आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों का संस्कृत के प्रति आकर्षण बढ़ेगा और वे मध्यमा परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होंगे।
जनवरी-फरवरी में ऑनलाइन माध्यम से होगी परीक्षा की तैयारी
मध्यमा परीक्षा 2027 के परिणाम को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड द्वारा जनवरी-फरवरी में पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन तैयारी कराने की योजना पर भी चर्चा हुई।
अध्यक्ष श्री झा ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में शामिल कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण तैयारी का अवसर उपलब्ध कराना भी बोर्ड की प्राथमिकता है। ऑनलाइन तैयारी के माध्यम से विद्यार्थियों की विषय संबंधी समझ विकसित करने, प्रश्नों को सही तरीके से समझने तथा उत्तर लिखने की क्षमता को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष परीक्षा का परिणाम उत्साहजनक रहा था। इस बार भी बेहतर तैयारी, शिक्षकों के मार्गदर्शन और नियमित अध्ययन के माध्यम से शानदार परिणाम प्राप्त करने का लक्ष्य है। सभी विद्यालयों को समय सीमा के भीतर परीक्षा फॉर्म भरवाने और प्रत्येक विद्यार्थी की तैयारी पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया।
विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि दिलाने के लिए भी पहल
बैठक में मध्यमा परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का विषय भी प्रमुखता से उठाया गया। अध्यक्ष श्री मृत्युंजय कुमार झा ने कहा कि विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना और उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मान देना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि प्रोत्साहन राशि से संबंधित विषय पर बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के स्तर पर पहल के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक प्रगति होगी और पात्र विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सकेगा। प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को मिलने वाली ₹10,000 की प्रोत्साहन राशि सहित संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई।
संस्कृत के विकास में मधुबनी की हो अग्रणी भूमिका
अध्यक्ष श्री झा ने कहा कि बिहार में संस्कृत शिक्षा को मजबूत बनाने और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में संस्कृत विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मधुबनी जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिले को इस दिशा में नेतृत्वकारी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मिथिलांचल के विभिन्न जिलों में मध्यमा परीक्षा को लेकर सकारात्मक प्रयास हुए हैं। आगामी मध्यमा परीक्षा 2027 में भी मिथिलांचल के सभी जिलों से बेहतर परिणाम आने की अपेक्षा है। मधुबनी जिले को विद्यार्थियों की संख्या और परीक्षा परिणाम, दोनों क्षेत्रों में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य में शैक्षणिक वातावरण को मजबूत बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कृत शिक्षा भी इस व्यापक शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उन्होंने संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और विस्तार के लिए सरकार, बोर्ड, विद्यालयों, शिक्षकों एवं समाज के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
अरुण कुमार झा को सौंपी गई विशेष जिम्मेदारी
बैठक में बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के माननीय सदस्य श्री अरुण कुमार झा ने भी संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं, विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने तथा मध्यमा परीक्षा 2027 को सफल बनाने के संबंध में अपने विचार रखे।
उन्होंने सभी प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। साथ ही नवरात्र के पावन अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्कृत शिक्षा के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को धरातल पर उतारना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बैठक में अध्यक्ष श्री मृत्युंजय कुमार झा ने मधुबनी जिले में संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं के समाधान, विद्यालयों के बीच समन्वय स्थापित करने तथा मध्यमा परीक्षा 2027 में बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में विशेष जिम्मेदारी श्री अरुण कुमार झा को सौंपी। उन्होंने अपेक्षा जताई कि उनके नेतृत्व एवं समन्वय से विद्यालयों की समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी और मधुबनी जिला मध्यमा परीक्षा 2027 में नया रिकॉर्ड स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
सामूहिक प्रयास से बनेगा संस्कृत शिक्षा का मजबूत भविष्य
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मध्यमा परीक्षा 2027 को सफल बनाने के लिए केवल बोर्ड के स्तर पर प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों, अभिभावकों, स्थानीय समाज और विद्यार्थियों को मिलकर काम करना होगा।
बैठक में उपस्थित प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों ने परीक्षा की तैयारियों, विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के संबंध में अपने विचार एवं सुझाव रखे।
इस अवसर पर श्री प्रजापति ठाकुर, श्री विजय कुमार मिश्रा सहित विभिन्न संस्कृत उच्च विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षक उपस्थित थे।
बैठक का मुख्य संकल्प स्पष्ट था—मधुबनी जिले में संस्कृत शिक्षा को नई ऊंचाई देना, मध्यमा परीक्षा 2027 में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाना, बेहतर परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करना और संस्कृत की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना।