प्रधानमंत्री मोदी या प्रवचनकर्ता 140 करोड़ जनता ने आपको किस लिए चुना है
राम दुलार यादव
दिल्ली/देश ने आजाद भारत में कई प्रधानमंत्री देखे। किसी ने नारा दिया जय जवान जय किसान, किसी ने देश को परमाणु शक्ति बनाया, किसी ने अर्थव्यवस्था के दरवाजे खोले। लेकिन यह पहला ऐसा प्रधानमंत्री देखा है जो कभी थाली बजवाता है कभी दीपक जलवाता है।
कभी कहता है – तेल कम खाओ।
कभी कहता है – ज्यादा घूमने मत जाओ।
कभी कहता है – सोना मत खरीदो।
सवाल सीधा है, क्या 140 करोड़ जनता ने प्रधानमंत्री इसलिए बनाया है।
देश की जनता ने प्रधानमंत्री को प्रवचन देने के लिए नहीं चुना था। जनता ने चुना था महंगाई कम करने के लिए, रोजगार देने के लिए, अस्पताल और स्कूल बेहतर करने के लिए, किसानों की आय दोगुनी करने के लिए।
जब थाली बज रही थी तब डॉक्टर ऑक्सीजन मांग रहे थे।
जब दीये जल रहे थे तब युवा नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा था।
जब तेल कम खाने की सलाह दी जा रही है तब रसोई का तेल 200 रुपये लीटर के पार है।
जब घूमने से मना किया जा रहा है तब रेल का किराया बढ़ रहा है।
जब सोना न खरीदने की नसीहत दी जा रही है तब रुपये की कीमत लगातार गिर रही है।
प्रधानमंत्री का काम देश को रास्ता दिखाना है, ज्ञान देना नहीं। देश की जनता समझदार है। उसे पता है कब क्या खाना है, कब क्या खरीदना है। उसे जरूरत है सस्ती शिक्षा, सस्ता इलाज, सुरक्षित भविष्य की।
140 करोड़ की जनता थाली बजाने और ताली बजाने में बहुत माहिर है, लेकिन अब वह हिसाब भी मांगती है। वह पूछती है – वादे कहां गए।नौकरियां कहां गईं? अच्छे दिन कहां गए।
कुर्सी पर बैठने वाला अगर सिर्फ सलाहकार बन जाए तो देश कैसे चलेगा।देश को अब प्रवचन नहीं, समाधान चाहिए।

