बांकीपुर का बदलता मिज़ाज क्या पटना ने बदलाव की दस्तक दे दी
कृष्णा कुमार
पटना/बांकीपुर उपचुनाव की मतगणना अब केवल आंकड़ों का खेल नहीं रही, बल्कि बिहार की बदलती राजनीति की एक नई इबारत लिखती दिखाई दे रही है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि बोरिंग रोड जैसे उस इलाके से, जिसे वर्षों से भाजपा का सबसे मज़बूत गढ़ माना जाता रहा है और जहाँ परंपरागत रूप से भाजपा को 80–85 प्रतिशत तक वोट मिलने की चर्चा रही है, वहीं से अपेक्षा के विपरीत मुकाबला कड़ा दिखाई दिया। शुरुआती दौर में भाजपा कुछ समय के लिए आगे ज़रूर निकली, लेकिन उसके बाद तस्वीर लगातार बदलती गई।
छह राउंड की मतगणना के बाद प्रशांत किशोर लगभग 3,647 वोटों की बढ़त के साथ आगे चल रहे हैं। उल्लेखनीय यह भी है कि चौथे राउंड में भाजपा केवल 17 वोटों से आगे निकली थी, जबकि बाकी अधिकांश राउंड में जन सुराज ने बढ़त बनाए रखी। वहीं राजद इस मुकाबले में काफ़ी पीछे नज़र आ रही है।
अगर यह रुझान नतीजों में बदलता है, तो यह सिर्फ़ एक सीट की जीत नहीं होगी, बल्कि बिहार की राजनीति में एक बड़े मनोवैज्ञानिक बदलाव का संकेत होगी। वर्षों से जिन इलाक़ों को अभेद्य किला माना जाता था, वहाँ भी अब मतदाता नए विकल्प पर गंभीरता से विचार करता दिखाई दे रहा है।
हालाँकि अंतिम फैसला मतगणना पूरी होने के बाद ही होगा, लेकिन इतना तो साफ़ है कि प्रशांत किशोर ने अपने संघर्ष, लगातार जनसंपर्क और वैकल्पिक राजनीति के संदेश से बिहार की राजनीति में अपनी मज़बूत मौजूदगी दर्ज करा दी है।
लोकतंत्र में सबसे बड़ा विजेता जनता होती है। आज बांकीपुर की जनता ने यह संदेश ज़रूर दिया है कि मतदाता अब जाति और परंपरागत समीकरणों से आगे बढ़कर नए विकल्पों को भी अवसर देने का माद्दा रखता है।
अंतिम परिणाम चाहे जो भी हो, बांकीपुर का यह चुनाव बिहार की राजनीति में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

