विभागीय सचिव ने कहा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हो रहा राज्य का सर्वांगीण विकास।। 2.माँ दूध बने हर शिशु का पहला अधिकार विश्व स्तनपान सप्ताह आज से।। 3.आवेदन देने वाले शिक्षकों का ही होगा स्थानांतरण : मंत्री ।।4. मशरूम की खेती पर कृषि बिजली दर में किसानों को बड़ी राहत दे रही है सरकार
राजकुमार यादव
पटना/सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सोहैल ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी की दूरदर्शी सोच के अनुरूप आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए राज्य के सभी पंचायतों, प्रखंडों और नगर निकायों में प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। 19 मई से शुरू हुए इस अभियान में 30 जुलाई तक करीब एक दर्जन सहयोग शिविरों का आयोजन हुआ। इनमें विभिन्न तरह की समस्याओं से संबंधित 5 लाख 83 हजार 866 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 5 लाख 33 हजार 904 मामलों का समय सीमा के भीतर निपटारा किया जा चुका है। शेष लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया भी तेजी से की जा रही है। सहयोग शिविर के सबसे ज्यादा मामले भोजपुर, पश्चिम चम्पारण, पटना, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जिलों से सामने आए हैं।
श्री सोहैल ने यह भी कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी के नेतृत्व में राज्य के सर्वांगीण विकास और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में लगातार कार्य किये जा रहे हैं। इस क्रम में राज्य में सहयोग शिविर का आयोजन एक महत्वपूर्ण कड़ी है। लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से सहयोग पोर्टल बनाया गया है, जिस पर कभी भी ऑनलाइन परिवाद दर्ज कराया जा सकता है। साथ ही, नि:शुल्क हेल्पलाइन नंबर 1100 डायल कर सहयोग शिविर से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
विगत समय में सामान्य प्रशासन विभाग की कई उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए श्री सोहैल ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग; बिपार्ड, गयाजी एवं बिपार्ड, पटना को इस वर्ष आईएसओ 9001: 2015 अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, 2011 के तहत अभी तक करीब 53.80 करोड़ आवेदनों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया जा चुका है। पंचायत सरकार भवनों में स्थापित लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से 64 से अधिक सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। इससे नागरिकों को अब प्रखंड, अनुमंडल अथवा जिला मुख्यालय जाने की आवश्यकता नहीं रह गयी है। सचिव मो. सोहैल के अनुसार, पंचायत स्तर पर अब तक कुल 33 लाख 77 हजार 620 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 33 लाख 48 हजार 776 आवेदनों को सफलतापूर्वक निष्पादित किया जा चुका है। इस व्यवस्था को अधिक दक्ष बनाने के उद्देश्य से दिनांक 23 जून 2026 से प्राप्त होने वाले आवेदनों की स्वत: अपील की व्यवस्था प्रारंभ की गई है। इसके अंतर्गत अब तक कुल 6934 अपील के मामलों में 5503 मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से हर प्रमंडल में एक लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी और जिले में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी तैनात किए गए हैं। इसके तहत प्राप्त आवेदनों में 19.38 लाख से अधिक परिवादों का निपटारा किया जा चुका है। प्रेस वार्ता के दौरान श्री सोहैल ने सरकारी सेवक शिकायत निवारण प्रणाली, सरकारी पदाधिकारी एवं कर्मियों का क्षमतावर्धन, मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना, मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली, चल-अचल संपत्ति विवरण, हेल्पलाइन एवं कॉल सेंटर से संबंधित योजनाओं के साथ ही महत्वपूर्ण प्रशानिक निर्णयों से अवगत कराया। इस अवसर पर विशेष सचिव श्री संजय कुमार, बीपीएसएम के अपर मिशन निदेशक मो. राशिद कलीम अंसारी, संयुक्त सचिव मो. आफाक अहमद आदि लोगों की प्रमुख उपस्थिति रही।
2.मां का दूध बने हर शिशु का पहला अधिकार, विश्व स्तनपान सप्ताह आज से
पटना/विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 (1 से 7 अगस्त) के सफल आयोजन को लेकर समाज कल्याण विभाग के समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय ने शुक्रवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में पोषण ट्रैकर आधारित बाल पोषण संकेतकों की समीक्षा, सेवाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बेहतर प्रगति को लेकर विस्तृत मंथन किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए आईसीडीएस निदेशक डॉ. प्रीति ने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 एक अभियान ही नहीं, यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने निर्देश दिया कि 1 से 7 अगस्त तक राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि प्रत्येक परिवार तक यह संदेश पहुंचे कि शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराया जाए, जन्म से पहले छह माह तक केवल मां का दूध दिया जाए तथा दो वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखा जाए।
उन्होंने कहा कि पोषण ट्रैकर पर केवल आंकड़े दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ उपलब्ध डेटा का विश्लेषण कर समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना ही इसकी वास्तविक सफलता है। पोषण ट्रैकर सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत विकसित एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, बच्चों और किशोरियों को प्रदान की जा रही सेवाओं की रियल-टाइम निगरानी की जाती है। सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को एफआरएस, एचसीएम टिक-मार्क, टीएचआर वितरण, नॉमिनी सुविधा तथा पोषण ट्रैकर पर दर्ज किए जा रहे आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से शत-प्रतिशत निरिक्षण करने का निर्देश दिया। उन्होंने कार्यक्रम संकेतकों की नियमित समीक्षा कर सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा स्वस्थ एवं कुपोषण-मुक्त बिहार के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यशाला में एफआरएस, गर्भावस्था, बाल्यावस्था, पंखुड़ी, सीआरएस तथा अति कुपोषित (एसएएम) बच्चों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही पोषण ट्रैकर में समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण डेटा प्रविष्टि, पोषण सेवाओं की निगरानी तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
मौके पर संयुक्त निदेशक भारती प्रियंवदा, सहायक निदेशक रचना सिन्हा, सहायक निदेशक माला कुमारी, प्रशिक्षण पदाधिकारी जया मिश्रा, यूनिसेफ की पोषण अधिकारी डॉ. शिवानी दर सहित विभाग के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
3.आवेदन देने वाले शिक्षकों का ही होगा स्थानांतरण : मंत्री
पटना/शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी ने शुक्रवार को कहा कि आवेदन देने वाले शिक्षकों का ही स्थानांतरण किया जाएगा। अबतक राज्य के 22591 अधिशेष शिक्षकों ने आवेदन किया है। यह स्थानांतरण प्रक्रिया पूर्णतः स्वैच्छिक है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के समायोजन/ समानुपातिकरण की जो प्रक्रिया शुरू की गई है वह ऐच्छिक है। इस प्रक्रिया के तहत शिक्षक कम से कम एक स्कूल और अधिकतम 30 विद्यालयों का विकल्प चुन सकते हैं। शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षकों द्वारा जिन विद्यालयों का विकल्प चुना जाएगा उसी में उनका स्थानांतरण किया जाएगा। किसी भी शिक्षक का तबादला दिए गए विकल्प के अलाव दूसरे विद्यालय में नहीं किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए 29 जुलाई से पोर्टल खुला है। दो दिनों में 14796 सरप्लस शिक्षकों के स्तर से ऑनलाइन आवेदन किये गए हें। वहीं 7795 अधिशेष शिक्षकों ने आवेदन कर उसे सुरक्षित रखा है, उसे अंतिम रूप से पोर्टल पर सबमिट नहीं किया गया है। इस प्रकार दो दिनों में कुल 22591 शिक्षकों द्वारा आवेदन किये गए हैं। शिक्षा मंत्री ने बताया कि पारस्परिक स्थानांतरण के लिए दो दिनों में 2142 शिक्षकों ने आवेदन किया है। शिक्षकों के आवेदन में हो रही असुविधा को दूर करने के लिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की ओर से दो टोल फ्री हेल्प लाइन नंबर 14417 और 18003454417 जारी किए गए है। इसके अलावा ई- शिक्षाकोष का हेल्प डेस्क नंबर 9523300520 और 9430820499 जारी किया गया है।
4. मशरूम की खेती पर कृषि बिजली दर में किसानों को बड़ी राहत दे रही है सरकार
पटना/बिहार सरकार ने नियंत्रित वातावरण (कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट) में की जाने वाली मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब ऐसी मशरूम उत्पादन इकाइयों को बिजली की ‘कृषि श्रेणी’ की दर का लाभ मिलेगा। इसके तहत किसानों को मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट (0.55 रुपए/यूनिट) की दर से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से मशरूम उत्पादन की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, नियंत्रित वातावरण में खेती को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी। यह निर्णय “स्मार्ट खेती, समृद्ध किसान” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राज्य में मशरूम उत्पादन लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहां कुल उत्पादन 35 हजार मीट्रिक टन था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 42 हजार मीट्रिक टन और 2024-25 में लगभग 44 हजार 930 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। देश के कुल मशरूम उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है, जिससे राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
बिहार में मशरूम उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। कम भूमि, कम निवेश और कम समय में बेहतर आमदनी देने वाली यह गतिविधि छोटे एवं सीमांत किसानों, भूमिहीन परिवारों, महिलाओं तथा ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का सशक्त साधन बन रही है।
राज्य सरकार किसानों एवं उद्यमियों को वैज्ञानिक पद्धति से मशरूम उत्पादन के लिए अनुदान, प्रशिक्षण, आधारभूत संरचना तथा कृषि विश्वविद्यालयों के तकनीकी सहयोग की सुविधा उपलब्ध करा रही है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत वातानुकूलित आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है, जबकि राज्य योजना से मशरूम किट का वितरण एवं झोपड़ी आधारित मशरूम इकाइयों की स्थापना कराई जा रही है। नई कृषि बिजली दर से इन इकाइयों के संचालन पर होने वाला खर्च भी काफी कम होगा।
मुजफ्फरपुर, पटना, नालंदा, गया, वैशाली एवं पश्चिम चंपारण मशरूम उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। यहां उत्पादित मशरूम की आपूर्ति स्थानीय बाजारों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश तथा नेपाल तक की जा रही है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल रहा है।
मशरूम उत्पादन से जुड़ने के इच्छुक किसान, महिला स्वयं सहायता समूह एवं युवा उद्यमी प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं योजना के लाभ के लिए अपने निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), प्रखंड या जिला उद्यान कार्यालय अथवा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थानों से संपर्क कर सकते हैं।

