बिहार में गुमशुदा बच्चों के मामले 5 साल में 3 गुना बढ़े डीजीपी सख्त हर जिले में बनेगा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल महिला थानों में विशेष इकाई
कृष्णा कुमार
पटना/ बिहार में बच्चों की गुमशुदगी और मानव तस्करी के मामलों में लगातार इजाफा होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने कमर कस ली है। बीते 5 वर्षों में ऐसे मामलों में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे लेकर डीजीपी ने सभी जिलों को अलर्ट किया है।
डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि वर्ष 2020 में बच्चों के अपहरण के करीब 8 हजार मामले दर्ज हुए थे। वहीं 2025 में यह संख्या 24 हजार से अधिक हो चुकी है। आंकड़ों में हुई इस भारी बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अब गुमशुदगी के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।बढ़ते अपराधों पर रोक के लिए पुलिस मुख्यालय ने कई अहम फैसले लिए हैं।राज्य के सभी महिला थानों में ‘एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट’ का गठन होगा। महिला थानों में महिला एवं बाल अपराध जांच इकाई’ भी शुरू की जाएगी।
प्रत्येक जिले में मानव तस्करी रोकने के लिए विशेष सेल बनाई जाएगी, जो तस्करों के नेटवर्क पर निगरानी रखेगी
डीजीपी ने निर्देश दिया कि गुमशुदा बच्चों की बरामदगी और आरोपियों को सजा दिलाने के लिए त्वरित कार्रवाई की जाए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई तय है।एडीजी केएस अनुपम ने बताया कि बच्चों की तलाश को तेज करने के लिए राज्य के 1200 थानों को वात्सल्य पोर्टल से जोड़ा गया है। इस पोर्टल पर अब तक 10 हजार से अधिक गुमशुदा बच्चों का रिकॉर्ड अपलोड किया जा चुका है। इससे अन्य राज्यों की पुलिस के साथ भी सूचना साझा करने में मदद मिल रही है।मानव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे ‘नया सवेरा 3.0 अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एडीजी ने बताया कि अब तक इस अभियान के जरिए 88 मानव तस्करों को सजा दिलाई जा चुकी है और कई बड़े गिरोहों का पर्दाफाश किया गया है।

