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बिहार विधान सभा  अध्यक्ष डॉ० प्रेम कुमार सशक्त भारत मंच द्वारा सभा विस्तारित भवन स्थित 300 क्षमता वाले सभागार में आयोजित ‘70वीं बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले 225 अभ्यर्थियों के सम्मान समारोह में शामिल

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न्यूज डेस्क

पटना/बिहार विधान सभा के  अध्यक्ष डॉ० प्रेम कुमार सशक्त भारत मंच द्वारा बिहार विधान सभा विस्तारित भवन स्थित 300 क्षमता वाले सभागार में आयोजित ‘70वीं बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले 225 अभ्यर्थियों के सम्मान समारोह में शामिल हुए।

इस अवसर पर माननीय अध्यक्ष ने चयनित अभ्यर्थियों से कहा कि बीपीएससी की परीक्षा केवल एक प्रतियोगी परीक्षा नहीं है, बल्कि यह समाज और राज्य की सेवा का द्वार है। आप सभी ने कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और धैर्य के बल पर यह मुकाम प्राप्त किया है। आपकी सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी जो अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। आप अब ऐसे दायित्वपूर्ण पदों पर कार्य करेंगे जहाँ आपके प्रत्येक निर्णय का प्रभाव समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगा। इसलिए आपका चरित्र, आपकी ईमानदारी, आपकी संवेदनशीलता और आपकी कार्यकुशलता ही आपकी सबसे बड़ी पहचान होगी।

उन्होंने सभी चयनित अभ्यर्थियों से अपील की कि वे संविधान के मूल्यों, विधि के शासन तथा जनहित को सदैव सर्वोपरि रखें। हमारा संविधान हमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का मार्ग दिखाता है। एक लोकसेवक के रूप में आपका पहला दायित्व इन संवैधानिक आदर्शों को व्यवहार में उतारना है। प्रशासन केवल नियमों का पालन कराने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के विश्वास को मजबूत करने का दायित्व भी है। आपके कार्य से लोगों के जीवन में बदलाव आए, इसकी चेष्टा करें।

उन्होंने राष्ट्रकवि दिनकर की पंक्ति ‘मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है’ उद्धृत करते हुए कहा कि संकल्पित होकर 2047 तक विकसित भारत एवं विकसित बिहार के सपने को साकार करने में अपना प्रभावी योगदान दें।आज हमारा राज्य विकास, सुशासन, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। इस परिवर्तन यात्रा में आप जैसे युवा अधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। आपके निर्णयों और आपकी कार्यशैली से आम नागरिक का शासन के प्रति विश्वास और मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि एक अधिकारी की सबसे बड़ी शक्ति उसका पद नहीं, बल्कि उसकी निष्पक्षता, ईमानदारी और जनसेवा का भाव होता है। सदैव यह स्मरण रखें कि प्रशासन का अंतिम उद्देश्य जनता के जीवन को सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना है।

माननीय उप सभापति श्री रामवचन राय ने अपने संबोधन में अभ्यर्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें उच्च नैतिक मूल्यों के साथ सेवा करने की नसीहत दी। माननीय पूर्व राज्यपाल श्री गंगा प्रसाद ने अपने संबोधन में चयनित अभ्यर्थियों से कहा कि कर्तव्य का सम्यक निर्वहन आपका धर्म है। आशा करते हैं कि जिस उद्देश्य के साथ सेवा में आयें हैं उसे पूरा करेंगे। देश की आजादी की शताब्दी तक देश को विकसित बनाने में अपना योगदान दें।

माननीय उपाध्यक्ष श्री नरेंद्र नारायण यादव ने अपने संबोधन में चयनित अभ्यर्थियों से आह्वान किया कि कर्म को पूजा मानते हुए अपने कर्तव्यों का सम्यक निर्वहन करें। अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि हमेशा सेवक के रूप में कार्य करने की मानसिकता रखें। ईमानदारी और कर्म के बल पर आगे बढ़ें।

इस अवसर पर माननीय पूर्व राज्यपाल श्री गंगा प्रसाद, बिहार विधान परिषद् के माननीय उप सभापति डॉ० रामवचन राय एवं बिहार विधान सभा के माननीय उपाध्यक्ष श्री नरेन्द्र नारायण यादव की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही, कार्यक्रम के दौरान सशक्त भारत मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री निपुण आलमबायन एवं अन्य कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।