पुलिस की बेइज्जती होती हैँ फिर इज्जत बचाने के लिए भरत तिवारी को पागल घोषित उसके बाद एनकाउंटर करते हैं
न्यूज डेस्क
बिहार/भरत तिवारी पहले पिस्टल लेकर पुलिस वाले को डराते हैँ पुलिस भी डर के लौट आती हैँ।विडिओ वायरल हुवा पुलिस की बेइज्जती होती हैँ फिर इज्जत बचाने के लिए भरत तिवारी को पागल घोषित किया जाता हैँ। उसके बाद भरत तिवारी का विडिओ फोटो वायरल होता हैँ जिसमे वह समाज सेवा का काम करते हुवे दिखते हैँ तथा साथ मे जवनिया गांव जो पिछले साल बाढ़ मे गंगा मे पूरी तरह समा गई थी उस गांव के लोगो की समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाते हुवे दिखे, मतलब की उनके अंदर समाज सेवा तथा भ्रष्ट और लाचार सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत आ चुकी थी, वह लाचार सिस्टम को सुधारने के लिए फिल्मों से प्रेरित हो चुके थे जैसे हीरो बन्दुक उठाता हैँ और सिस्टम बदल देता हैँ, उनका हथियार उठाने का कतई मकसद नहीं था की वह किसी की हत्या करे, किसी को जान माल का नुकसान करे या ऐसा कोई अपराध करे जिससे किसी को नुकसान हो,
अब जब वर्तमान मे सब कुछ फिल्मों से ही सिखाया जा रहा हैँ तो सिस्टम से लाचार, बेरोजगारी से परेशान युवा फिल्मों से ही तो सीखेंगे, इतिहास फिल्मों से बताया जा रहा, आजादी कैसे मिली फिल्मों से बताया जा रहा हैँ तो भरत तिवारी ने फ़िल्म से ही सिख लिया की सिस्टम कैसे बदला जाता हैँ।
इज्जत बचाने के लिए पहले पागल घोषित किया गया प्रशासन के द्वारा फिर दूसरा कोई भ्रष्टाचार और सरकार के खिलाफ दुबारा ऐसा आक्रामक आवाज ना उठा पाए इस लिए एन्काउंटर कर दिया गया, वह भी हथियार डालने के बाद क्या जरूरत थी।

