जयनगर के मुक्ति धाम परिसर में फैले कचरे की दुर्गंध से आमजन परेशान
न्यूज डेस्क
मधुबनी/जयनगर कमला रोड स्थित साईं बाबा मंदिर के सामने अवस्थित मुक्ति धाम परिसर क्षेत्र में लंबे समय से फेंके जा रहे कचरे के कारण उत्पन्न दुर्गंध से आमजन, राहगीर एवं अंतिम संस्कार में आने वाले लोग काफी परेशान थे। मुक्ति धाम जैसे पवित्र स्थल के आसपास फैली गंदगी और कचरे के अंबार ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। स्थिति ऐसी हो गई थी कि वहां से गुजरने वाले राहगीरों को नाक बंद कर चलना पड़ता था तथा अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों को भी अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मुक्ति धाम परिसर के आसपास कई दिनों से लगातार कचरा फेंका जा रहा था। कचरे के सड़ने से उठने वाली बदबू ने पूरे क्षेत्र का वातावरण दूषित कर दिया था। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो गई थी। दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो रहा था। वहीं, श्रद्धालु एवं अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों को भी काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि यह केवल गंदगी का मामला नहीं था, बल्कि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका था। कचरे के ढेर के कारण मच्छरों एवं अन्य कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ने लगा था, जिससे बीमारी फैलने की आशंका भी बनी हुई थी। इसके बावजूद लंबे समय तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होने से लोगों में आक्रोश व्याप्त था।
इसी समस्या को देखते हुए मुक्ति धाम कमिटी के सदस्यों, जयनगर के गणमान्य लोगों एवं समाजसेवियों ने मिलकर पहल शुरू की। स्थानीय लोगों के सहयोग और गुप्तदान के माध्यम से मुक्ति धाम परिसर में फैले कचरे को हटाने का कार्य प्रारंभ किया गया। लोगों ने स्वयं श्रमदान कर क्षेत्र की साफ-सफाई की तथा पूरे परिसर को स्वच्छ बनाने का प्रयास किया।
सफाई अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में जमा कचरे को हटाया गया। इसके साथ ही परिसर को सुंदर एवं स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से बगीचा लगाने की भी पहल की गई। स्थानीय लोगों ने पौधारोपण कर क्षेत्र को हरियाली से जोड़ने का प्रयास किया ताकि भविष्य में यह स्थल स्वच्छ और सुंदर बना रहे। लोगों का कहना है कि मुक्ति धाम केवल अंतिम संस्कार का स्थान नहीं बल्कि आस्था एवं सम्मान से जुड़ा स्थल है, इसलिए इसकी स्वच्छता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
मुक्ति धाम कमिटी के सदस्यों ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार प्रयास किए गए। जयनगर के अनुमंडल पदाधिकारी से लेकर मधुबनी के जिला पदाधिकारी तक कई बार लिखित आवेदन दिया गया। इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री एवं देश के प्रधानमंत्री को भी पत्र, ईमेल और ट्वीट के माध्यम से इस गंभीर समस्या से अवगत कराया गया। लोगों ने मांग की कि मुक्ति धाम परिसर के आसपास स्थायी रूप से कचरा फेंकने पर रोक लगाई जाए तथा नियमित साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे संवेदनशील स्थलों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाएं तो इस प्रकार की समस्याओं से बचा जा सकता है। लोगों ने यह भी कहा कि नगर प्रशासन द्वारा यदि नियमित कचरा उठाव एवं निगरानी की व्यवस्था की जाए तो क्षेत्र को स्वच्छ रखा जा सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि केवल प्रशासन के भरोसे रहने से समस्या का समाधान संभव नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छता के प्रति जागरूक होना होगा। सार्वजनिक स्थलों, धार्मिक स्थलों एवं मुक्ति धाम जैसे स्थानों पर कचरा फेंकना न केवल गलत है बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से विमुख होने जैसा है। लोगों ने नागरिकों से अपील की कि वे कचरा निर्धारित स्थान पर ही डालें और स्वच्छता बनाए रखने में प्रशासन एवं समाज का सहयोग करें।
इस अभियान में शामिल लोगों ने बताया कि मुक्ति धाम परिसर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए आगे भी प्रयास जारी रहेंगे। बगीचे की देखरेख एवं साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था के लिए स्थानीय स्तर पर टीम भी बनाई जा रही है। लोगों का मानना है कि यदि समाज एकजुट होकर कार्य करे तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मुक्ति धाम परिसर के आसपास कचरा फेंकने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा वहां चेतावनी बोर्ड एवं सीसीटीवी कैमरा लगाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही नियमित सफाई कर्मियों की तैनाती कर क्षेत्र को स्थायी रूप से स्वच्छ बनाए रखने की पहल की जाए।
जयनगर में चलाया गया यह सफाई अभियान सामाजिक एकता और जनजागरूकता का उदाहरण बनकर सामने आया है। स्थानीय लोगों ने यह साबित कर दिया कि यदि समाज जागरूक हो जाए तो बिना किसी बड़े संसाधन के भी बदलाव संभव है। मुक्ति धाम परिसर की साफ-सफाई एवं सौंदर्यीकरण का यह प्रयास आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।

