NEET छात्रा केस: न्याय में देरी या सिस्टम फेल
न्यूज डेस्क
पटना/ राजधानी पटना में चर्चित NEET छात्रा दुष्कर्म एवं हत्या मामला अब कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
मामले में उस वक्त बड़ा मोड़ आया जब मुख्य आरोपी को अदालत से जमानत मिल गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस निर्धारित समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही, जिसके चलते आरोपी को कानूनी राहत मिली।
इस घटनाक्रम के बाद आम लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इतनी गंभीर वारदात में भी यदि समय पर साक्ष्य और दस्तावेज पेश नहीं किए जाते, तो न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है।
इधर, पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आलोचकों का आरोप है कि जहां त्वरित और सख्त कार्रवाई की जरूरत होती है, वहां लापरवाही बरती जाती है, जबकि अन्य मामलों में तेजी दिखाई जाती है।
राजनीतिक गलियारों में भी मामला गरमा गया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की चुप्पी को लेकर विपक्ष हमलावर है। लोगों का सवाल है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार बयान देने वाली सरकार इस मामले में अब तक स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रही।
फिलहाल, यह केस सिर्फ एक जघन्य अपराध की जांच नहीं, बल्कि बिहार में कानून-व्यवस्था, पुलिस जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

