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नीतीश से ज्यादा लालू की यादों में डूबे रहे सम्राट

बिहार हलचल न्यूज ,जन जन की आवाज
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राम दुलार यादव

बिहार में नवगठित सम्राट चौधरी सरकार ने विधान सभा में बहुमत साबित कर लिया। मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत विश्वास प्रस्ताव में ध्वनिमत से सदन ने सहमति जता दी। इसके साथ ही बिहार में भाजपा की सरकार आत्मनिर्भर बन गयी। भाजपा सरकार में चार अन्य दलों कुर्मी, कोईरी, मुसहर और दुसाध पार्टी ने भी भरोसा जताया। हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि संसदीय लोकतंत्र में सरकार किसी पार्टी विशेष की होती है। गठबंधन सरकार जैसी बात सिर्फ राजनीतिक अवधारणा है, संवैधानिक व्यवस्था नहीं। जैसे बिहार में भाजपा की सरकार है।
24 अप्रैल को विधान सभा में सम्राट चौधरी सरकार को बहुमत साबित करना था। हम भी सुबह 10.7 बजे विधान सभा परिसर पहुंचे। विधान सभा पार्टिकों के पास गहमागहमी थी। भाजपा और कोईरी जाति के विधायकों में खास उत्साह दिख रहा था। जाति और पार्टी की प्रतिबद्धता आमतौर पर हर मौके पर दिख जाती है। विजय सिन्हा जब स्पीकर थे, तब चिड़ियाखाना के पास सरकारी आवास भाजपा या भूमिहार विधायकों को आवंटित किया गया था। भाजपा विधायक के लिए जाति बंधन नहीं था और भूमिहार विधायकों के लिए पार्टी बंधन नहीं था। यही नजारा 24 अप्रैल को पार्टिको में दिख रहा था। एनडीए की किसी भी पार्टी के कोईरी विधायक समान रूप से हर्षित थे।
जब सीएम सम्राट चौधरी पार्टिको में पहुंचे तो गुलदस्ता देने की होड़ लग गयी। गुलदस्ता स्वीकार करते हुए वे स्पीकर चैंबर की ओर बढ़े। स्पीकर डाॅ प्रेम कुमार से मुलाकात करने के बाद वे मुख्यमंत्री चैंबर में गये। इस दौरान दो-चार विधायक भी चैंबर में प्रवेश पा गये थे। 10.37 बजे वेे अपनी कुर्सी पर बैठे। इसके बाद मिलने वाले आते-जाते रहे। हम इस बीच सत्ता और विपक्ष की लाॅबी में विधायकों की प्रतिक्रिया को समझने का प्रयास करते रहे। विधायकों में जो उत्साह पोर्टिको में उफान पर था, लाॅबी में आकर शिथिल दिख रहा था।
10.55 बजे विधान सभा की घंटी बजी। इसके बाद विधायक तेजी से सदन में आने लगे। 10.57 में सम्राट चौधरी ने हाउस में निर्धारित जगह पर कब्जा जमाया। ट्रेजरी बेंच में बैठने के अधिकारी सिर्फ तीन लोग थे। मुख्यमंत्री के साथ दोनों उपमुख्यमंत्री। लेकिन सीटिंग व्यवस्था को व्यवस्थित बनाये रखने के लिए दो पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को भी ट्रेजरी बेंच में पहली लाईन में बैठाया गया था, जबकि असमय मौत के शिकार हुए मंत्रिमंडल के सभी विधायकों को ट्रेजरी बेंच में ही बैठाया गया था। इसके साथ ही सभी दलों के विधायक दल के नेता को पहली पंक्ति में जगह दी गयी थी और सभी दलों के नेताओं को विश्वास मत पर अपनी बात रखने का मौका दिया गया।
विश्वास प्रस्ताव सीएम सम्राट चौधरी ने रखा, जबकि चर्चा की शुरुआत नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने की। इसके बाद उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने जदयू का पक्ष रखा। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार ने भी अपना पक्ष रखा। सबसे अंत में मुख्यमंत्री ने विश्वास प्रस्ताव पर अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और गृहमंत्री अमित शाह के प्रति आभार जताया। सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री के रूप में सदन में दिये गये पहले संबोधन में स्पष्ट कर दिया कि उनकी आगे की राजनीति नीतीश कुमार की तरह ही लालू फोबिया के आसपास ही चलेगी। दरअसल एनडीए का नीतीश माॅडल यही है। 21 साल बाद भी सवर्ण पोषित लाॅबी लालू निंदा से नहीं उबर पाया है। सीएम के संबोधन का सबसे रोचक पक्ष यह रहा कि नीतीश कुमार से ज्यादा वे लालू यादव को याद करते रहे।
सम्राट चौधरी ने भाजपा के अंदर के विरोधियों को साफ-साफ शब्दों में बताया कि वे कोईरी के खेत के गाजर-मूली नहीं हैं, जिसे कोई गोवार या भूमिहार उखाड़ ले जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने एमएलसी बनाया, प्रदेश अध्यक्ष बनाया, मंत्री बनाया और दो-दो बार उपमुख्यमंत्री की जिम्मेवारी सौंपी थी। इन जिम्मेवारियों का सफलतापूर्वक निर्वाह किया, तब केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री की इस कुर्सी की जिम्मेवारी सौंपी है। श्री चौधरी ने कहा कि बिहार का विकास ही उनकी प्रतिबद्धता और प्राथमिकता है।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट चौधरी एनडीए की दूसरी पीढ़ी हैं, जो अब सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी बात से इतना स्पष्ट हो गया कि अब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों रक्तसिंचित राजनीति का विस्तार कर रहे हैं और परिवारवाद कोई मुद्दा नहीं रहा है। बिहार में अब यह भी तय हो गया है कि आगे की राजनीति कोईरी बनाम यादव की होने वाली है और बाकी कुर्मी, राजपूत, भूमिहार, कहार, चमार आदि जातियां कभी इस खेमे के साथ तो कभी उस खेमे के साथ कूदती-फादंती रहेंगी।
लगभग पौने दो घंटे चली विश्वास मत पर चर्चा में दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए गये। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विजय सिन्हा का नाम लेते हुए सम्राट चौधरी पर तंज भी कसा। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष के हमलों का जवाब भी उसी अंदाज में दिया। जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार हैं, जबकि पार्टी के लिए निर्धारित समय में दो-तिहाई विजय चैधरी ही खा गये। श्रवण कुमार ने बोलना शुरू किया तो उन्हें समय समाप्त होने की नसीहत दी जाने लगी।
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का विरोध करने के लिए कांग्रेस और राजद के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाया गया, जिसका विरोध करते हुए विपक्ष सदस्य सदन से बाहर चले गये। सदन के दिवगंत पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि के साथ विधान सभा की बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गयी।