शपथ ग्रहण समारोह ऐसा लगा जैसे कोई औपचारिकता निभाई जा रही है : मधु कुमारी
न्यूज डेस्क
पटना/सम्राट चौधरी किस हालात में बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि शपथ ग्रहण समारोह ऐसा लगा जैसे कोई औपचारिकता निभाई जा रही हो ना उत्साह, ना ऊर्जा, ना वो राजनीतिक चमक-दमक थी।
शपथ ग्रहण में ना नरेंद्र मोदी दिखे, ना अमित शाह। बीजेपी के बड़े चेहरे गायब रहे। किसी भी राज्य का कोई मुख्यमंत्री तक शामिल नहीं हुआ। मंच सजा था, लेकिन माहौल जैसे लग रहा था मातम का हो।
अब जरा दिल्ली को याद कीजिए जब दिल्ली में बीजेपी ने अपना मुख्यमंत्री को शपथ दिलाया था, तो वो सिर्फ एक शपथ ग्रहण नहीं था वो एक शक्ति प्रदर्शन था।
पूरा केंद्रीय नेतृत्व मौजूद, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, भव्य मंच, बड़ी भीड़ थी। दिल्ली में जश्न था।
बिहार में जैसे मजबूरी थी। जबकि बीजेपी के लिए आज का दिन सबसे बड़ा होना चाहिए। हिंदी पट्टी का एकमात्र राज्य बिहार था जहां बीजेपी अपना सीएम नहीं बना पा रही थी। कई दशक से बीजेपी इस सपने को पूरा करने के लिए मेहनत कर रही थी।
ये जीत नहीं, समझौता ज्यादा लग रही है।
नीतीश की जिद ने सम्राट चौधरी के लिए यह रास्ता बनाया, बीजेपी ने हां किया लेकिन दिल से नहीं, दबाव में।
अंदर की बात तो यही है कि RSS – BJP के कार्यकर्ता खुश कम, उलझन में ज्यादा हैं।
जिन्होंने सालों तक नारे लगाए, जमीन पर पसीना बहाया… वो आज पूछ रहे हैं, क्या यही वो दिन था जिसका इंतजार था।

