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बिहार में खाकी पर रंग महिला सिपाही से बदसलूकी सस्पेंशन से नहीं धुलेंगे गुनाह

बिहार हलचल न्यूज ,जन जन की आवाज
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राजकुमार यादव 

बिहार में कानून के रखवाले ही जब कानून को शर्मसार करने लगें, तो सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख का बन जाता है। ताज़ा मामला मोतिहारी से सामने आया है, जहाँ पताही थाना में तैनात दरोगा सुदामा सिंह और मुंशी संतोष कुमार पर एक महिला सिपाही के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी का गंभीर आरोप लगा है।
घटना के सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। जिले के एसपी स्वर्ण प्रभात ने त्वरित कार्रवाई दिखाते हुए दोनों आरोपियों को सस्पेंड कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ सस्पेंशन ही न्याय है? क्या यह कार्रवाई महज़ “खाना पूर्ति” नहीं लगती।

बिहार पुलिस में इस तरह की घटनाएँ कोई नई नहीं हैं। खाकी के अंदर छुपे ऐसे गुनाह अक्सर दबा दिए जाते हैं, और पीड़ितों की आवाज़ फाइलों में कैद होकर रह जाती है। महिला सुरक्षा का दावा करने वाली व्यवस्था के भीतर ही जब महिलाएं असुरक्षित महसूस करें, तो यह पूरे तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान है।

जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष और कठोर जांच हो, ताकि दोषियों को सिर्फ निलंबन नहीं, बल्कि कड़ी सजा मिले। वरना खाकी का भरोसा यूँ ही तार-तार होता रहेगा, और रक्षक ही भक्षक बनने की कहावत बार-बार सच साबित होती रहेगी।