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जयनगर-नेपाल रेलखंड पर यात्रियों की सुविधा से ज्यादा तस्करी का साया, सुरक्षा के बीच सवालों के घेरे में व्यवस्था

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सुरेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट 

मधुबनी/जयनगर-नेपाल रेलवे स्टेशन के बीच संचालित रेल सेवा एक ओर जहां भारत और नेपाल के बीच आवागमन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है, वहीं दूसरी ओर इस रेलखंड पर बढ़ती तस्करी और यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं की कमी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। प्रतिदिन इस रेलमार्ग पर तीन फेरी ट्रेन भारत से नेपाल और नेपाल से भारत के बीच संचालित होती है, जिससे हजारों की संख्या में लोग आवागमन करते हैं। इन यात्रियों में रोजमर्रा के कामगार, व्यापारी, छात्र-छात्राएं और पारिवारिक कारणों से यात्रा करने वाले लोग शामिल होते हैं।

रेलवे प्रशासन द्वारा टिकट जांच को लेकर सख्ती बरती जाती है। ट्रेन में यात्रा कर रहे प्रत्येक यात्री के टिकट की बारीकी से जांच की जाती है। जिन यात्रियों के पास वैध टिकट नहीं पाया जाता, उनसे निर्धारित किराए का दोगुना फाइन वसूला जाता है। इस सख्ती के कारण कई बार यात्रियों को परेशानी का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन नियमों के पालन के लिए यह आवश्यक कदम माना जाता है।

हालांकि, यात्रियों की सुविधाओं की बात करें तो स्थिति संतोषजनक नहीं है। स्टेशन परिसर में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे यात्रियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। खासकर गर्मी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। यात्रियों को मजबूरन बाहर से पानी खरीदना पड़ता है या असुरक्षित स्रोतों का सहारा लेना पड़ता है। वहीं, स्टेशन पर केवल एक पे-एंड-यूज शौचालय मौजूद है, जो यात्रियों की संख्या के हिसाब से अपर्याप्त साबित हो रहा है। इससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष रूप से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह रेलखंड काफी संवेदनशील माना जाता है। स्टेशन परिसर में 48वीं बटालियन एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) के जवान तैनात रहते हैं, जो भारत-नेपाल सीमा पर निगरानी रखते हैं। वहीं, ट्रेन के भीतर और नेपाल की ओर सुरक्षा की जिम्मेदारी नेपाल के एपीएफ (आर्म्ड पुलिस फोर्स) के जवानों के हाथ में होती है। दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर सतर्कता बरतती हैं, जिससे सीमा पर शांति और व्यवस्था बनी रहे।

भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से गहरे संबंध हैं। दोनों देशों के नागरिकों के बीच न केवल व्यापारिक बल्कि सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते भी मजबूत हैं। यहां तक कि सीमावर्ती इलाकों में शादी-विवाह भी आम बात है। इस कारण यह रेल सेवा दोनों देशों के बीच रिश्तों को और मजबूती देने का काम करती है। इसे अक्सर “एक सिक्के के दो पहलू” की तरह देखा जाता है, जहां दोनों देश अलग होते हुए भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

लेकिन इन सबके बीच सबसे चिंताजनक पहलू है—इस रेलखंड पर तस्करी का बढ़ता नेटवर्क। सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद तस्कर इस रेल मार्ग का जमकर उपयोग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, तथाकथित ‘ब्लैकिया’ बिना वैध दस्तावेज (जैसे तीन नंबर और भेंट नंबर का पुर्जा) के सामान को मिलाजुला कर ट्रेन के माध्यम से नेपाल की ओर ले जाते हैं। यह सामान अक्सर ट्रेन के इंजन के आगे-पीछे या अन्य छिपे हुए स्थानों पर रखा जाता है, जिससे सामान्य जांच में पकड़ में नहीं आता।

सूत्रों की मानें तो तस्करी के इस खेल में कुछ स्थानीय तत्वों के साथ-साथ कथित रूप से स्टेशन पर तैनात कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत भी शामिल हो सकती है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही घटनाएं इस ओर इशारा जरूर करती हैं कि कहीं न कहीं निगरानी में चूक हो रही है। यह भी बताया जाता है कि तस्करों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि वे एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए हर संभव तरीका अपनाते हैं।

सबसे हैरानी की बात यह है कि स्टेशन परिसर में कस्टम विभाग की तैनाती होने के बावजूद तस्करी की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद तस्कर कैसे अपने मंसूबों में कामयाब हो रहे हैं। क्या यह केवल सिस्टम की कमजोरी है या फिर इसमें अंदरूनी मिलीभगत की भी भूमिका है—यह जांच का विषय है।

स्थानीय नागरिकों और यात्रियों का कहना है कि रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। स्टेशन पर आधुनिक निगरानी प्रणाली, जैसे सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने, नियमित जांच अभियान चलाने और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है। साथ ही, कस्टम विभाग और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी है, ताकि तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

IMG 20260401 WA0008 जयनगर-नेपाल रेलखंड पर यात्रियों की सुविधा से ज्यादा तस्करी का साया, सुरक्षा के बीच सवालों के घेरे में व्यवस्थाइसके अलावा, यात्रियों की सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, साफ-सुथरे और पर्याप्त संख्या में शौचालय, प्रतीक्षालय की सुविधा और सुरक्षा के प्रति भरोसा—ये सभी बुनियादी जरूरतें हैं, जिन पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। यदि इन समस्याओं का समाधान किया जाए, तो यह रेलखंड न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनेगा, बल्कि भारत-नेपाल के बीच संबंधों को और मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

IMG 20260401 WA0007 जयनगर-नेपाल रेलखंड पर यात्रियों की सुविधा से ज्यादा तस्करी का साया, सुरक्षा के बीच सवालों के घेरे में व्यवस्थाअंततः, जयनगर-नेपाल रेलखंड एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जो दो देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को जोड़ता है। लेकिन यदि तस्करी और अव्यवस्था जैसी समस्याओं पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस दिशा में गंभीरता से पहल करे, ताकि यह रेल सेवा अपने वास्तविक उद्देश्य—जनसेवा और विकास—को सही मायनों में पूरा कर सके।