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किसानों को तकनीक से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है सरकार का लक्ष्य : मंत्री।। 2.बालू घाटों को बीच में छोड़ने वालों को दोबारा टेंडर में नहीं किया जाएगा शामिल : उप-मुख्यमंत्री।।3.प्रभावी शासन के लिए प्रशासनिक आंकड़ों का सही उपयोग जरूरी : डॉ. विजयलक्ष्मी।। 4.साइंस सिटी में प्रदर्श लगाने का काम जल्द होगा पूरा।। 5 .स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला.सीएचसी में नियुक्त होंगे 1080 नेत्र और कान-नाक-गला रोग विशेषज्ञ।। 6 .डॉ. अम्बेडकर आवासीय विद्यालयों में नामांकन के लिए ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया शुरू।। 7.अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल से नहीं रुकेगा जनता का काम: उपमुख्यमंत्री।। 8.राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 93.12 लाख छात्र-छात्राओं को मिली पोशाक की राशि।। 9 .परिवहन मंत्री ने दालकोला चेकपोस्ट का किया निरीक्षण।। 10 .अध्यक्ष डॉक्टर प्रेम कुमार ने  लोक लेखा समिति एवं सरकारी उपक्रमों से संबंधित समिति के  सदस्यों,  वरीय पदाधिकारीगण एवं सभा सचिवालय के पदाधिकारीगण के साथ  समीक्षा बैठक

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राजकुमार यादव की रिपोर्ट 

पटना/हमारी सरकार का संकल्प है किसानों को तकनीक से जोड़ना, खेती को आधुनिक बनाना और किसान की आय बढ़ाना। इसको लेकर राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। ये बातें गुरुवार को राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कही। वे गांधी मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कृषि यांत्रीकरण मेला (एग्रो बिहार-2026) के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।
15 मार्च तक चलने वाले इस मेले का उन्होंने उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि लगभग 2 लाख से अधिक वर्ग फीट क्षेत्र में फैले इस मेले में 100 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए हैं। सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के कृषि यंत्र निर्माता भी यहां आए हैं। हमारी सरकार किसानों को अनुदानित दर पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध करा रही है और यह अनुदान डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जा रहा है। इससे किसानों को पारदर्शी और समय पर लाभ मिल रहा है।

तकनीक के साथ संगम है यह मेला
समारोह में कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि यह मेला किसानों का तकनीक के साथ संगम है। वर्ष 2011 से पटना में इस मेले का आयोजन किया जा रहा है। हम तकनीक के सहारे उत्पादन बढ़ा सकते हैं। बढ़ती आबादी और इसके कारण खेती पर बढ़ते दबाव को तकनीक के सहारे ही कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि एक बड़ी चुनौती यह है कि हमारे किसानों के पास जोत कम है, ऐसे में क्लस्टर खेती के माध्यम से किसान एक साथ समूह में खेती कर कृषि यंत्रों का लाभ उठा सकते हैं। राज्य के प्रत्येक जिले में कस्टम हायरिंग सेंटर की व्यवस्था की जा रही है, जिससे छोटे और सीमांत किसान भाड़े पर कृषि यंत्र लेकर खेती कर सकते हैं।

70 फीसदी आबादी कृषि पर आश्रित
इस मौके पर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) बिहार के अध्यक्ष गौरव साह ने कहा कि एग्रीकल्चर इनोवेशन, फार्म मैकेनाइजेशन, इकोनॉमिक एडॉप्शन और इंडस्ट्री-फार्मर पार्टनरशिप को बढ़ाने का यह एक महत्वपूर्ण माध्यम है। राज्य की 70 फीसदी आबादी कृषि पर आश्रित है, इसलिए खेती को अत्याधुनिक बनाना जरूरी है। कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने कहा कि कृषि को उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए यंत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एग्रो बिहार 2026 का आयोजन इसी उद्देश्य के साथ किया गया है। बिहार में यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए 91 प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है।

2.बालू घाटों को बीच में छोड़ने वालों को दोबारा टेंडर में नहीं किया जाएगा शामिल : उप-मुख्यमंत्री

पटना/राज्य में बालू घाटों का ठेका लेने के बाद इसे बीच में छोड़कर भागने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इस वर्ष बालू घाटों की बोली पिछले वर्ष के मुकाबले तीन से चार गुणा अधिक लगाकर घाटों को ले लिया गया, लेकिन इन्हें बीच में यह कहते हुए सरेंडर कर दिया कि मुनाफा नहीं हो रहा है। कुछ स्थानों पर बालू माफियाओं ने मिली भगत करके ऐसा किया है। अब बालू घाटों को सरेंडर करने वाली कंपनी या इसके निदेशकों या मालिकों को अब किसी भी नई टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। यह जानकारी खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री सह उप-मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने गुरुवार को दी है। वह विकास भवन सचिवालय में मौजूद उद्योग विभाग के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्व नुकसान पहुंचाने वाली ऐसी करीब 78 कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड करने की कवायद शुरू हो गई है।
इस मौके पर उपमुख्यमंत्री श्री सिन्हा ने 71 बिहारी योद्धा को पुरस्कार वितरित किया। ये वैसे योद्धा हैं, जिन्होंने अवैध खनन और ओवरलोडिंग खनिज वाहनों के बारे में विभाग को जानकारी देकर पकड़वाया है। सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए इनके नाम और पते गुप्ता रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसे करीब 78 घाट हैं, जिनकी बोली अधिक राशि में लगाकर पहले इसे ले लिया गया, फिर बीच में छोड़ दिया गया है। लेते समय इन लोगों को लगा था कि अवैध खनन करके बालू घाटों से मुनाफा कमा लेंगे, लेकिन विभाग की सख्ती के कारण इनके मंसूबे कामयाब नहीं हुए। जिन घाटों को सरेंडर किया गया है, उन्हें जिलों में डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला टास्क फोर्स को समुचित समीक्षा कर फिर से टेंडर करने के लिए कहा गया है। सरकार जल्द ही बंद पड़े घाटों का रेट रिवाइज करके इनकी निविदा फिर से निकालेगी।
बाहर से आने वाले खनिज वाहनों को ट्रांजिट चालान लेना अनिवार्य
मंत्री ने कहा कि बाहर के राज्यों से आने वाले खनिज लदे वाहनों के लिए ट्रांजिट चालान लेना अनिवार्य होगा। ट्रांजिट चालान की प्रक्रिया को कैबिनेट की भी अनुमति मिल चुकी है। इससे सीमावर्ती जिलों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। बाहर से प्रवेश करने वाले वाहनों को टीपी (ट्रांजिट पास) लेना अनिवार्य होगा। इन वाहनों को 85 रुपये प्रति घन फीट की दर से टीपी चार्ज देना होगा। सीसीटीवी के जरिए सीमावर्ती जिलों के प्रवेश मार्ग की सशक्त मॉनीटरिंग की जाएगी।
अब तक 3 हजार करोड़ राजस्व हो चुका संग्रह
खान एवं भूतत्व मंत्री ने कहा कि तमाम मुश्किलों के बाद भी राजस्व संग्रह में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 1600 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसी तरह 2024-25 में 3500 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3800 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 3 हजार करोड़ रुपये अब तक प्राप्त हो चुके हैं। मार्च अंत तक विभाग से 200-300 करोड़ रुपये और कार्य विभागों से 500-600 करोड़ रुपये प्राप्त होने की संभावना है। इस तरह लक्ष्य प्राप्त हो जाएगा।

राज्य में पहली बार वृहद खनिज की हुई पहल

उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार वृहद खनिज पदार्थों के खनन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसमें तीन खनिज ब्लॉक की नीलामी हो चुकी है। गया में दो निकेल और क्रोमियम खनिज ब्लॉक का टेंडर हो चुका है। रोहतास में ग्लूकोनाईट के एक ब्लॉक का कंपोजिट लाइसेंस जारी किया गया है। अन्य स्थानों पर भी मौजूद वृहद खनिजों के खनन को लेकर लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में बंद पड़े पत्थर खनन के कार्यों को फिर से शुरू किया जाएगा। इसे लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पत्थर खनन के लिए नियंत्रित तरीके से खनन प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

अवैध खनन को लेकर 31 हजार से अधिक हुई छापेमारी

अवैध खनन को लेकर राज्यभर में 2025 में अप्रैल से नवंबर तक 31 हजार 297 छापेमारी हुई है। 1600 एफआईआर दर्ज की गई है। 400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गृह विभाग से छापेमारी करने के लिए 400 अतिरिक्त पुलिस बल मंगवाए गए हैं। सभी घाटों की ऑनलाइन मॉनीटरिंग सीसीटीवी के जरिए हो रही है। छापेमारी के लिए फ्लाइंग स्कॉयड का गठन किया गया, जो रैंडम छापेमारी करती है।
प्रेस वार्ता के दौरान खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव दिवेश सेहरा, निदेशक मनेश कुमार मीणा समेत अन्य मौजूद थे।

3.प्रभावी शासन के लिए प्रशासनिक आंकड़ों का सही उपयोग जरूरी : डॉ. विजयलक्ष्मी

पटना /योजना एवं विकास विभाग के स्तर से गुरुवार को यूजिंग एडमिनिस्ट्रीटेटिव डेटा फॉर गवर्नेंस: लिंकिंग डिपार्टमेंटल डेटा ऐट स्टेट लेवल विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि विभागीय अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि प्रभावी शासन के लिए विभागों के बीच आपसी समन्वय जरूरी है। राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में उपलब्ध प्रशासनिक आंकड़ों का समन्वित और व्यवस्थित उपयोग कर आपस में बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकता है। इससे नीति निर्माण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
कार्यशाला राज्य में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सुदृढ़ करने, प्रशासनिक आंकड़ों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम मंत्रालय की ओर से अगले माह आयोजित होने वाले डेटा फॉर डेवेलपमेंट विषयक सम्मेलन की तैयारियों के क्रम में आयोजित हुआ।
डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि प्रशासनिक आंकड़े वैज्ञानिक विश्लेषण नीति निर्माण के साथ योजनाओं के मूल्यांकन के लिए काफी महत्वपूर्ण है। डेटा आधारित विश्लेषण से योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का आकलन और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में प्राप्त सुझावों एवं अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली चर्चा में साझा किया जाएगा।
इस अवसर पर प्रशासनिक आंकड़ों के मानकीकरण, विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझाकरण की व्यवस्था, डेटा के बेहतर उपयोग के माध्यम से नीति निर्माण और योजनाओं की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने के विषय में विस्तृत चर्चा की गई। विभाग का मानना है कि अलग-अलग विभागों के प्रशासनिक आंकड़ों के बेहतर समन्वय और उपयोग से राज्य में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को नई गति मिलेगी। साथ ही योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और मूल्यांकन को मजबूती मिलेगी। इससे विकसित बिहार@2047 के लक्ष्य की प्राप्ति होगी।
कार्यशाला में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, आईटी प्रबंधक, डेटा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञ, जिला एवं प्रखंड स्तर पर डेटा संकलन, विश्लेषण एवं निगरानी से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्य रूप से सचिव, योजना एवं विकास विभाग, श्री कंवल तनुज, निदेशक, निदेशालय अर्थ एवं सांख्यिकी, श्री रंजीत कुमार, उप महानिदेशक, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, पटना, श्री रौशन लाल साहू, निदेशक, डेवलपमेंट इन्फॉर्मेटिक्स एंड इनोवेशन डिवीजन, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, नई दिल्ली, श्री महेश चंद्र शुक्ला, निदेशक, नेशनल इंटेलिजेंट ग्रिड, नई दिल्ली, श्री राम नारायण यादव और निदेशक, मूल्यांकन निदेशालय, श्री रविश किशोर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञों की उपस्थिति रही।

4.साइंस सिटी में प्रदर्श लगाने का काम जल्द होगा पूरा

पटना/डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी के मुख्य विज्ञान दीर्घा में 47 प्रदर्श को स्थापित करने का कार्य चल रहा है। साथ ही सस्टेनेबल प्लैनेट गैलरी, स्पेस एंड एस्ट्रोनोमी गैलरी तथा बॉडी एंड माइंड गैलरी में भी प्रदर्शों को लगाने का कार्य प्रगति पर है। भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि की अध्यक्षता में गुरुवार को साइंस सिटी में प्रदर्शों को स्थापित करने के कार्य के प्रगति की समीक्षा की गई।
साइंस सिटी में कुल पांच गैलरियों का सिविल वर्क पूर्ण हो चुका है। पांचों गैलरियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 7 हजार 725 वर्गमीटर है। इनमें 26 थीम पर आधारित 269 विज्ञान प्रदर्श स्थापित किए जा रहे हैं। बीए साइंटिस्ट्स गैलरी एवं बेसिक साइंस गैलरी का लोकार्पण हो चुका है। आम लोगों के भ्रमण के लिए दोनों गैलरियां खुल गई हैं। करीब छह महीने पहले पिछले सितंबर में इस साइंस सिटी का लोकार्पण किया गया था। इसमें अब तक लगभग 1 लाख लोग भ्रमण कर चुके हैं।
प्रथम गैलरी (बीए साइंटिस्ट्स गैलरी) में 12 प्रदर्श अधिष्ठापन का कार्य पूर्ण हो गया है। जबकि, दूसरी गैलरी (बेसिक साइंस गैलरी) में 35 प्रदर्शों का अधिष्ठान हुआ है। बेसिक साइंस गैलरी में शेष 47 प्रदर्श लगाने के लिए प्रोटोटाइपिंग का कार्य हो गया है। ड्रॉइंग पर स्वीकृति मिलने के बाद अधिष्ठापन का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

इस बैठक में सस्टेनेबल प्लैनेट गैलरी, स्पेस एंड एस्ट्रोनोमी गैलरी तथा बॉडी एंड माइंड गैलरी में चल रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी ली गई। नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम (एनसीएसएम) के स्तर से क्रिएटिव म्यूजियम डिजाइनर्स (सीएमडी) के माध्यम से तीनों गैलरी में 175 प्रदर्शों का अधिष्ठापन किया जा रहा है। सस्टेनेबल प्लैनेट गैलरी में 52 प्रदर्श, स्पेस एंड एस्ट्रोनोमी गैलरी में 58 प्रदर्श तथा बॉडी एंड माइंड गैलरी में 65 प्रदर्श लगाया जाना है। परिसर में एसटीपी, डब्ल्यूटीपी का कार्य भी तीव्र गति से प्रगति पर है। प्रदर्श लगाने का काम चरणबद्ध तरीके से हो रहा और तीनों गैलरी में प्रदर्श लगाने में 213 करोड़ 85 लाख 55 हजार रुपये खर्च होंगे।
सचिव कुमार रवि ने बताया कि बेसिक साइंस गैलरी में बचे प्रदर्श अधिष्ठापन के कार्य के साथ-साथ शेष तीन गैलरी में भी प्रदर्श अधिष्ठापन का कार्य किया जा रहा है। प्रदर्श इंस्टॉलेशन का कार्य तेज गति से चल रहा है ताकि साइंस सिटी को शीघ्र पूर्ण रूप से संचालित किया जा सके। गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग एवं स्थल निरीक्षण किया जा रहा है।
इस समीक्षा बैठक के दौरान साइंस सिटी में सैदपुर की तरफ भी गेट खोलने को लेकर चर्चा की गई। इसे लेकर कार्यपालक अभियंता को आवश्यक निदेश दिए गए। सस्टेनेबल प्लैनेट गैलरी के माध्यम से आगंतुकों को बदलते ग्रह, जनसंख्या, प्रदूषण, कृषि, हरित शहरीकरण और बदलते शहरों की गतिशीलता को समझने के साथ-साथ ऊर्जा के उपयोग और संरक्षण और टिकाऊ समाधानों की गतिशीलता के बारे में जानकारी मिलेगी।
खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष आगंतुकों को प्राचीन काल से ब्रह्मांड के हिस्से की खोज करने और अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक में नवीनतम विकास की खोज करने के लिए एक असाधारण यात्रा पर ले जाएगा। वहीं बॉडी एंड माइंड गैलरी के माध्यम से छोटे बच्चे और उनके परिवार अनोखे तरीके से मानव शरीर के बारे में दिलचस्प जानकारी ले पाएंगे।

5 .स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला: सीएचसी में नियुक्त होंगे 1080 नेत्र और कान-नाक-गला रोग विशेषज्ञ

पटना/स्वास्थ्य सुविधा में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के अनुसार अब प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर नेत्र और नाक-कान-गला (ईएनटी) रोग विशेषज्ञों की तैनाती होगी। इसके लिए सरकार की ओर से सभी सीएचसी पर दो-दो के हिसाब से कुल 1080 अतिरिक्त पद सृजित किए गए हैं। इन पदों पर जल्द ही उपरोक्त विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
यह महत्वपूर्ण पहल सात निश्चय-3 के तहत ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार की ओर से की गई है। सरकार के विशेष सचिव की ओर से महालेखाकार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि भारतीय लोक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) के अनुसार सभी सीएचसी पर जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री, शिशु रोग विशेषज्ञ के साथ मूर्छक (एनेस्थेटिस्ट) जैसे महत्वपूर्ण पद पहले से सृजित हैं।
राज्य के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र (स्पेशियलिटी हॉस्पिटल) बनाने की दिशा में ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञ के लिए 2-2 अतिरिक्त पद सृजित किए गए हैं। यह सभी पद राज्य के 534 सीएचसी के साथ छह अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए सृजित हैं। इसके आलोक में प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और एक ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती होगी।
इस तरीके से पूरे राज्य भर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर कुल 540 नेत्र रोग और 540 ईएनटी के विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। इस मद में एक सौ 55 करोड़ छह लाख नवासी हजार 920 रुपए वार्षिक व्यय किया जाएगा।
*ग्रामीणों का स्थानीय स्तर पर होगा गुणवत्तापूर्ण इलाज*
सरकार और स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों का मानना है कि प्रखंड स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र बनाने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। मरीजों को आंख, कान, नाक और गला से संबंधित किसी भी रोग के इलाज के लिए जिला मुख्यालय तक की दौड़-भाग से छुटकारा मिलेगा। इससे ग्रामीणों की आर्थिक और समय की बचत होगी। बीमारी का स्थानीय स्तर पर तत्काल रूप में इलाज का लाभ प्राप्त होगा।

6 .डॉ. अम्बेडकर आवासीय विद्यालयों में नामांकन के लिए ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया शुरू

पटना/राज्य में डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय विद्यालयों में नामांकन के लिए ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से कक्षा 01 के नामांकन के लिए 9 से 14 मार्च के बीच विभिन्न जिलों में ऑनलाइन लॉटरी का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के माध्यम से पारदर्शी तरीके से विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।
विभाग के अनुसार, लॉटरी प्रक्रिया संबंधित जिलों में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जा रही है। यह प्रक्रिया अभिभावकों एवं संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में ऑनलाइन माध्यम से चयन किया जाएगा। लॉटरी के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों का नामांकन संबंधित विद्यालयों में किया जाएगा।
एससी-एसटी विभाग से संचालित राज्य के 91 डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय विद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए कक्षा 01 एवं कक्षा 06 में नामांकन के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इन विद्यालयों में कक्षा 06 में नामांकन के लिए 22 फरवरी को राज्यस्तरीय लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। वहीं कक्षा 01 में नामांकन के लिए ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली अपनाई जा रही है।
विभाग के माध्यम से संचालित ये आवासीय विद्यालय एससी-एसटी वर्ग के विद्यार्थियों को निशुल्क आवासीय शिक्षा, भोजन तथा अन्य शैक्षणिक सुविधाएं प्रदान करते हैं, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं समग्र विकास को प्रोत्साहन मिलता है।

7.अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल से नहीं रुकेगा जनता का काम: उपमुख्यमंत्री

पटना/राज्य में अंचलाधिकारियों, राजस्व अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों की चल रही हड़ताल के बावजूद आम लोगों के राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने व्यापक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की है। उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने गुरुवार को कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता है कि जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और जमीन से जुड़े आवश्यक कार्य नियमित रूप से चलते रहें।
उन्होंने बताया कि हड़ताल की स्थिति में भी विभागीय कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए गए हैं। इसके तहत राजस्व कर्मचारियों के कार्य पंचायत सचिवों को तथा अंचलाधिकारियों के कार्य जहां के राजस्व अधिकारी भी हड़ताल पर हैं वहां प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) को सौंपे गए हैं, ताकि आम नागरिकों को सेवाएं समय पर मिलती रहें। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मार्च माह में भूमि से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य होते हैं और बड़ी संख्या में लोग दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई मापी समेत अन्य सेवाओं के लिए आवेदन करते हैं। इसे देखते हुए विभाग ने पहले से ही सभी जिलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
उन्होंने बताया कि दाखिल-खारिज, परिमार्जन और ई-मापी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के निष्पादन के लिए विशेष डिजिटल मॉड्यूल तैयार कर सभी जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराया गया है। इन मॉड्यूल में कार्य करने की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है, ताकि संबंधित अधिकारी और कर्मी बिना किसी भ्रम के कार्य कर सकें। श्री सिन्हा ने कहा कि यह मॉड्यूल दो रूपों में उपलब्ध कराया गया है, एक वीडियो फॉर्मेट में, जिसमें चरणबद्ध तरीके से पूरी प्रक्रिया दिखाई गई है, और दूसरा विस्तृत लिखित निर्देशों के रूप में, जिससे अधिकारी–कर्मचारी आवश्यकता पड़ने पर उसे देखकर कार्य कर सकें। इससे नए दायित्व निभा रहे पंचायत सचिवों और प्रखंड विकास पदाधिकारियों को कार्य निष्पादन में आसानी होगी। इस दौरान किसी भी समस्या के समाधान के लिए सभी भूमि सुधार उप समाहर्ता और अपर समाहर्ता (राजस्व) को विशेष रूप से निगरानी समेत कार्य में मदद करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की पूरी निगरानी राज्य स्तर से की जा रही है और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करें। यदि कहीं कोई समस्या आती है तो उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुख राजस्व प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है। हड़ताल जैसी परिस्थितियों में भी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आम नागरिकों के जमीन से जुड़े कार्य बिना रुकावट जारी रहें और लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

8.राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 93.12 लाख छात्र-छात्राओं को मिली पोशाक की राशि

पटना/राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में बिहार के प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 93 लाख 12 हजार 192 छात्र-छात्राओं को स्कूल ड्रेस की राशि उपलब्ध करा दिया है। ताकि बच्चे स्कूल ड्रेस पहनकर विद्यालय जा सकें। इसके लिए शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना और मुख्यमंत्री पोशाक योजना के तहत छात्र-छात्राओं को 1047.08 करोड़ रुपये का भुगतान डीबीटी के माध्यम कर दिया है।
विदित हो कि राज्य सरकार ने प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को ड्रेस उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2008-09 में मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना और मुख्यमंत्री पोशाक योजना शुरू किया था। मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना के तहत कक्षा 1 और 2 में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए 600 रुपये, कक्षा 3 से 5 वीं के छात्राओं के लिए 700 और कक्षा 6 से 8 वीं की छात्राओं के लिए 1 हजार की दर से राशि प्रदान की जाती है। इसके अलावा मुख्यमंत्री पोशाक योजना के तहत कक्षा 1 से 2 के एपीएल छात्रों के लिए 400 रुपये, एससी/एसटी और बीपीएल छात्रों के लिए 600 रुपये, कक्षा 3 से 5 वीं में पढ़ने वाले एपीएल छात्रों के लिए 500 रुपये, एससी/एसटी और बीपीएल छात्रों को 600 रुपये, कक्षा 6 से 8 वीं में पढ़ने वाले सभी वर्ग के छात्रों को 700 रुपये की दर से राशि भुगतान किया जाता है।
इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के राजकीय, राजकीयकृत, गैर सरकारी सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 93 लाख 12 हजार 192 छात्र-छात्राओं को 75 फीसदी उपस्थिति के आधार पर पोशाक राशि भुगतान किया गया है। विभाग के मुताबिक राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में नामांकित छात्र-छात्राओं को पोशाक के लिए डीबीटी के माध्यम से 1047.08 करोड़ की राशि भुगतान की गई है।

9 .परिवहन मंत्री ने दालकोला चेकपोस्ट का किया निरीक्षण

पटना /परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने बुधवार को पूर्णिया जिले के दालकोला चेकपोस्ट का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने चेकपोस्ट पर मौजूद व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया और कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। मंत्री ने मौके पर मौजूद एक्साइज इंस्पेक्टर, अपर जिला परिवहन पदाधिकारी (एडीटीओ) सह करारोपण पदाधिकारी और प्रवर्तन निरीक्षक (ईआई) को सख्त हिदायत दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित 51 करोड़ 54 लाख रुपये के राजस्व संग्रहण लक्ष्य को शत-प्रतिशत हासिल किया जाए। इस लक्ष्य के विरुद्ध गौतम कुमार एसडीटीओ द्वारा कुल 16 हजार 613 वाहनों से राजस्व वसूली की गई है। इससे कुल 4 करोड़ 85 लाख 33 हजार 899 रुपए चालान के माध्यम से वसूल किए गए हैं। इसी तरह कुंदन कुमार ईआई द्वारा कुल 10 हजार 99 वाहनों से कुल 2 करोड़ 66 लाख 61 हजार 700 वसूल किए गए हैं।
मंत्री ने लक्ष्य के विरुद्ध कम राजस्व वसूली संग्रहण पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को तत्परता से कार्य करने का निर्देश दिया।

किशनगंज-अररिया सीमा पर ने चेकपोस्ट का होगा निर्माण
राजस्व संग्रहण कम पाए जाने पर पूछताछ के क्रम में अधिकारियों ने बताया कि किशनगंज-अररिया सीमा पर सड़क निर्माण होने के बाद वहां से अधिक मात्रा में वाहनों का आवागमन हो रहा है। जिसपर परिवहन‌ मंत्री ने गलगलिया में भी एक नया चेकपोस्ट निर्माण किए जाने का निदेश, ताकि बंगाल से बिहार आने वाले वाहनों की इंट्री के साथ परिवहन‌ संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित ना करने पर कार्रवाई की जा सके।

चेकपोस्ट की साफ-सफाई पर जताया असंतोष
निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री कुमार ने चेकपोस्ट की साफ-सफाई की स्थिति पर असंतोष जताया और इसे तुरंत सुधारने के आदेश दिए। उन्होंने सड़क की मरम्मती, चालान जारी करने वाली जगहों का रंग-रोगन करवाने व पूरे परिसर में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
मंत्री ने इस चेकपोस्ट की विशेष महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह राज्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चेकपोस्ट है। यहां से पूर्वोत्तर बिहार के विभिन्न जिलों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और सिलीगुड़ी की ओर जाने वाले वाहनों का भारी आवागमन होता है। इसलिए यहां की व्यवस्थाओं को और अधिक चुस्त-दुरुस्त रखना आवश्यक है ताकि राजस्व संग्रहण के साथ ही यातायात का सुचारु संचालन भी सुनिश्चित हो सके।
10 .अध्यक्ष डॉक्टर प्रेम कुमार ने  लोक लेखा समिति एवं सरकारी उपक्रमों से संबंधित समिति के  सदस्यों,  वरीय पदाधिकारीगण एवं सभा सचिवालय के पदाधिकारीगण के साथ  समीक्षा बैठक

बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉक्टर प्रेम कुमार ने अपने कार्यालय कक्ष में 3 बजे अपराह्न में लोक लेखा समिति एवं सरकारी उपक्रमों से संबंधित समिति के  सदस्यों, बिहार सरकार के वरीय पदाधिकारीगण एवं सभा सचिवालय के पदाधिकारीगण के साथ एक समीक्षा बैठक की।

इस बैठक माननीय अध्यक्ष ने इन समितियों से जुड़े विभाग में लंबित विषयों पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ मामले 2008 से ही लंबित है, जिससे यह परिलक्षित होता है कि विभाग का पूर्ण सहयोग समिति को नहीं मिल पा रहा है। हम सभी जनप्रतिनिधि जनता की सेवा करते हैं एवं उनके कार्य को समिति या सदन के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करते हैं। इन समितियों में लंबित 1000 से भी अधिक कंडिकाएं हमारी कार्य प्रकृति में सुधार की आवश्यकता की ओर इशारा करती हैं । माननीय अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि प्राथमिकता के आधार पर अगले 6 महीने में हम लंबित मामलों को निपटाने का प्रयास करें। मुख्य सचिव अपने स्तर से सभी विभागों को निर्देश दें कि समिति के कार्यों का ससमय निष्पादन किया जाय। अक्सर यह देखा जाता है कि विभाग की समीक्षात्मक बैठक में वरीय पदाधिकारी अनुपस्थित रहते हैं। यह बैठक के महत्व को कम करता है। बिहार विधान सभा की प्रभारी सचिव यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में सभी समीक्षात्मक बैठकों में संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। बैठक की तिथि संबंधित विभाग के प्रधान (अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव) की उपलब्धता के आधार पर रखी जाए क्योंकि विभाग प्रधान द्वारा यदि विभाग को निर्देश दिया जाएगा तो पूरी प्रक्रिया ससमय, पारदर्शी और गतिमान तरीके से पूरी हो सकेगी । सामान्यतया सत्र वर्ष में केवल तीन बार ही आहूत होता है, किंतु समितियां पूरे वर्ष सक्रिय होकर जनसाधारण के कल्याण एवं उनकी समस्याओं के निष्पादन हेतु कार्यरत रहती हैं । समिति विभिन्न मुद्दों की समीक्षा कर सरकार को सलाह भी देती है, जिससे बेहतर नियम,कानून एवं विधेयक लाए जाते हैं। भारतीय संसद में समितियां काफी सक्रिय हैं। ऐसी ही पद्धति हमें बिहार विधान सभा में लागू करनी है। समितियां मिनी पार्लियामेंट हैं, जिनकी सक्रियता सरकार की जवाबदेही तय करने के साथ सरकार को मदद भी करती हैं। मैं प्रति महीने सभी समितियों की एक समीक्षा बैठक अनिवार्य रूप से लूंगा। साथ ही, मैं सरकार से बात कर सत्र की अवधि को बढ़ाने की सिफारिश भी करूंगा ताकि सदन में विमर्श को ज्यादा समय मिल सके।

इस अवसर पर सरकारी उपक्रमों से संबंधित समिति के माननीय सभापति श्री हरि नारायण सिंह, लोक लेखा समिति के माननीय सभापति भाई वीरेंद्र, माननीय सदस्य सर्वश्री उमेश सिंह कुशवाहा, विजय कुमार खेमका,मनोज शर्मा, वित्त विभाग की सचिव श्रीमती रचना पाटिल,महालेखाकार के वरीय पदाधिकारी, बिहार विधान सभा की प्रभारी सचिव श्रीमती ख्याति सिंह सहित विभाग एवं सभा सचिवालय के अन्य वरीय पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।