अफसर नहीं बेटा बनकर आए DM के साथ अभद्रता – मधुबनी को शर्मसार करने वाली घटना
संपादकीय : राम दुलार यादव
मधुबनी / बाबूबरही प्रखंड के बलीराजगढ़ में हुई गोलीबारी की घटना पहले से ही पूरे जिले को दु:ख और आक्रोश में डुबो चुकी है। लेकिन उससे भी ज्यादा दु:खद और शर्मनाक है, उस घटना के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे जिलाधिकारी आनंद शर्मा के साथ किया गया व्यवहार।
जैसे ही डीएम आनंद शर्मा को सूचना मिली वे बिना समय गंवाए पुलिस अधीक्षक के साथ मौके पर पहुंचे। एक अधिकारी के तौर पर नहीं बल्कि एक बेटे के तौर पर। उन्होंने बारी-बारी से सभी लोगों से बात की परिजनों का दु:ख बांटा, बच्चों के सिर पर हाथ रखा और भरोसा दिलाया कि किसी भी सूरत में दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अपराधी की गिरफ्तारी के लिए 25,000 रुपये का इनाम तक घोषित किया और हर संभव मुआवजे की बात कही।
यह प्रशासनिक जिम्मेदारी से कहीं आगे बढ़कर मानवीय संवेदना थी
लेकिन अफसोस कुछ लोगों ने इस संवेदना को भी राजनीतिक चश्मे से देखा। बताया जा रहा है कि वहां मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों और राजनीतिक द्वेष रखने वाले लोगों ने जिलाधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार किया, जो पूरी तरह निंदनीय है। गलती यदि किसी एएसआई ने की है तो उसकी जांच होगी, सजा मिलेगी। लेकिन उसके लिए पूरे प्रशासन और एक ईमानदार कोशिश करने वाले डीएम का अपमान करना कहां का न्याय है?
एक जिलाधिकारी जिले का पिता तुल्य होता है। सुख-दुख में सबसे पहले पहुंचता है। जब वह बेटा बनकर आपके आंसू पोंछने आए, तो उसके साथ ऐसा सलूक? यह मधुबनी की सभ्य और शांतिप्रिय छवि पर दाग है।
बिहार हलचल न्यूज स्पष्ट शब्दों में इस अभद्र व्यवहार की निंदा करता है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि बलीराजगढ़ गोलीकांड के दोषियों के साथ-साथ डीएम के साथ दुर्व्यवहार करने वालों की भी पहचान कर कार्रवाई हो।
याद रखिए अफसर से लड़कर आप व्यवस्था नहीं बदलते, बल्कि अपने ही जिले को बदनाम करते हैं। आज मधुबनी को न्याय चाहिए, सियासत नहीं।

