देहरादून में मिथिला का परचम आदर्श भारद्वाज को मिला तृतीय अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान-2026
न्यूज डेस्क
देहरादून/देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के JSR Continental सभागार में संध्या आयोजित तृतीय अखिल भारतीय हरिवंश पुरस्कार समारोह-2026 में बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर के लाल, युवा साहित्यकार आदर्श भारद्वाज को बाल साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन मनोरथ प्रसाद हरिवंश स्मृति ट्रस्ट, उत्तराखंड* द्वारा किया गया, जिसका ध्येय है – _Recognising Excellence In Service To Society._ ट्रस्ट NITI Aayog, MSME मंत्रालय, ISO 9001:2015, CSR एवं eAnudan द्वारा मान्यता प्राप्त है और समाज सेवा, साहित्य, संस्कृति, कला, शिक्षा, पत्रकारिता एवं जनसेवा में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।
समारोह में अतिथियों की उपस्थिति ने इसे गरिमामय बना दिया।मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति राजेश टंडन, उच्च न्यायालय उत्तराखंड ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।अध्यक्षता परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी विद्या चैतन्य जी महाराज द्वारा की गई।विशिष्ट अतिथि महंत लोकेश दास जी महाराज, श्री जगन्नाथ आश्रम, ऋषिकेश।
ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती योगिता जोशी एवं राष्ट्रीय सचिव चंद्रवीर गायत्री ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।जब मंच से उद्घोषणा हुई कि बाल साहित्य का सम्मान झंझारपुर के आदर्श भारद्वाज को दिया जा रहा है, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। पीला कुर्ता, मिथिला पेंटिंग से सुसज्जित अंगवस्त्र और सिर पर मिथिला पाग धारण कर जब आदर्श मंच पर आए, तो यह दो संस्कृतियों – देवभूमि और ज्ञानभूमि मिथिला के मिलन का प्रतीक बन गया।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति टंडन ने सम्मान प्रदान करते हुए कहा, “आज जब युवा पाश्चात्य संस्कृति की ओर भाग रहे हैं, एक युवा का अपनी जड़ों और पाग के साथ मंच पर आना सिद्ध करता है कि संस्कृति ही सबसे बड़ा सम्मान है। यह सम्मान सभी युवा लेखकों के लिए प्रेरणा है।
महामंडलेश्वर स्वामी विद्या चैतन्य महाराज ने कहा मिथिला माता सीता की धरती है, जहाँ ज्ञान और त्याग का संगम है, आदर्श उसी परंपरा के वाहक हैं। महंत लोकेश दास जी ने कहा कि साहित्य ही वह सेतु है जो उत्तराखंड को मिथिला से जोड़ता है।आदर्श का जन्म मधुबनी के झंझारपुर में पिता डॉ. सुरविन्द कुमार झा और माता डॉ. सुधा झा के संस्कारित परिवार में हुआ। कक्षा 7 मात्र 11 वर्ष की आयु से लेखन प्रारंभ कर आज वे 9 पुस्तकों के रचयिता हैं ।अंग्रेजी में 7 पुस्तकें – _The Algorithm of Fear, Hidden World, Eternal Love, Divine Saga, Ink Before Age, The Midnight Anthologyऔर नवीनतम _The Student Who Never Left हिन्दी में बस्ते में कविता तथा मैथिली में भारत-भूटान मैत्री पर आधारित यात्रा वृत्तांत _नन्हकी आँखिसँ भूटान।
उन्हें इससे पूर्व 2nd International Achievers Award – Bhutan, International Star Kids Award, Atal Samman 2025, Magadh Gaurav Samman 2025, Writer of the Year 2026 सहित अनेक सम्मान मिल चुके हैं और वे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026 हेतु नामांकित हैं।
सम्मान के बाद आदर्श ने कहा, “यह सम्मान मेरा नहीं, मेरे माता-पिता के संस्कारों, गुरुओं के आशीर्वाद और मातृभूमि मिथिला का है। मैं बाल साहित्य के माध्यम से बच्चों में संस्कार और राष्ट्रप्रेम का बीज बोना चाहता हूँ।
समारोह में उनकी माता डॉ. सुधा झा, बहन सहित परिवारजन उपस्थित थे। देहरादून में रह रहे बिहार समाज ने भी उनका भव्य स्वागत किया। यह क्षण पूरे मिथिला और बिहार के लिए गौरव का क्षण बन गया, जिसने सिद्ध किया कि प्रतिभा छोटे कस्बे से भी निकलकर राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकती है।

